दल्ली राजहरा
बुधवार 15 अप्रैल 2026
भोजराम साहू 9893 765541
                           विशेष 
👉अक्षय तृतीया के अवसर पर बालोद जिले में बाल विवाह की रोकथाम सुनिश्चित करने हेतु प्रशासन पूरी तरह से सतर्क ।
 👉कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने जिलेवासियों से इस पुनीत कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की ।
👉बाल विवाह के प्रकरण पाए जाने पर संबंधितों के विरूद्ध की जाएगी कड़ी कार्रवाई ।

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 कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार बालोद जिले में 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाह की रोकथाम सुनिश्चित करने हेतु जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा के दिशा-निर्देशन में अक्षय तृतीया के दिन जिले में एक भी बाल विवाह न हो पाए इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग तथा संबंधित विभागों के द्वारा समन्वित उपाय सुनिश्चित किए जा रहे हैं। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने जिले वासियों को बाल विवाह की दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए संपूर्ण जिले वासियों से बाल विवाह की रोकथाम के पुनीत कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई एवं अपराध है। जो बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और विकास में बाधक है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह उनके सपनों को साकार होने से रोकती हैं। 
 उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा 10 मार्च 2024 को छत्तीसगढ़ राज्य को 31 मार्च 2029 तक बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने का संकल्प लिया गया है। इसके अंतर्गत राज्य शासन द्वारा वर्ष 2025-26 से 2028-29 तक चरणबद्ध रूप से बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने हेतु लक्ष्य निर्धारित कर निर्देश जारी किए गए है। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने कहा कि 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया है, इन अवसरों पर बाल विवाह की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों को सजग एवं सतर्क रहने की आवश्यकता है।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 अनुसार 21 वर्ष से कम आयु के लड़के और 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के विवाह को प्रतिबंधित करता है। इस अधिनियम में सजा के प्रावधान अनुरूप दो वर्ष तक कठोर कारावास अथवा जुर्माना जो कि 01 लाख रूपए तक हो सकता है अथवा दोनों से दण्डित किया जा सकता है। कोई व्यक्ति जो बाल विवाह करवाता है, करता है अथवा उसमें सहायता करता है उन्हें दण्डित किया जा सकता है। कोई व्यक्ति जो बाल विवाह को बढ़ावा देता है अथवा उनकी अनुमति देता है, बाल विवाह में सम्मिलित होता है वह भी दण्ड का भागीदार होगा। अधिनियम के अनुसार किसी महिला को कारावास का दण्ड नही दिया जा सकता है।
 ज्ञातव्य हो कि बालोद जिले की सभी 436 ग्राम पंचायतें एवं 09 नगरीय निकाय बाल विवाह मुक्त घोषित हो चुके है। वर्तमान में पंचायत सचिव एवं पर्यवेक्षक महिला बाल विकास विभाग बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी संसूचित है। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने कहा कि जिले में बाल विवाह की रोकथाम सुनिश्चित करने हेतु पंचायत स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए हम सभी को मिलकर बाल विवाह मुक्त बालोद अभियान को आगे बढ़ाना है। जिससे हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित एवं उज्ज्वल हो सके। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने सभी जिले वासियों, जनप्रतिनिधियों, सर्व समाज प्रमुखों के साथ-साथ विशेषकर युवा पीढ़ी से पूर्ण जागरूकता का परिचय देते हुये बाल विवाह के रोकथाम के पुनीत कार्य में सहभागी बनने की अपील की है। 

 

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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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