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“हिंदू धर्म खतरे में है ,तो इसकी जिम्मेदार हम स्वयं हैं । “:– मीनाक्षी सहरावत

दल्ली राजहरा
शनिवार 21 मार्च 2026
भोजराम साहू 9893 765541
लौह नगरी दल्ली में राजहरा सर्व समाज समरसता समिति द्वारा आयोजित भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 का दो दिवसीय आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ ।

भारतीय नववर्ष के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष की तरह सर्व समाज समरसता समिति द्वारा इस वर्ष भी दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया था प्रथम दिवस 19 मार्च को चिखलाकसा और दल्ली राजहरा नगर के 100 स्थानों पर भारत माता की सामूहिक आरती किया गया तथा द्वितीय दिवस 20 मार्च को पुरोबी वर्मा (अध्यक्ष सर्व समाज समरसता समिति) के नेतृत्व में संध्या 4 बजे शिव संस्कार धाम के पास से नववर्ष जागरण के लिए विशाल बाइक रैली मे निकाली गई ।

जिसमें मुख्य वक्ता सुश्री मीनाक्षी सहरावत ( हरियाणा ) प्रख्यात सामाजिक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वक्ता एवं सह संस्थापक सनातन महासंघ समलित हुई।

बाइक रैली माइन्स ऑफिस चौक होते हुए शहीद वीर नारायण सिंह चौक पुराना बाजार से चिखला कसा पहुंची।जहां से नगर पंचायत चिखला कसा होते हुए कार्यक्रम स्थल श्री राम मंदिर परिसर के पास पहुंची ।

संध्या 7 बजे मोटर साइकिल यात्रा के समापन पश्चात कार्यक्रम स्थल पर मीनाक्षी सहरावत के नेतृत्व में 1000 थाली के साथ मां भारती की दिव्य व भव्य सामूहिक आरती संपन्न हुआ l

कार्यक्रम में सर्व समाज समरसता समिति के अध्यक्ष पुरोबी वर्मा द्वारा अध्यक्षीय उद्बोधन और स्वागत भाषण दिया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि आज से 10 वर्ष पहले 28 फरवरी 2016 को नगर के 40 सनातन समाज को जोड़कर सर्व समाज समरसता समिति का गठन किया गया था । जिसका उद्देश्य था एक दूसरे समाज की अच्छाइयों को उभार कर आगे लाना और एक सुंदर स्वस्थ समाज के निर्माण करना । जहां पर प्रतिवर्ष हिंदू नव वर्ष मनाने का निर्णय लिया गया ।

इसे भारतीय नव वर्ष के बजाय आज हमें हिंदू नव वर्ष कहना पड़ रहा है ।क्योंकि पाश्चात्य हमारे समाज पर हावी होने लगा है हमारा उद्देश्य सर्व हिंदू समाज में भाईचारे की भावना जागृत करना है । उच्च नीच सामाजिक बुराइयों और क्षेत्रवाद तथा भेदभाव को समाप्त करना है तथा हिंदू धर्म संस्कार परंपरा रीति रिवाज का पालन करना संरक्षण करना तथा आने वाले पीढ़ी को हिंदू धर्म के प्रति जागरूक करना है । आप सभी से निवेदन है कि अपने आसपास के जरूरतमंद परिवारों का सहयोग करें उनके निर्धन बेटे बेटियों के शिक्षा और विवाह में सहयोग करें । हमारे सनातन के विरुद्ध जाने वाले का विरोध करें ।
मुख्य वक्ता मीनाक्षी शेरावत ने अपने वक्तव्य में कहा कि
सनातन धर्म की परिभाषा क्या है ..? किसी को यह कहा जाए कि सनातन धर्म क्या है तो वह बस यही कहेगा कि मैं इतना जानता हूं कि यह सबसे पुराना धर्म है । लेकिन सनातन धर्म की परिभाषा यह है कि सृष्टि के आरंभ होने से सृष्टि के अंत होने तक जो हमेशा से है और रहेगा । वह है सनातन धर्म । सनातन धर्म की परिभाषा बस इतना ही नहीं है । धर्म क्या है हम आने वाले पीढ़ी को बता सके धरायतें इति धर्म: अर्थात जो धारण करने योग्य है वही धर्म है । सच बोलना धारण करने योग्य है झूठ बोलना धारण करने योग्य नहीं है । तो इस सृष्टि में जो कुछ भी धारण करने योग्य है वही धर्म है जो सिर्फ सनातन संस्कृति है ।
जो व्यक्ति अपनी धर्म संस्कृति अपनी उत्पत्ति और अपने संस्कारों को नहीं जानता वह व्यक्ति उस जड़ रहित पेड़ की तरह है जिनके जड़ों को कीड़ा खा चुका है और उसे कभी भी उखाड़ कर फेंका जा सकता है ।
हम कई राज्यों में अल्पसंख्यक होते जा रहे हैं ऐसा क्यों…? हम कहते हैं कि हमारे धर्म खतरे में है इसकी जिम्मेदारी दूसरे धर्म वालों की नहीं है बल्कि हम सब हैं । किसी ने हमें खतरे में नहीं डाला आज हम अपनी संस्कृति अपने त्यौहार अपनी मान्यता को देखे । जो आपके पूर्वजों ने सिखाया वह आज बदल चुका है । इसके जिम्मेदार कौन है, हिंदू धर्म यदि खतरे में है उसकी जिम्मेदारी हमारी है । हमारे त्योहार को आप ध्यान से देखिए इसमें कई बदलाव आ चुके हैं क्या धर्म संस्कृति और समाज की जिम्मेदारी सिर्फ बड़े और बुजुर्गों की है ..? हमारे युवा पीढ़ी इससे दूर भागते जा रहे हैं क्योंकि हम उन्हें संस्कार नहीं दे पा रहे हैं ।

