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“दो दुर्घटनाओ में पीड़ित परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं, वाहन मालिको और प्रशासन की लापरवाही का है नतीजा ।” :– छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा

दल्ली राजहरा

बुधवार 11 मार्च 2026

भोजराम साहू 9893 765541

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा/छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ दल्ली राजहरा डौंडि में हुए दुर्घटना जिसमें एक वनविभाग के कर्मचारी की मौत हो गई, शासन प्रशासन के लिए ये महज घटना है लेकिन किसी के घर का चिराग बुझ गया, घर की आर्थिक स्थिति को संभालने वाला जब नहीं रहता तो घर संभालना मुश्किल होता उसे केवल पीड़ित परिवार ही समझ सकता है, इस घटना का हम निंदा करते है और इसके खिलाफ हुए चक्काजाम का हम समर्थन करते है, आयरन ओर माइंस की गाड़ियों से क्षेत्र में लगातार दुर्घटनाएं बढ़ रहे हैं जिससे आर्थिक नुकसान के साथ ही जीवन भी गंवाना पड़ रहा है, इससे पहले भी पथराटोला गांव में सड़क किनारे गाड़ी घर में घुस गई थी, शासन प्रशासन की लापरवाही इसमें स्पष्ट देखने को मिल रही है, दुर्घटनाओं में हुए नुकसान की भरपाई हुए बिना गाड़ियों को छोड़ दिया जा रहा है, और पीड़ित परिवार और लोगों दर बदर भटकने के लिए मजबूर किया जा रहा हैं ।

 

छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ दल्ली राजहरा के अध्यक्ष सोमनाथ उइके ने कहा कि आयरन ओर माइंस की गाड़ियों से लगातार इस क्षेत्र में दुर्घनाएं बढ़ रही है, जब से इस क्षेत्र में आयरन ओर माइंस की गाड़ियों की शुरुआत हुई है तब से कई घटनाएं हो चुकी है,जिससे कई परिवार उजड़ चुका है,और इनकी स्थिति घटना के बाद क्या हुआ शासन प्रशासन ने इनकी सुध व जानकारी नहीं ली,प्रभावित परिवारों को किसी भी प्रकार से सहयोग व सुरक्षा नहीं मिला और नुकसान की भरपाई करवाने में शासन प्रशासन विफल रहा है, चक्काजाम या प्रदर्शन होने पर प्रशासन खानापूर्ति के लिए मांगे पूरी होने का आश्वासन दे दिया जाता और गाड़ियों को छोड़ मालिक के हवाले कर दिया जाता है, उधर पीड़ित दफ्तरों के चक्कर काटता रहता है, दल्ली राजहरा में भी धड़ल्ले से गाड़िया चल रही एंट्री और नो एंट्री के समय का कोई ठिकाना नहीं है,शासन प्रशासन को दुर्घटनाओं की रोकथाम के उक्त कदम उठाने की आवश्यकता है, आगे अगर अगली ऐसे कोई भी घटना होती है तो हम पूरे क्षेत्र के आयरन ओर माइंस की गाड़ियों का चक्काजाम करेंगे और जब तक पीड़ित को सही न्याय नहीं मिलता तब तक गाड़ियों को बंद रखेंगे।
क्षेत्र में परिवहन लगातार हो रहा है और ड्राइवरों को आराम करने का समय नहीं दिया जाता और वे अपनी रोजी रोटी चलाने के लिए मालिकों के दबाव में उन्हें काम करना पड़ा रहा है । ये भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण खदानो में 24 घंटा अत्यधिक खनन कर दोहन करना, प्रबंधन का मनमाना व्यवहार और संसाधनों का अत्यधिक उत्खनन के साथ ही साथ परिवहन अवागमन का 24घंटे संचालन होना है,जिससे मालिकों और ड्राइवरों को कमाने होड़ लगी हुई है, मालिक केवल कमाई का आंकलन कर रहा है लेकिन ड्राइवरों को मशीनों की तरह काम करवा कर उनकी परेशानियों की अनदेखी कर रहा है, ड्राइवर नींद के नशे में या अन्य किसी नशे के हालत में गाड़ियों को बिना स्पीड कंट्रोल के चला रहा है, अब तक जो घटनाएं हुई वो इन्हीं सब कारणों से हुआ है, गाड़ियों का क्षतिग्रस्त होने से बीमा कंपनिया गाड़ी मालिक को हुए नुकसान की भरपाई तो कर देता पर जो पीड़ित परिवार है उन्हें ऐसे ही छोड़ दिया जाता है, ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग ज्यादातर इससे प्रभावित है लेकिन कोई भी इससे खिलाफ लड़ने और खड़ा होने को तैयार नहीं है, क्षेत्र के लोगों के ऐसे ही कमजोरी का फायदा प्रबंधक, गाड़ी मालिक , और शासन प्रशासन उठा रहे है।क्षेत्र में वाहनों का स्पीड कंट्रोल करने के लिए स्पीड रडार और स्पीड गवर्नर जैसे तकनीकों का पिछड़ापन है जो सरकार के कमजोरी और लापरवाही को दर्शाता है।

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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