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4 नए श्रम कानून से मजदूरों के दोनों हाथ काटने की कोशिश कर रही है सरकार । :— छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा/छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ

दल्ली राजहरा मंगलवार 25 नवम्बर 2025 भोज राम साहू 9893765541
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा/छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ ने 4 श्रम कानून के विस्तार पर केंद्र सरकार जो नियम लागू कर रहा है उस पर विरोध जताया, मोर्चा का कहना है कि 29 श्रम कानुनो का 4 श्रम कोड में परिवर्तित करके उसका विस्तार किया जो मुख्य रूप से उद्योगपतियों, पूंजीपतियों के हित में है ,न कि श्रमिको के हित मे ।
👉अब उद्योग में300 से अधिक कर्मचारी वाले कंपनी बिना राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना,छटनी या बंदी कर सकेगी ..!
🔹🔸परिणाम जिससे कर्मचारी की नौकरी लगभग खत्म हो जाएगी जो पहले 100 कर्मचारी थी, मतलब अब 300 कर्मचारी बिना किसी नोटिस या कारण के काम से निकले जा सकेंगे ।
👉 ठेका प्रथा में खुली छूट फ़िक्स्ड टर्म एम्पलामेंट सभी क्षेत्र में बिना किसी सीमा के लागू करने की अनुमति दी गई ।
🔹🔸 परिणाम, जिससे स्थाई नौकरी खत्म हो जाएगी, गेज्यूटी और पी एफ जैसे लाभ छीन जाएंगे,
👉 नये कानून से अब हड़ताल को करना लगभग मुश्किल हो जाएगा ।

🔹🔸हड़ताल से 14 दिन पहले नोटिस देना होगा, और हड़ताल के 60 दिन के अंदर तक कोई भी हड़ताल नहीं किया जा सकता ।नोटिस ना देने पर हड़ताल अवैध माना जाएगा और कर्मचारियों को भी बर्खास्त किया जा सकेगा, हड़ताल श्रमिको का मूलभूत अधिकार है जिसे छीनने की कोशिश केंद्र सरकार के द्वारा किया जा रहा है । यूनियन का मानना है कि हड़ताल जैसे अधिकार छीन जाने से कंपनियां अपनी मनमानी करने लगेगी जो कर्मचारी के दोनों हाथ काटने के बराबर है ।
👉 नए कानून से अब ट्रेड यूनियन बनाना और मान्यता पाना लगभग मुश्किल हो जाएगा ।
🔹🔸 क्योंकि ट्रेड यूनियनों के लिए 51 फीसदी कर्मचारियों का सदस्य होना जरूरी कर दिया गया है, जो पहले 10 फीसदी था, जिससे यूनियनों का सामूहिकता का अधिकार छीन जाएगा ।
👉12 घंटे की शिफ्ट ड्यूटी वैध कर दी गई है, और ओवरटाइम के साथ यह 14/15 घंटे हो गई है ।
🔹🔸 नए कानून आ जाने से कर्मचारी मानसिक रूप से परेशान और हताहत हो जायेगे, जो मजदूरों के लिए गंभीर खतरा साबित होगा
, 👉 यूनियनों की आवाज़ दब जाएगी ।
क्योंकि 4 कोड में केवल केंद्र सरकार को अंतिम रूप से नियम बनाने का अधिकार है, राज्य सरकार से ये अधिकार छीन लिए गए है यूनियनों से कोई वास्तविकता बातचीत संभव नहीं है, निजीकरण और मालिकों को मनमानी करने की खुली छूट दी गई है, सभी कोड में मालिकों को नियम खुद बनाने और कर्मचारियों को दण्डित करने का अधिकार दिया है।

छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके ने इस पर अपना स्पष्ट विचार दिए केन्द्र सरकार बिना किसी चर्चा परिचर्चा के अपने मनमानी तरीके से 29 कानूनों को 4 श्रम कोड में परिवर्तित कर दिया, और पूंजीपतियों, उद्योग पतियो को मजदूरों के ऊपर अपनी मनमानी करने का अधिकार भी सीधे सीधे केंद्र सरकार दे रहा है , इससे स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार केवल और केवल मजदूर / किसान विरोधी है सरकार केवल पूंजीपतियों के समर्थन में काम करता है, इस कानूनों को बनाने से पहले सरकार को श्रमिको की समिति गठित करके व चर्चा करके इसमें संशोधन करना था, लेकिन सरकार मनमानी तरीके इसमें बदलवा किया है, कोविड के समय 2019 में जब विपक्ष निलंबित हो चुका था तब चोरी छिपे इस कानून को लाया गया और पास करवा कर जबरदस्ती थोपा जा रहा है जिसका हम विरोध करते है, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जनक लाल ठाकुर ने इसका विरोध किया और कहा कि सरकार लगातर तानाशाही रवैया अपना कर मजदूर किसानों पर ज़ुल्म कर रही है, आज़ादी के 75 सालो के बाद भी सामाजिक, आर्थिक, सुरक्षा अभी भी आम जनता को नहीं मिला पा रहा है आए दिन सामाजिक सुरक्षा ना होने से अमानवीय घटनाएं हो रही है। उसके बाद भी सरकार ने श्रम कोड में महिलाओं को रात में कार्य करने अनुमति देकर ,मालिकों/ उद्योगपतियों के हाथो में जबरदस्ती या मनमाना तरीके महिलाओं को रात में काम करने के लिए मजबूर किया जा सकता, जिससे महिलाएं प्रताड़ित हो सकती है सरकार को ऐसे कार्यों के पहले सामाजिक सुरक्षा स्थापित करनी चाहिए।