हमें अपने धर्म संस्कृति समाज पर गर्व होनी चाहिए । जब भी सनातन धर्म की रक्षा की बात आएगी सबसे आगे मै रहूंगा यह बात आप मन में ठान लें ।

आप संकल्प लें भारत विश्व गुरु था उसे फिर से विश्व गुरु बनाना है इसके लिए हमें उन पुराने दिनों के संस्कारों में जाना होगा अपनी संस्कृति और अपनी सभ्यता से हमारे देश विश्व गुरु था ।इसे फिर से बनाना है तो इसके लिए स्वबोध आवश्यक है । स्व बोध का मतलब है मैं कौन हूं मेरा अस्तित्व क्या है मेरी पहचान क्या है मेरी राष्ट्र के प्रति कर्तव्य का है मुझे राष्ट्र के निर्माण में क्या भूमिका निभानी है यही स्वबोध है । गौतम बुद्ध महावीर स्वामी जैसे हमारे कई धर्मात्मा हुए जो अपने आप को जाना तब उन्हें पता चला मेरा अस्तित्व क्या है मेरा राष्ट्र निर्माण में क्या योगदान है ।

हमने अपने आपको उच्च नीच जाति वाद और क्षेत्रवाद में इस तरह से बांट लिया है कि हम इस बंधन से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं । सभी ने अपने जीवकोपार्जन के लिए काम करना पड़ता है । किसी ने सोने का काम पकड़ा तो किसी ने लोहे का तो किसी ने कपड़ा धोने का तो किसी ने मटका बनाने का तो किसी ने कपड़ा बनाने का कार्य चुना इसमें कोई उच्च नीच नहीं हो जाता । हम सभी समाज के अंग हैं यह सोचकर राष्ट्र के निर्माण में सभी मिलकर अपनी भूमिका निभाएं ।
राष्ट्र की परिभाषा क्या है उन्होंने बताया कि राष्ट्र देश और आत्मा दो चीज से बना है । देश भूमि का टुकड़ा है और उसे भूमि पर रहने वाले लोग उसकी आत्मा है। यहां की संस्कृति सभ्यता खत्म हो जाए तो इसे राष्ट्र नहीं कह सकते । इसे देश या कंट्री कह सकते हैं । जब तक यहां की एकता संस्कृति और चेतना जीवित है जीवित रहेगी तभी हम इसे राष्ट्र कह सकते हैं ।

मेरे संस्कृति जो मुझे पूर्वजों ने दी है क्या मेरा आने वाली पीढ़ी इसे आगे ले जा पाएगा यह अब विचारणीय तथ्य हो गई है हम जब विकसित भारत की बात करते हैं तब इसके लिए आपको अपने घरों से शुरुआत करनी होगी । मैं क्या कर सकता हूं मेरा क्या योगदान है मुझे मेरे पूर्वजों ने क्या संस्कार दिए हैं और मैं अपने बच्चों को क्या दे रहा हूं हम जो मंच पर खड़े होकर कह रहे हैं उसे अपने जीवन में और समाज में उतारने योग्य होनी चाहिए । हम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पूजा कर रहे हैं लेकिन उनके चरित्र कोनहीं अपना पा रहे हैं । हमारे पास दो शिक्षा व्यवस्था थी विचार की शिक्षा और हथियार की शिक्षा जब अंग्रेज भारत आए तब इंडियन एजुकेशन एक्ट लाया जहां मैकाले की शिक्षा पद्धति आई जिसमें हमारे विचार छीन लिए गए इंडियन आर्मी एक्ट आया जिससे हमारे हथियार छीन लिए गए । हमारे भारत स्वाभिमान था किसी से मांग कर नहीं खाते थे अपना आभूषण खुले में रखते थे चोरी नहीं करते थे ।

