छत्तीसगढ़डौंडीदल्लीराजहराबालोदविविध

चार दिन की लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा की तैयारी पूर्ण सोमवार को डूबते सूर्य एवं मंगलवार को उगते सूर्य को अर्ध देने के साथ होगी महापर्व की समाप्ति l

दल्ली राजहरा रविवार 26 अक्टूबर 2025 भोज राम साहू 98937 65541 

 छत्तीसगढ़ यूपी बिहार संस्कृति समन्वय समिति के अध्यक्ष राज किशोर सिंह ने बताया कि हिंदू धर्म में हर जगह पूजा के समय उगते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है l लेकिन यह हमारा एक ऐसा त्यौहार है जहां उगते सूर्य के साथ-साथ डूबते सूर्य को भी अर्ध्य दिया जाता है l छठी मैया से जो भी मुरादे मांगी जाती है l वह अवश्य पूरा होता है l छठ पूजा भारतीय सनातन परंपरा का जीवंत उदाहरण है । जहां हमारे पूर्वजों ने इसी संस्कृति का निर्माण किया है जो प्राकृतिक उपासना करती है सूर्य जल भूमि कृषि अन्य को कृतज्ञता के भाव से नमन करती है । इस पर्व के कारण यूपी बिहार से आए विभिन्न क्षेत्र के लोगों का एक जगह मिलन होता है ।

सचिव प्रमोद तिवारी ने बताया कि दल्ली राजहरा लौह नगरी में खदान की शुरुआत होते ही रोजगार के लिए अन्य प्रांत के अलावा यूपी बिहार से भी लोग दल्ली राजहरा आए थे । रोजगार की तलाश में यहां आने के साथ-साथ लोग अपनी संस्कृति ,परंपरा भी साथ लेते आए ।इसी परंपरा और अपने संस्कृति को पूर्ण निष्ठा के साथ निभाते हुए दल्ली राजहरा में निवासरत यूपी, बिहार समुदाय के लोग छठ पर्व बड़ी धूमधाम के साथ मनाते आ रहे हैं l जहा सीमित के द्वारा बीएसपी टाउनशिप स्थित छठ घाट की साफ सफाई और पूजा के लिए वेदी बनाये गए ।

 नपा द्वारा टाउनशिप स्थित छठ घाट परिसर व सड़क की सफाई किया गया तथा कृत्रिम तालाब को जल से भरा गया है l इस दौरान नपा अध्यक्ष तोरण लाल साहू के द्वारा पूजा स्थल छठ घाट पर उपस्थित होकर पूरी तन्मयता से सहयोग किया गया l 

➡️🔥🪷चार दिन का है छठ महापर्व , जाने किस दिन क्या होता है ।🪷🔥⬅️

👉 प्रथम दिन (नहाए खाए)

यह पर्व की शुरुआत नहाए खाए से होती है इस दिन व्रती महिलाएं सुबह नहा धोकर भगवान की पूजा अर्चना करती है तथा सात्विक भोजन ग्रहण करती है इस भोजन में लहसुन एवं प्याज निषिद्ध रहता है ।

👉 दूसरा दिन (खरना)

इस महापर्व में खरना के तहत महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं। कठोर नियमों का पालन करना होता है। शाम को वही घर वालों के लिए भोजन भी बनाती हैं। पूड़ी और तस्मई (गुड़ या शक्कर की खीर) प्रमुख होते हैं। तस्मई में एक बूंद पानी का प्रयोग नहीं होता है और दूध भी उसी गाय का इस्तेमाल किया जाता है जिसका बछड़ा जीवित रहता है। शाम सूर्यास्त के बाद महिलाएं खरना पूजा करने के बाद प्रसाद ग्रहण कर अपने उपवास का पारण करती हैं।

👉 तीसरे दिन (संध्या अर्घ्य /डूबते सूर्य को अर्ध)

