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माता-पिता के द्वारा की गई प्यार और उनकी सेवा को जीवन में कभी चुकाया नहीं जा सकता ,वह अमूल्य होता है ..! : —- वेदाचार्य पंडित अनिल तिवारी

दल्ली राजहरा बुधवार 26 नवंबर 2025

भोज राम साहू 9893765541

लौह नगरी दल्ली राजहरा में   श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन नगर वासियों के द्वारा 21 नवंबर से 29 नवंबर तक दोपहर 2:00 बजे से शिकारी बाबा वार्ड क्रमांक 5 के 256 चौक पर किया जा रहा है । श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पारायणकर्ता है भगवताचार्य पंडित अनिल तिवारी ।

श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कल गजेंद्र मोक्ष ,सागर मंथन ,वामन चरित्र , श्री राम चरित्र और श्री कृष्ण जन्म की कथा बताई भागवताचार्य पंडित अनिल तिवारी ने कथा के मध्य में बताया कि हमें जीवन में माता-पिता की हमेशा ऋणी होना चाहिए । उनके द्वारा हमें सवारने और योग्य बनाने के लिए उनके द्वारा किए गए तपस्या का कोई कीमत नहीं है ।वह अमूल्य है उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि एक परिवार बहुत ही निर्धन था उनके दो बेटे थे । पति-पत्नी दिन रात मेहनत करके इतना धन बहुत ज्यादा धन जमा कर लिए ।उनके पास जमीन खेत खलिहान के अलावा अपार संपत्ति भी हो गई । इस बीच उनकी पत्नी के निधन हो गया बेटे बड़े हो गए दोनों बेटों की विवाह हो गया । बहुएं आई अब बहू के द्वारा वृद्ध ससुर की सेवा करने की बजाय उनके मृत्यु की कामना करने लगे ताकि उनके द्वारा जमा किए गए धन का दोनों भाइयों के बीच बटवारा हो सके । दोनों बहुओं ने एक ब्राह्मण को बुलाकर उनसे पूछा ब्राह्मण देव यह बताएं कि हमारे बीमार ससुर की मृत्यु कब होगी..?आपको जो मुंह मांगी दक्षिणा होगी हम लोग देंगे..? साथ ही हमारे ससुर देव जी की जल्दी मृत्यु भी कैसे हो इसके लिए उपाय भी बताएं..?

ब्राह्मण देव उनकी भावनाओं को ताड़ गये कि जिन बेटों को रात दिन मेहनत करके योग्य बनाया सुख सुविधा दी आज उनके बहू आने के उपरांत उनकी मौत की कामना कर रही है और उनके मृत्यु के लिए उपाय ढूंढ रहे हैं । ब्राह्मण देव उसे व्यक्ति से मिला तो ब्राह्मण देव को देखकर वह रो पड़ा उन्होंने बहू के द्वारा दी जाए जा रही कष्ट के बारे में बताया । बीमार होने के उपरांत बहुएं उन्हें खाना दवाइयां देना बंद कर दी है ।शरीर दिन-ब-दिन छिन्न होती जा रही है ना जाने कब यमदेव की दर्शन हो । ब्राह्मण देव ने शास्त्र को देखकर झूठ बोलते हुए उनके बहू को बताया कि आपके ससुर जी की मृत्यु करीब है । लेकिन मृत्यु से पहले आप लोगों को उनकी खूब नाना प्रकार के चीज खिलानी होगी उन्हें खाने में फल दूध मेवा मिष्ठान दें जिससे उनकी मृत्यु जल्दी हो । धन के लालच में बहू ने वह सब देना चालू किया । दोनों बेटों ने भी अपनी पिता के द्वारा किए गए कार्य को भूलकर पत्नियों के मोह पास में बंधकर उनका साथ दिया । अंत में वह व्यक्ति ठीक हो गया और ठीक होने के उपरांत बहू और बेटों की खूब खबर ली ।

