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“100 बिस्तर अस्पताल के नाम पर शासन ने पकड़ाया झुनझुना , क्या फिर से होगी शहर में बड़ा आंदोलन…?

दल्ली राजहरा
बुधवार 01 अप्रैल 2026
भोजराम साहू 9893 765541
दल्ली राजहरा की एकमात्र शासकीय 100 बिस्तर अस्पताल के संबंध में कई शिकायत मिली थी जिस पर नगर के पत्रकार गण अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे थे । वहां की स्थिति जैसे लोगों के द्वारा बताई जा रही थी उसके अनुरूप ही देखने को मिला । अस्पताल में मात्र एक संविदा डॉक्टर एक शासकीय नर्स 3 एन एम ए नर्स और दो वार्ड बॉय और दो स्वीपर के भरोसे संचालित हो रही है । अस्पताल का समय सुबह 8:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक है । लेकिन लोग बताते हैं कि सुबह 8:00 बजे से खुलता है और लगभग 5:00 बजे अस्पताल बंद हो जाता है । रात्रि में यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तब उन्हें निजी अस्पतालों में जाना पड़ेगा ।

इस 100 बिस्तर अस्पताल में एंबुलेंस की सुविधा नहीं है । एक संविदा डॉक्टर बी एन मेडिया के भरोसे पूरा अस्पताल संचालित हैं । मरीज को देखने के लिए समय-समय पर शासन के द्वारा डॉक्टर भेजा जाता है । कई बार किसी कारणवश डॉक्टर नहीं आ पाता तब मरीजों की जिम्मेदारी अस्पताल के नर्सों के ऊपर ही होती है । पिछले कुछ दिनों पहले डॉक्टर लेडिया निजी काम से 10 दिन के लिए बाहर गए थे तब यह शासकीय अस्पताल बिना डॉक्टर के ही संचालित हो रहा था । स्टाफ की कमी होने के कारण शासकीय छुट्टी के दिनों में अस्पताल बंद रहता है ।वार्ड बॉय के द्वारा ही मरीजों की रजिस्ट्रेशन होता है ।

100 बिस्तर अस्पताल में 27 मार्च को 22, मरीज 28 मार्च को 16 और 31 मार्च को 39 मरीज ने ही डॉक्टर से बाह्य रोगी की के रूप में इलाज करवाया है । अस्पताल के निरीक्षण करने पर मात्र एक मरीज ही भर्ती पाया गया । जो कि वार्ड क्रमांक 16 निवासी मीराबाई है । उन्होंने बताया कि 30 मार्च को पेचिस होने पर इलाज के लिए भर्ती हुई थी डॉक्टर के द्वारा दवाई देकर छुट्टी दे दिया गया । लेकिन आराम नहीं मिला आज फिर से आई हु डॉक्टर ने भर्ती किया है ।

गोविंद वाधवानी ( अध्यक्ष राजहरा व्यापारी संघ ) के नेतृत्व में आज से दो-तीन वर्ष पूर्व नगर को सुविधाएं दिलाने जिसमें 100 बिस्तर अस्पताल बायपास रोड रोजगार, केंद्रीय विद्यालय आदि के लिए एक विशाल आंदोलन किया गया था ।शासन के द्वारा नगर वासियों को बरगलाने के लिए आनन फानन में 7 करोड़ रूपया खर्च कर स्कूल को अस्पताल के रूप में तब्दील किया गया था ।लेकिन 7 करोड़ रूपया की राशि में कितना भ्रष्टाचार हुआ है वह तो अस्पताल की स्थिति को देखकर ही पता चलता है ।

स्कूल को 100 बिस्तर अस्पताल में तब्दील तो कर दिया गया लेकिन सुविधा के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है । अस्पताल में शासन की ओर से दवाई तो उपलब्ध कराया गया है लेकिन शहर से इतनी दूरी होने और डॉक्टरों की कमी के कारण मात्र कुछ ही मरीज इलाज करने के लिए आते हैं जब अस्पताल के स्टाफ से पूछा गया तब उन्होंने बताया कि यहां वार्ड नंबर 10, 11 ,12, 13 ,14 ,15 और 16 के मरीज इलाज करने आते हैं ।
साथ ही गांव वाले मरीज भी इलाज करा कर जाते हैं । यहां अस्पताल में साल भर की रिकॉर्ड देखें तो डॉग बाइट रेबीज की टीका लगाने के लिए ही आसपास के मरीज और ग्रामीण आते हैं जहां वर्ष 2025 में 132 व्यक्तियों को तथा जनवरी-फरवरी और मार्च 2026 के 3 माह में 55 मरीजों को रेबीज का डोज लगाया जा चुका है ।

भवन की स्थिति जर्ज हो चुकी है प्लास्टर उखड़ रहे हैं लैब की स्थिति देखें एक ही मशीन है सेंट्रीफ्यूज ब्लॉक का जिसे सिरम अलग करने के लिए उपयोग करते हैं । सीबीसी मशीन जैसे आवश्यक सभी मशीन बंद है । लैब के लिए अति आवश्यक माइक्रोस्कोप नहीं है यहां डिप्लोमा धारी स्टाफ की कमी है । लैब टेक्नीशियन भी नहीं है डॉक्टर से जब इस संबंध पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सभी जांच किट के माध्यम से किया जाता है । संविदा के रूप में टेक्नीशियन रखे हैं वह भी समय-समय पर आते हैं लेकिन जब निरीक्षण करने पहुंचे तब वहां पर उपलब्ध नहीं थे ।
पीने की पानी की स्थिति देखें तो दूर में आप भी लगा हुआ है लेकिन जहां पर ओपीडी है वहां पर पीने की पानी की सुविधा होना चाहिए। अस्पताल की ओर से एक जग में पानी भरकर एक गिलास रख दिया है ।शौचालय की स्थिति भी बहुत खराब है दवाई की स्थिति देखें तो कई दवाई अप्रैल मई जून 26 तक उपयोग के लायक हैं ।

डॉक्टर मेरिया से जब पूछा गया कि क्या आप अस्पताल की गतिविधियों से संतुष्ट हैं तब उन्होंने कहा कि आज से एक वर्ष से पहले मैंने शासन के समक्ष मांग रखा था अस्पताल को अपग्रेड करने के लिए । कम से कम 10 स्टाफ नर्स, तीन डॉक्टर एक गायनोलॉजिस्ट एक चाइल्ड स्पेशलिस्ट, लैब को अपग्रेड करने की मांग भी रखा था चार-पांच वासबेसिन प्लेटफार्म मरीजों को नहाने के लिए बाथरूम पीने की स्वच्छ पानी की सुविधा की बात की गई थी । लेकिन अभी तक इस संबंध में शासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।