तीसरे दिन व्रती महिलाओं का उपवास फिर शुरू हो जाता है, जो लगभग 36 घंटे चलता है। यह भी निर्जला होता है। परिवार के बच्चे या युवा दलिया और सूप तैयार करते हैं, जिनमें ठेकुआ, लडुआ, सांच और घर के पास उगने वाली कोई भी फसल गन्ना, संतरा, सेब से लेकर मूली, केला, मूंगफली, मकई तक हो सकते हैं। घर के पुरुष इन डलियों को सिर पर लेकर घर से घाट तक जाते हैं। व्रती महिलाएं जल में स्नान कर ढलते सूर्य की वंदना करती हैं। वे हर डलिया को एक दीप के साथ हाथ में लेतीं हैं ।वे और परिवार के अन्य सदस्य डलिया में जल और दूध से अध्य देते हैं। महिलाएं फिर एक बार स्नान करतीं हैं और घाट पर पूजा होती है। डलिया को पुरुष सदस्य वापस घर ले आते हैं और इसे सहेज कर रातभर के लिए ऐसी जगह स्थापित किया जाता है, जहां गलती से स्पर्श, पैरों का लगना आदि न हो।

👉 चौथा दिन उगते सूर्य को अर्ध 

यह छठ पूजा का अंतिम दिन होता है जहां सुबह 4:00 बजे से ही अपने-अपने घरों से लोग उगते सूर्य को अर्द्ध देने के लिए अपने परिवार के साथ छोटी-छोटी टोली बनाकर छठ घाट जाते  हैं l कई परिवार बैंड बाजा के साथ तो कोई छठी मैया के लोकगीत गाते हुए छट घाट पहुंचते  हैं l हजारों की भीड़ में व्रती महिलाएँ सुबह पानी में उतर कर सूर्योदय का इंतजार करते  हैं, तथा सूर्य देव के प्रकट होते ही जल और दूध का अध्य दिया जाता है।  

यह लोक आस्था का पर्व संयम और प्राकृतिक नियमों के साथ-साथ जीवन जीने की सीख भी देता है । छठ महापर्व के दौरान व्रती महिलाएं सूर्य देवता और छठी मैया की पूजा करती है और परिवार की सुख समृद्धि की कामना करती है । इस पर्व में शुद्धता का बहुत महत्व है । जहां सात्विक भोजन करना होता है 36 घंटे तक निर्जला उपवास के दौरान जल और अन्न का सेवन नहीं करना होता  है । व्रती को  शांत और  निर्मल मन से पूजा अर्चना करनी होती है । मन में क्रोध कटु वचन अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना होता है । जमीन में सोना होता है और शरीर तथा मन को शुद्ध रखते हुए ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना होता है । सूर्योदय और सूर्यास्त के सटीक समय  का पालन करना होता है । अर्द्ध देते समय मन में केवल श्रद्धा और परोपकार का भाव रखना होता है । पूजा के दौरान एकांत में बैठकर ध्यान और मत्रों का उच्चारण करना होता है ।

➡️ 🔥🪷कौन है छठी मैया🪷🔥⬅️

 मार्कंडेय पुराण के अनुसार सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया छठवें अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी माना गया है । इसे ब्रह्मा की मानस पुत्री के रूप में भी जाना जाता है। इस पूजा के माध्यम से व्रती भगवान सूर्य को धन्यवाद देते हैं और उनके साथ माता गंगा  यमुना को साक्षी मानकर सूर्य को अर्ध देते हैं । यह पूजा संतान एवं परिवार की रक्षा के लिए की जाती है l

🔥🪷छत्तीसगढ़ यू पी बिहार सांस्कृतिक समन्वय समिति के पदाधिकारी गण 🪷🔥

संरक्षक अभय सिंह, पी के सिंह,बालमुकुंद सिंह वशिष्ठ रस्तोगी, सुभाष शर्मा, कृष्णा सिंह,अध्यक्ष श्री राजकिशोर सिंह, सचिव प्रमोद तिवारी उपाध्यक्ष रवि जायसवाल कार्यकारणी सदस्य अश्विनी दुबे, जोगेंद्र ठाकुर, राजेश चौहान, सुरेश जायसवाल अश्विनी ,रामजीत, रामलाल यादव, स्वपनिल तिवारी, विजय सिंह, उपेन्द्र सिंह, सन्तोष बरनवाल,अमर जायसवाल हैं l समाज के सभी लोगों का इस कार्यक्रम में सहयोग रहता है।

 

 

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!