दल्ली राजहरागुरुवार 30 अप्रैल 2026भोजराम साहू 9893 765541➡️💥🔥विशेष🔥💥⬅️👉 पूर्व कर्मचारी अजय देवांगन की भूमिका संदिग्ध । 👉दल्ली राजहरा में लोन के नाम पर फर्जीवाड़ा । 👉फर्जी दस्तावेजों से 11.40 लाख की ठगी ।👉 फर्जी दस्तावेजों के सहारे फाइनेंस कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस करेगी कड़ी कार्रवाही ।👉फर्जी नौकरी और सैलरी स्लिप दिखाकर लिया है लोन ।👉17 से अधिक आरोपियों पर केस दर्ज ।👉 शिक्षा विभाग और फायर सर्विस में कार्यरत बताकर 11 लाख 40 हजार रुपये से अधिक की राशि ली गई । ➡️🔥💥समाचार 🔥💥⬅️ दल्ली राजहरा में लोन के नाम पर सुनियोजित तरीके से की जा रही ठगी का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे फाइनेंस कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 17 से अधिक आरोपितों पर अपराध दर्ज किया है। इस पूरे मामले ने शहर में सनसनी फैला दी है। मामले की शुरुआत तब हुई जब कमल मोटर्स के संचालक और ‘अरिष्ट फाइनेंस कंपनी’ के डायरेक्टर विनोद जैन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।फर्जी नौकरी और सैलरी स्लिप दिखाकर लिया लोनजांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2024 के दौरान कई लोगों ने फर्जी नौकरी और आय के दस्तावेज प्रस्तुत कर लोन हासिल किया। शुरुआत में कुछ किस्तें जमा कर भरोसा बनाया गया, लेकिन बाद में भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया ।कंपनी द्वारा कराई गई आंतरिक जांच 17 से अधिक आरोपियो पर केस दर्जपुलिस थाना में यह सामने आया कि आरोपियों ने खुद को शिक्षा विभाग और फायर सर्विस में कार्यरत बताकर जाली नियुक्ति पत्र और फर्जी सैलरी स्लिप जमा की थी। इस सुनियोजित साजिश के तहत 11 लाख 40 हजार रुपये से अधिक की राशि ली गई।पुलिस ने इस मामले में प्रतिमा यादव, मुस्कान वंदेवार, भागवत प्रसाद साहू, मुकेश कुमार, सूरज कुमार, राकेश उपाध्याय, यादराम निषाद, संतोष कुमार यादव, नरोत्तम तारम, अमन कुमार, जगन लाल, विनोद कुमार निषाद, राहुल उपाध्याय और पूनाराम विश्वकर्मा सहित अन्य को आरोपित बनाया है। सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद दल्ली राजहरा में हड़कंप मचा हुआ है। यह मामला एक चेतावनी है कि फर्जीवाड़े के जरिए आसान पैसा कमाने की कोशिश अब सीधे जेल तक पहुंचा सकती है। पुलिस की सख्ती और बढ़ती निगरानी ने साफ कर दिया है कि अब ठगों की खैर नहीं। जांच अधिकारी के निजी कार्य से छुट्टी में चले जाने के कारण मामले की वस्तु स्थिति के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई ।अजय देवांगन और गरियाबंद निवासी एजेंट अमर मरकाम कर रहे थे ठगी ।आरोप है कि अजय देवांगन ने कंपनी में रहते हुए ही इस ठगी की नींव रखी और नौकरी छोड़ने के बाद भी ग्राहकों से वसूली करता रहा। जब लोगों ने अपनी रकम वापस मांगी तो उसके द्वारा दिए गए चेक बाउंस हो गए, जिससे पूरे मामले की परतें खुलती चली गई।गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही ।नगर पुलिस अधीक्षक विकास पाटले ने कहा कि यह एक संगठित आर्थिक अपराध है, जिसमें कई लोग मिलकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए वित्तीय संस्थान को नुकसान पहुंचा रहे थे। पुलिस हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। 17 लोगों के खिलाफ में अपराध दर्ज किया गया है जांच जारी है सूक्षम जांच के बाद और भी नाम सामने आ सकते हैं। विनोद जैन का कहना है कि कंपनी ने नियमों के तहत सभी प्रक्रियाएं पूरी की थीं, लेकिन आरोपितों ने चालाकी से सिस्टम का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी कर कंपनी को नुकसान पहुंचती है।Spread the lovePost navigationआवासीय खेल अकादमी में प्रवेश के चयन में रानी दुर्गावती फुटबाल क्लब चिखली के 11 बच्चे हुए सम्मिलित । जल जीवन मिशन में घोर लापरवाही: काकड़कसा 1 और 2 में अधूरी पड़ी पानी टंकी ।