झूठ नहीं बोलते थे क्योंकि हमारे शिक्षा पद्धति गुरुकुल में मिलती थी ।जहां वीर वीरांगनाओं की इतिहास पढ़ाई जाती थी भगवान श्री राम श्री कृष्ण के चरित्र पढ़ते और उसे अपनाते थे ।इन्होंने शिक्षा पद्धति लाकर इनको खत्म कर दिया अब युवा पीढ़ी पाश्चात्य के रंगों में रंग चुका है ।जय हिंद ,भारत माता की जय वंदे मातरम कहने में इन्हें हिचक होती है । इसके लिए आप सभी मातृशक्तियो को आगे आना होगा ।हमारे राष्ट्र निर्माण में आपका योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण है । इसके लिए सबसे पहले घरों को गुरु कुल में परिवर्तन करना होगा । पुरुष समाज का आधार होता है घरों को गुरुकुल बनाना है तो इसके लिए महिलाओं को आगे आना होगा ।

सबसे पहले आप अपने घरों की टीवी में आने वाली फिल्म धारावाहिक यह सब देखना बंद करें । टीवी को परिवार से दूर रखें । परिवार और चरित्र निर्माण करने वाली बातें अब टीवी में नहीं बताई जाती । बच्चों को आप वीर शिवाजी शहीद भगत सिंह जैसे बनाए । अपने घरों को गुरुकुल बना सकती है तो वह केवल मां है।

अपने बेटियों के लिए यदि किसी को आइकन बनाना है तो तैमूर की अम्मी नहीं शिवाजी की मम्मी होनी चाहिए । अपने घरों में वीर वीरांगनाओं की बातें करें । बच्चों को छत्रपति शिवाजी महा राणा सांगा महाराणा प्रताप , श्वेत केतु अष्टावक्र फतेह सिंह खुदीराम बोस सुखदेव राजगुरु वीर सावरकर की जीवनी पढ़ाये । अपने बेटे को सिखाओ पन्ना धाय का बलिदान ,दुर्गावती का साहस, विद्यावती का स्वाभिमान , ।

धर्म को गुरुकुल बनाकर बचाया जा सकता है इसलिए समरसता का भाव मन में लाएं । अंत में उन्होंने कहा की नारी कमजोर नहीं है वह शक्ति का प्रतीक है आपसे ही घर है आप से ही वसुंधरा है और आप ही जननी है राष्ट्र निर्माण में अपनी बहुमूल्य योगदान दे । कार्यक्रम के मध्य रानू निषाद बालोद ने दुर्गा वंदना की, रंजन भारद्वाज ने आरुग़ हे कलसा दाई, कश्यप जी ने वीर हनुमाना अति बलवाना की प्रस्तुति दी । तथा धर्मचंद जैन ( पूर्व सर संचालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ) ने ओज पूर्ण गीत गाया।
चंदन है इस देश की माटी,तपोभूमि हर ग्राम है ।
हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा-बच्चा राम है ।।
हर शरीर मंदिर सा पावन ,हर मानव उपकारी है ।।
जहां सिंह बन गए खिलौने ,गाय जहां मां प्यारी है !!
की बहुत बेहतरीन प्रस्तुति जी से उपस्थित दर्शकों ने उनके सुर में सुर मिला कर गाया । कार्यक्रम में मंच संचालन कृष्णा साहू एवं उपासना सिंह ने किया ।

समिति के द्वारा नारी शक्ति के प्रति धर्म जागरण को जन-जन तक पहुंचने वाले नगर के रामचरितमानस मंडली को सम्मानित किया गया जिसमें जय दुर्गा मानस मंडली दल्ली राजहरा श्री गणेश महीना मानस मंडली दल्ली राजहरा गौरीशंकर मानस मंडली नवदुर्गा मानस मंडली शक्ति मानस मंडली एवं अन्य मंडली को भी सम्मानित किया गया । साथ ही नगर के सभी समाज प्रमुखों को भी सम्मानित किया गया ।

सर्व समाज समरसता समिति द्वारा सप्ताह भर पहले से ही नगर के चौक चौराहो व मुख्य मार्ग के दोनों छोर के खम्बो को छोटे बड़े केसरिया ध्वज व तोरण पताको व बैनर पोस्टर से सजाया गया था| भारतीय नववर्ष को सफल बनाने के लिए समिति के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं के द्वारा विभिन्न समूहों के साथ लगातार बैठके कर व्यक्ति- व्यक्ति, समाज – समाज की सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया था| परिणामतः नगर के सभी वर्गों के द्वारा उक्त आयोजन को तन- मन -धन से सहयोग और समर्थन मिलने लगा l समिति द्वारा पिछले 10 वर्ष से लगातार क्षेत्र में सामाजिक समरसता के लिए कार्य किया जा रहा है उसका परिणाम अब धीरे धीरे आने लगा है l

कार्यक्रम में सभी राजनितिक पार्टी के कार्यकर्ता, स्वयं सेवी संगठन के कार्यकर्ता, सभी हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता व विभिन्न समाज के प्रमुख पदाधिकारी व सदस्यों की उपस्थिति रही है l