श्रीमद् भागवत कथा में उन्होंने सागर मंथन की कथा बताया । उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु के मन में समुद्र मंथन का विचार आया उन्होंने देवताओं और असुरों के बीच यह बात रखी तथा मथनी के रूप में सुमेरु पर्वत को मनाया गया तथा भगवान विष्णु के आदेश पर शेषनाग ने रस्सी के रूप में कार्य किया । लेकिन भगवान विष्णु ने मंथन के समय यह शर्त भी रखी थी कि सागर से जो भी निकलेगा उसे देवताओं और असुरो किसी न किसी को धारण करना होगा । जब मंथन प्रारंभ हुआ सर्वप्रथम सागर से विष निकला विश्व को देखकर देवताओं और असुरों के बीच पहले आप पहले आप की बात छीड़ गई की विष को कौन धारण करेगा क्योंकि जो भी इस विष को पिएगा उनकी मृत्यु निश्चित थी । तब देवाधिदेव महादेव देवताओं और असुरों की रक्षा करने के लिए आगे आए और विश्व को अपने गले में धारण कर दोनों की रक्षा की । कई रत्न निकले जिसमें है मां लक्ष्मी को कोस्तुभ मणि कामधेनु गाय उच्च सेवा उच्च: श्र:वा घोड़ा  ऐरावत हाथी पारिजात वृक्ष धनवंतरी अमृत हल विष, दिव्या रत्न रुचि और रंभा अप्सरा और इस सागर मंथन से उत्पन्न हुए और अंत में अमृत निकला जिसके लिए देवताओं और असुरों के बीच युद्ध की स्थिति बन गई । भगवान विष्णु ने मोहनी रूप धारण कर लिया और देवताओं और असुरों को एक लाइन में बैठने के लिए कहा देवता सूर्य और चंद्र के बीच में स्वरभानु नामक दैत्य बैठ गए तथा उन्होंने भी अमृत पान कर लिया ।सूर्यदेव और चंद्र देव ने भगवान विष्णु को इशारे से बताया जैसे ही भगवान विष्णु को पता चला कि स्वरभानु अमृत पान कर लिया है तब उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से उनका गला काट दिया । स्वर भानु दो हिस्सा में बट गया ।सर का हिस्सा राहु और धड़ का हिस्सा केतु के नाम से प्रसिद्ध हुआ । लेकिन अमृत पान कर लेने के कारण वे दोनों अमर हो गए ।

 वेदाचार्य पं. अनिल ने राजा बलि के कथा के संबंध में बताया कि दानवीर राजा बलि महान प्रतापी था असुर कुल में जन्म लेने के कारण उन में आसुरी प्रवृत्ति थी लेकिन उनका व्यवहार विचार देवतुल्य था । राजा बलि जब यज्ञ कर रहे थे तब उनकी दान शीलता और देवताओं की तरह व्यवहार से असुरों के गुरु शुक्राचार्य विचलित रहते थे क्योंकि वह जानते थे कि राजा बलि की यही व्यवहार उनके लिए घातक साबित होगी । जब राजा बलि यज्ञ करने वाले थे उससे पहले उनके गुरु शुक्राचार्य ने उन्हें समझाया था कि यज्ञ के समय सावधानी रखना क्योंकि देवताओं के द्वारा आपकी दानशीलता को देखकर कुछ भी मांग सकता है । यज्ञ समाप्ति के उपरांत भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर छोटे से बालक के रूप में महाराज बलि के समक्ष उपस्थित हुआ । महाराज बलि ने कहा वामन देव आपका आशीर्वाद मुझ पर बना रहे मांगो आप क्या मांगते हो..? वामन देव ने कहा महाराज बलि मुझे तीन पग़ जमीन चाहिए । राजा बलि ने कहा देव आप जहां पर चाहे जिस जगह चाहे जमीन ले सकते हैं तब वामन देव बने भगवान विष्णु ने एक पैर से लेकर दूसरे पर तक पूरे राज्य को नाप लिया तथा कहा राजा बलि अब बताइए मैं तीसरा पैर कहां रखूं ।क्योंकि दो पग में मैं आपका पूरा राज्य नाप लिया हु । राजा बलि ने अपना सर वामन देव के सामने रख दिया तब वामन देव ने तीसरा पग राजा बलि के सिर पर रख दिया। राजा बलि की दानशीलता से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्हें पाताल भेज कर उन्हें पाताल का राजा बना दिया । राजा बलि ने भी भगवान विष्णु से कहा आपने मुझे पाताल का तो राज्य दे दिया लेकिन आपसे भी मुझे एक वर चाहिए । भगवान विष्णु ने कहा मांगो आप क्या मांगते हो ..? राजा बलि ने कहा राजा तो मैं बन गया । लेकिन भगवान द्वारपाल आपको ही बना होगा । उन्होंने भगवान विष्णु को भी अपने वचन में बांधकर पाताल का द्वारपाल बना लिया । कथा यहीं समाप्त नहीं हुआ जब मां लक्ष्मी बहुत दिनों तक भगवान विष्णु का इंतजार करते रही जब नहीं आए तब उन्हें जानकारी लेने पर पता चला कि भगवान विष्णु राजा बलि के द्वारपाल बन गए हैं । भगवान विष्णु को मां लक्ष्मी ने मुक्त करने के लिए राजा बलि के हाथों में रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें भाई बना लिया और राजा बलि से भगवान विष्णु को रक्षाबंधन के बदले मांग कर वापस स्वर्ग आए ।उसके बाद वेदाआचार्य ने श्री राम चरित्र और श्री कृष्ण जन्म की कथा बताया ।
26:11:2025 बुधवार  पुतना उद्धार ,माखन चोरी , बाल लीला 27.11.2025, गुरुवार वृन्दावन गमन, कालिया मर्दन, रासलीला, गोवर्धन लीला, कंसवध,28.11.2025 शुक्रवार द्वारका लीला सुदामा चरित्र भगवान का परलोक गमन परीक्षित मोक्ष समापन दिवस 29.11.2025, शनिवार श्रीमद् भगवत गीता सार, यज्ञ पूणाहूति ( दोपहर 12 बजे )

 

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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