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स्वामी विवेकानंद के बताएं मार्ग पर चलने के संकल्प के साथ “बंग समाज” के द्वारा मनाई गई 164 वीं जयंती ।

दल्ली राजहरा
बुधवार 14 जनवरी 2026
भोज राम साहू 9893765541

 

  यदि यह कोई यह पूछे कि वह कौन युवा संन्यासी था जिसने विश्व पटल पर भारत और हिंदू धर्म की कीर्ति पताका फहराया तो सबके मुंह से नि:संदेह यही निकलेगा “स्वामी विवेकानंद “

युवाओं के प्रेरणा पुरुष स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ था l उनका जन्मदिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है l वर्ष 1984 में स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी l इसी के साथ बंग समाज दल्ली राजहरा के द्वारा उनकी जयंती बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया l स्वामी विवेकानंद जी के अच्छे विचारों के बारे मे समाज के वरिष्ठ गगन पंड्या जी के द्वारा उनके कुछ विचारों को व्यक्त किया उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद एक महान भारतीय संत दार्शनिक और राष्ट्रवादी थे l वह एक आध्यात्मिक गुरु थे , जिन्होंने भारत में ही नहीं विदेशों तक राष्ट्रीय चेतना और भारतीय संस्कृति को पहुंचाया और युवाओं को प्रोत्साहित किया l अमेरिका स्थित शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किए थे l

ऊर्जा से भरे उनके जोशीले विचार और संदेश हमेशा से युवाओं को कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरित करते रहे हैं और युगों तक करते रहेंगे। लेकिन जब -जब स्वामी विवेकानंद का जिक्र होता है तो उनके उस ऐतिहासिक व चमत्कारिक भाषण की भी याद आती है l जो उन्होंने अमेरिका के शिकागो में हुई धर्म संसद में दिया था। 11 सितंबर 1893 को दिए उनके इस भाषण ने पश्चिमी देशों को भारतीय दर्शन, संस्कृति, अध्यात्म का लोहा मनवा दिया। अभी तक ये पश्चिमी देश भारत को असभ्य देशों की गिनती में लेते थे। कहा जाता है कि शिकागो धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद को अपने भाषण के लिए मात्र दो मिनट मिले थे। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत ऐसे जादुई शब्दों के साथ किया कि जिससे न सिर्फ वहां बैठे लोग बल्कि पूरी दुनिया उनकी कायल हो गई। उन्होंने अपनी बात अमेरिका में प्रचलित शब्द “लेडिस एंड जेंटलमैन ” के जगह पर ‘सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका’ से अपनी बात शुरू की यानी ‘अमेरिका के मेरे भाइयों और बहनों’। उनके इन शब्दों के बाद दो मिनट तक तालियां बजती रहीं। स्वामी विवेकानंद को अमेरिका में मात्र 2 मिनट का समय भाषण देने के लिए बहुत मुश्किल से मिला था l उनके भाषण से अमेरिका मंत्र मुग्ध होकर रह गया और 5 मिनट से अधिक समय तक उनके भाषण को सुनते रहे l यह वो भाषण था जिसने पूरे विश्व को भारत के हिंदुत्व, महान आध्यात्मिक ज्ञान व दर्शन से रूबरू कराया था । 

सुकांतो मंडल ने स्वामी विवेकानंद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा स्वामी जी अद्भुत और भारतीय विचारधारा के पुरुष थे l अमेरिका मे स्वामी जी के दिए गए भाषण से लोग भारतीय संस्कृति और उनके विचार को जानने के लिए उत्सुक हो गए इसी समय एक विदेशी महिला ने स्वामी विवेकानंद जी के समक्ष आकर कही स्वामी जी मैं आपसे शादी करना चाहती हूं ! मैं चाहती हूं कि आपकी तरह तेज और ओजस्वी ज्ञानवान मेरा पुत्र हो ! तो स्वामी जी ने उनके सामने नतमस्तक होकर कहा आप शादी करके पुत्र कामना के लिए समय क्यों बर्बाद कर रहे हैं l आज ही मैं आपको पुत्र और आप मेरी मां हो ! माँ आप आज और अभी से मुझे अपना पुत्र मान सकती हो l ऐसी विचारधारा के थे हमारे प्रेरणा पुरुष स्वामी विवेकानंद जी !

 

   महिला मण्डल से मिठू करफा जी उनकी कुछ कविताओं का पाठ किया इसी प्रकार कार्यक्रम मे शामिल सचिव कनक बैनर्जी, गौतम बैरा , अशोक गोराई,गौतम मायती, मदन मायती, पिंकू डे, एस सी सरकार, अशोक आईच, गौतम बोस,जयंतो चक्रवर्ती, उत्तम नायक,मिंटू सिन्हा एवं महिला मण्डल से रीना पड़्या, मिठू करफा, जयंती बोस,रीता बैनर्जी, नीतू सरकार और भी सामाजिक बंधुगण शामिल हुए ।

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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