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“क्या बहुमत केवल शराब दुकान खोलने और छत्तीसगढ़ को बर्बाद करने के लिए मिला है..?” :—-छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा

दल्ली राजहरा
शुक्रवार 19 फरवरी 2026
भोजराम साहू 9893 765541
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा/छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ ने सरकार के आबकारी नीति की घोर निंदा कर सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार अमृतकाल को मदिरा काल में परिवर्तन कर दिया है,अब जैसे अमृत काल में सब कुछ संभव है,छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री जनक लाल ठाकुर ने कहा वर्तमान की बीजेपी सरकार को बहुमत केवल बड़ी संख्या में शराब दुकान खोलने और,स्कूलों को बंद करने, छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को लूटने के लिए मिला है।

सरकार आबकारी नीति में लगातार परिवर्तन करके राजस्व के लिए आतुर हो चुकी है राज्य के लिए क्या उचित है और क्या अनुचित है और इसके दूरगामी परिणाम कितने भयंकर होगे उस पर चिंतन भी नहीं किया जा रहा है,आम जनमानस पर नई शराब निधि के प्रभाव से सरकार ने मुंह मोड़ कर केवल राजस्व लाभ के लिए काम कर रही है,प्रदेश में सरकार अब बार और क्लब खोलने की तैयारी में है ।
धीरे धीरे सरकार पश्चिम सभ्यता की ओर छत्तीसगढ़ को धकेल रही है,सरकार होटलों और रेस्टोरेंट में बार खोलने की फीस काफी कम कर दी है । साथ ही साथ स्पेशल बार और क्लब भी इसमें शामिल है, अब सरकार के ऐसे फैसलों पर उनकी प्रशंसा तो नहीं की जा सकती है,सरकार शिक्षण संस्थाओं को बंद करके शराब दुकान जायदा से जायदा खोलने के पक्ष में है युवाओं को नशे के लत में डुबोकर उनके हक और अधिकारों से दूर कर रही है ।

छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके ने सरकार के इस शराब नीति की काफी निंदा किया और सरकार पर तंज कसते हुए कहा

सरकार युक्ति युक्तिकरण के माध्यम से प्राइमरी,माध्यमिक और उच्चतर विद्यालयों का विलय कर दिया लेकिन शराब दुकानों को इसके विपरीत देशी,अंग्रेजी, प्रीमियम शराब दुकान,बार और क्लब में बांट दिया,सरकार शराब का विस्तार और शिक्षा का संकुचित करना चाह रही है।
कि छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव सरकार ने अप्रैल से नई आबकारी नीति 2025—26 लागू की,और 67 नए दुकानों के साथ प्रदेश में शराब दुकानों की कुल संख्या अब 741 हो गई, जहां पहले शराब की सुविधा नहीं थी वहां भी अब दुकान खुल गई,सोचिए स्कूलों के लिए पैसे नहीं हैं लेकिन शराब बेचने से कमाई होगी। यह तर्क अब सरकारी नीति बन गई है। अब अगर छोटे-छोटे स्कूल बंद हो जाएंगे और बच्चों को दूर भेजा जाएगा जिससे कई बच्चो की पढ़ाई छूट जाएगी,माता-पिता डर से भी रोकेंगे और सुविधाओं की कमी से भी।





