
दल्ली राजहरा
रविवार 01 मार्च 2026
भोज राम साहू 9893765541
भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा संचालित “आप भी जानिए” कार्यक्रम के अंतर्गत राजहरा खदान के कर्मचारियों की पत्नियों हेतु भिलाई इस्पात संयंत्र भ्रमण का सफल एवं गरिमामय आयोजन दिनांक 27.02.2026 को किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य परिवारजनों को उस औद्योगिक प्रक्रिया से अवगत कराना था, जिसके माध्यम से दल्ली राजहरा की पावन धरती से प्राप्त लौह अयस्क भिलाई में लोहा एवं उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात में परिवर्तित होता है।

विदित हो कि दल्ली राजहरा से प्राप्त लौह अयस्क ही भिलाई इस्पात संयंत्र की जीवनरेखा है। यहां के श्रमिकों के अथक परिश्रम से निकला लौह अयस्क राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस दृष्टि से दल्ली राजहरा केवल एक खदान नहीं, बल्कि भिलाई इस्पात संयंत्र की सशक्त आधारशिला है।

भिलाई प्रस्थान से पूर्व एम.वी.टी. सेंटर, दल्ली राजहरा के सभागार में महिलाओं को भ्रमण के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियाँ एवं सुरक्षा मानकों की विस्तृत जानकारी दी गई। राजहरा खदान के महाप्रबंधक एस. आर बास्के ने औद्योगिक परिसर में अनुशासन, समूह में चलने, सुरक्षा उपकरणों के उपयोग एवं निर्धारित मार्गों के पालन पर विशेष बल दिया। इसके उपरांत सभी प्रतिभागियों का सामूहिक ग्रुप फोटो लिया गया तथा भ्रमण दल को बस द्वारा भिलाई के लिए रवाना किया गया।

भिलाई पहुंचने पर एचआरडीसी सभागार में औपचारिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मानव संसाधन विभाग के कार्यपालक निदेशक पवन कुमार थे। अध्यक्षता खदान समूह के कार्यपालक निदेशक श्री कमल भास्कर ने की। विशेष अतिथि के रूप में लौह अयस्क समूह राजहरा के मुख्य महाप्रबंधक आर.बी. गहरवार तथा मानव संसाधन विभाग के महाप्रबंधक (प्रभारी) जे.एन. ठाकुर उपस्थित रहे।

जे.एन. ठाकुर ने कहा कि संयंत्र की परिस्थितियां भिन्न एवं अत्यंत तकनीकी हैं, जिसे प्रत्यक्ष देखने से एक नई अनुभूति प्राप्त होगी। आर.बी. गहरवार ने अपने उद्बोधन में रावघाट खदान के प्रारंभ होने से भिलाई इस्पात संयंत्र की क्षमता एवं सुदृढ़ होने की बात कहा।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कमल भास्कर ने कहा कि खदानों में कर्मचारी विपरीत परिस्थितियों धूप, वर्षा एवं खुले वातावरण में कठिन परिश्रम करते हैं तभी भिलाई इस्पात संयंत्र के मांग के अनुरूप लौह अयस्क की आपूर्ति करते है ।

मुख्य अतिथि पवन कुमार ने कहा कि इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य यह है कि परिवारजन स्वयं जाकर देखें और समझें कि किन परिस्थितियों में लौह अयस्क से इस्पात निर्माण किया जाता है । उन्होंने भ्रमण के दौरान सुरक्षा को सर्वोपरि रखने पर बल दिया। सुरक्षा अधिकारी श्री नरेन्द्र राव द्वारा विस्तृत सुरक्षा जानकारी प्रदान की गई। धन्यवाद ज्ञापन मानव संसाधन विभाग दल्ली राजहरा के उप प्रबंधक श्री गिरीश मढ़रिया ने किया तथा कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रबंधक शैलेष पटनायक ने प्रभावी ढंग से किया।

भ्रमण के दौरान महिला दल ने सर्वप्रथम धमनभट्टी क्रमांक–8 का अवलोकन किया, जहां दल्ली राजहरा के लौह अयस्क को आधुनिक एवं स्वचालित प्रणाली द्वारा गलाया जाता है। इसके पश्चात एस एम एस–3 में आयरन के शुद्धिकरण की प्रक्रिया को देखा।

यूनिवर्सल रेल मिल में 130 मीटर लंबी रेल पांत का निर्माण प्रत्यक्ष देखा गया, जिसे वेल्डिंग द्वारा 260 मीटर तक विस्तारित किया जाता है, जो विश्व की सबसे लंबी रेल पांतों में से एक है। प्लेट मिल में प्लेट निर्माण की प्रक्रिया ने भ्रमण दल को विशेष रूप से प्रभावित किया। इसके अतिरिक्त कोक ओवन का भी अवलोकन कराया गया।

महिला भ्रमण दल को दल्ली राजहरा से भिलाई ले जाने एवं संयंत्र भ्रमण कराने में श्रम कल्याण अधिकारी संतराम साहू एवं घनश्याम पारकर का विशेष योगदान रहा। सहयोगी के रूप में दिनेश्वरी एवं अनिता की सक्रिय भूमिका रही।

भ्रमण के उपरांत कर्मचारियों की पत्नियों ने लौह अयस्क समूह के मुखिया आर बी गहरवार के समक्ष अपना अनुभव साझा करते हूए इसे यादगार, गौरवपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें अपने परिवारजनों के कार्य के महत्व को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।

इस सफल आयोजन के लिए सभी महिलाओं ने भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा की।





