दल्लीराजहरा बोध गया स्थित महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन को लेकर , भिक्षुक धम्मतप राजनांदगांव राष्ट्रीय संयोजक आल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम बोधगया ने महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के एक वर्ष पूर्ण होने पर 1 फरवरी से 12 फरवरी के बीच बोध गया में आयोजित विशाल धरना आंदोलन एवं माघ पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होने के लिए जनसंपर्क धम्म यात्रा लेकर दल्लीराजहरा पहुंचे, भिक्खु धम्मतप जी ने विस्तार पूर्वक अपने विचार रखे, विचारों से प्रेरित होकर दल्लीराजहरा के बौद्ध समाज ने एक पत्र महाबोधि मुक्ति के नाम हजारों पत्र माननीय कलेक्टर महोदय जी के माध्यम से प्रधानमंत्री जी को पत्र भेजने की बात कही एवं 1 फरवरी को सैकड़ों की संख्या में बोधगया में आयोजित धरना आंदोलन के समर्थन में शामिल होने की बात कही । इस बैठक में भीमराव भैसारे, नीलकंठ कांबले, ज्ञानेश्वर भगत, बिपिन करवाडे, सविता धनविजय, त्रिभुवन बौद्ध,बाबूलाल बौद्ध,ओमप्रकाश रामटेके, रवि बारसागड़े, कांडे जी उपस्थिति रहे।
प्रधानमंत्री के नाम चिट्ठी में क्या लिखा है…?
नरेन्द्र मोदी (प्रधानमंत्री) को कलेक्टर, राजनांदगांव (छ.ग.) के माध्य से भारतीय संविधान अनुच्छेद 13 का परिपालन करते हुए बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 को निरस्त करने एवं बौद्धों को बोधगया (बिहार) महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन सौंपे जाने के लिए चिठ्ठी लिखा है जिसमें विश्व धरोहर महाबोधि महाविहार बोधगया (बिहार) बौद्धों के पवित्र तीर्थ स्थल एवं आस्था का पवित्र स्थल है। जिसके दर्शन हेतु देश दुनिया से प्रतिदिन बौद्ध अनुयायी सैकड़ों हजारों की संख्या में उपस्थित होते है।
भारत देश में संविधान लागु होने के पूर्व बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 (बी.टी. एक्ट) का निर्माण कर बौद्धों को पूर्णतः महाबोधि महाविहार प्रबंधन से वंचित रखा गया।भारतीय संविधान 1950 में लागु हुआ है, बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 (बी.टी. एक्ट) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13, 25, 26 व 29 का उल्लंघन करता है। अनुच्छेद 13 के अनुसार 26 जनवरी 1950 से पहले सभी कानुन, अधिनियम को निरस्त करने का प्रावधान है। देश की आजादी के 79 साल बाद भी यह बी. टी. एक्ट 1949 का चलते रहना संविधान की अवमानना है एवं बौद्धों के साथ अन्याय पूर्ण कानुन है जिसके विरूद्ध बोधगया में 58 सालों से आंदोलन चल रहा है एवं महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्धों को मिलना चाहिए इसके लिए 134 सालों से आंदोलन चल रहा है। इसी तारतम्य में बी.टी. एक्ट 1949 निरस्त किया जाये एवं महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्धों को सौपा जाये इस उद्देश्य को लेकर दिनांक 12 फरवरी 2025 से ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम के माध्यम से बोधगया में अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन चल रहा है।
भारत में मुख्यतः 6 धर्म है, जिसमें से 5 धर्म का प्रबंधन उसी धर्म के अनुयायियों द्वारा किया जाता है। लेकिन बौद्ध धर्म के पवित्र दर्शनीय स्थल के प्रबंधन में गैर बौद्धों का अधिकार है । जिसके प्रबंधन में गैर बौद्ध के अनुयायियों का हस्तक्षेप है। जिसका कारण बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 (बी.टी. एक्ट) है ।
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन हेतु हमारी मांग है कि 1) भारतीय संविधान अनुच्छेद 13 का परिपालन करते हुए बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 को निरस्त किया जाये एवं 2) बौद्धों को बोधगया (बिहार) महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन सौंपा जाये ।