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साहित्य जगत में सार्थक कार्य के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि समरसता की भावना आवश्यक है।” :– डॉ दवे

दल्ली राजहरा बुधवार 01 अप्रैल 2026 भोजराम साहू 9893 765541

“मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के साहित्य अकादमी की ऐतिहासिक पहल की समीक्षा ।”

साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिस्पर्धा से निकालकर एक परिवार में रूपांतरित करने का प्रयास है यह सम्मेलन — डॉ. विकास दवे इंदौर, जो सदैव से साहित्यिक चेतना का जीवंत केंद्र रहा है, वहाँ ‘वीणा की वाणी’ शीर्षक अंतर्गत देशभर से आए साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं के संपादकों का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन एक सार्थक विमर्श का साक्षी बना। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी एवं संस्कृति परिषद द्वारा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस आयोजन ने साहित्य, पत्रकारिता और तकनीक के त्रिकोणीय संबंधों पर एक गंभीर और बहुआयामी दृष्टि प्रस्तुत की।

दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ प्रारंभ हुए उद्घाटन सत्र में अनेक विशिष्ट साहित्यकारों और शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अपने स्वागत उद्बोधन में मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने स्पष्ट किया कि साहित्य जगत में सार्थक कार्य के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि समरसता की भावना आवश्यक है। उन्होंने इस सम्मेलन को पत्र-पत्रिकाओं को एक सूत्र में पिरोने और उन्हें ‘परिवार’ के रूप में देखने का प्रयास बताया। उनके वक्तव्य में परंपरा और प्रतिबद्धता का सुंदर संतुलन दिखाई दिया।

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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