
दल्ली राजहरा
रविवार 22 फरवरी 2026
भोजराम साहू 9893 765541
श्रमजीवी पत्रकार संघ दल्ली राजहरा के समस्त पदाधिकारियों एवं पत्रकारो ने भिलाई स्टील प्लांट के अंतर्गत आनेेे वाले राजहरा लौह अयस्क खदान समूह की प्रमुख लौह अयस्क खदानों महामाया, दुलकी एवं कलवर खदान का अध्ययनात्मक भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य पत्रकार साथियों को अपने क्षेत्र की औद्योगिक धरोहर, खनन प्रक्रिया एवं उत्पादन प्रणाली से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था।

संघ के अध्यक्ष श्री विरेन्द्र भारद्वाज ने कहा कि पत्रकार समाज का सजग प्रहरी होता है, इसलिए आवश्यक है कि वह अपने आसपास के औद्योगिक एवं आर्थिक केंद्रों को गहराई से समझे। इसी सोच के साथ यह भ्रमण आयोजित किया गया, ताकि पत्रकार साथी लौह अयस्क के उत्खनन, परिवहन एवं प्रबंधन की बारीकियों से अवगत हो सकें।

भ्रमण के लिए महाप्रबंधक श्री अरुण कुमार द्वारा अनुमति एवं पूर्ण सहयोग प्रदान किया गया। साथ ही तीनों खदानों के खदान प्रबंधक कुमार शिवेस (महामाया माइंस) मनीष जायसवाल ( दुलकी माइंस ) प्रवीण कुमार राय( कलवर नागुर ) तथा वरिष्ठ प्रबंधक सुशील कुमार ने वाहन एवं उपप्रबंधक (मा. सं ) गिरीश कुमार मढ़रिया का भी सहयोग प्राप्त हुआ ।

अतिरिक्त श्रम कल्याण अधिकारी घनश्याम पारकर एवं माइनिंग फोरमेन टी अमित कुमार के मार्गदर्शन में पत्रकारों ने खदान की विभिन्न इकाइयों का अवलोकन किया तथा खनन प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों, पर्यावरणीय प्रबंधन एवं उत्पादन प्रणाली की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।


उल्लेखनीय है कि —महामाया खदान, जिला बालोद ,दुलकी खदान, मानपुर-मोहला-अं. चौकी जिले,कलवर खदान, जिला कांकेर में स्थित है।
तीनों खदानें भौगोलिक रूप से तीन अलग-अलग जिलों में स्थित होते हुए भी एक ही जंक्शन बिंदु पर मिलती हैं। पत्रकारों ने खदान मे इस त्रि-जिला संगम स्थल का अवलोकन किया, जो क्षेत्र की विशेष भौगोलिक पहचान है। साथ ही दुलकी खदान के व्यू प्वाइंट से संपूर्ण खनन क्षेत्र का दृश्य भी दिखाया गया।

इस अवसर पर पत्रकारों ने खनन कार्य में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों, सुरक्षा उपायों एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी प्रयासों की सराहना की। भ्रमण कार्यक्रम ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रहा।
श्रमजीवी पत्रकार संघ ने खदान प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे अध्ययनात्मक कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही, जिससे पत्रकारिता और उद्योग के बीच संवाद और अधिक सशक्त हो सके।

आज का कार्यक्रम इस तरह से रहा सर्वप्रथम पत्रकार गण घनश्याम पारकर अतिरिक्त श्रम कल्याण अधिकारी एवं टी (अमित कुमार माइनिंग फोर मेन) के साथ महामाया प्रशासनिक भवन गए जहां पर दोनों ने पत्रकारों को महामाया दुलकी एवं कलवार माइंस के खनन क्षेत्र का प्रतिकृति ( मॉडल ) दिखाया की खदानों में खनन क्षेत्र कहां-कहां पर स्थित है जहां से लौह अयस्क का खनन किया जाता है । टी अमित कुमार ने बताया कि महामाया दुलकी और अब फरवरी 2024 से चालू हुए कलवर माइंस के खनन क्षेत्र के बारे में बताया ।
उसके बाद पत्रकारों ने तीनों माइंस का के खनन क्षेत्र का भ्रमण किया जहां पर उन्होंने महामाया माइंस कलवर और दुलकी के लौह अयस्क खनन क्षेत्र को रूबरू देखें ।उन्होंने जाना की यह माइंस बालोद मानपुर और मोहल्ला चौकी तथा कांकेर जिला को जोड़ती है ।

पत्रकारों ने महामाया माइंस दुलकी और कलवर के व्यू प्वाइंट पर जाकर देखा वहां उन्होंने प्रकृति के विभिन्न रूपों को देखा जहां पर दूर-दूर तक कई छोटे-छोटे पहाड़ हरियाली की चादर ओढ़ कर कोहरे में ढके नजर आ रहे थे । दूर कहीं गांव तो कहीं गांव के तालाब दिखाई दे रहे थे । घनश्याम पारकर ने बताया कि पास ही दुलकी गांव स्थित है जिनके नाम पर इस माइंस का नाम रखा गया है ।

पत्रकारों ने महामाया माइंस का लौह अयस्क खनन के बेंचेज के बारे में भी जानकारी लिया । जिसमें अमित कुमार ने बताया कि माइनिंग नियमों के तहत यहां बेंचेज बनाकर लौह अयस्क को निकाला जाता है । पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत होता है । उन्होंने दुलकी कलवर का व्यू पॉइंट महामाया माइंस में खनन, ट्रांसपोर्टिंग कैसे किया जाता है यह भी बताया । राकब्रेकर मशीन के जरिए उत्खनन से प्राप्त बड़े-बड़े बोल्डरों को छोटे-छोटे टुकड़ा में कैसे तोड़ा जाता है यह पत्रकारों ने भी देखा ।
पत्रकारों के सवाल पर बताया कि सबसे बेहतर उच्च क्वालिटी का आयरन ओर कलवर से प्राप्त हो रहा है । जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 725 मीटर की है । टी अमित कुमार ने खान प्रबंधक प्रवीण राय एवं अपने सहयोगियों के माध्यम से कलवर खान क्षेत्र में लगभग 300 से अधिक विभिन्न प्रजाति के फलदार पेड़ जिसमें आम जामुन अमरूद कटहल नींबू केला मूंनगा जैसे पेड़ लगाए हैं उसे दिखाए ।


पत्रकारों ने प्रकृति के कई रूपों इस भ्रमण के दौरान देखा जहां एक बरगद का पेड़ जो कि कितनी पुराना होगा यह तो उसे देख कर महसूस किया जा सकता है कि उसकी परिधि लगभग डेढ़ सौ मीटर से भी ज्यादा का होगा जहां पर बरगद के पेड़ के जड़ जमीन पर आकर फिर से पेड़ का रूप धारण कर लिए हैं


यहीं पर तीनों जिले के सरहद पर लगे पत्थर को दिखाया गया । जहां एक ओर बालोद तो दूसरी ओर कांकेर तथा तीसरी ओर मोहला मानपुर और चौकी जुड़ा हुआ है । खदानों में सुबह से शाम 5:00 बजे तक खनन का कार्य होता है यहां पर प्राकृतिक रूप से अनेक जीव जंतु पाए जाते हैं । जिसमें हरे रंग की सांप जंगली हिंसक पशु इस खदानों में भी दिखाते रहते हैं ।





