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सुंदरा में “नशा मुक्त समाज में युवाओं की भूमिका” पर राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर में ग्राम वासी को कर रहे हैं लाभान्वित ।

दल्ली राजहरा
शुक्रवार 19 दिसंबर 2025
भोजराम साहू 9893 765541
जिला बालोद स्थित ग्राम सुंदरा में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बघमरा की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का चतुर्थ दिवस बड़े उत्साह और जागरूकता के साथ संपन्न हुआ। यह शिविर दिनांक 16 दिसंबर से 22 दिसंबर 2025 तक “नशा मुक्त समाज के लिए युवा” थीम पर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 35 समर्पित स्वयंसेवक अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। कार्यक्रम अधिकारी राजेश भंडारी के कुशल नेतृत्व में चल रहे इस शिविर का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाना तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करना है।

शिविर के चतुर्थ दिवस की शुरुआत प्रातःकालीन प्रभात फेरी से हुई। रासेयो स्वयंसेवकों ने गांव की गलियों में घूमकर नशा मुक्ति संबंधी जागरूकता नारे लगाए और ग्रामीणों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया। इस प्रभात फेरी ने गांव में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया तथा लोगों को नशा मुक्त जीवन अपनाने की प्रेरणा दी। इसके पश्चात स्वयंसेवकों ने व्यायाम और पीटी (फिजिकल ट्रेनिंग) सत्र आयोजित किया, जिसमें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया गया। स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं को बताया कि नियमित व्यायाम और अनुशासनपूर्ण जीवनशैली नशे से दूर रहने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इस सत्र मे शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मानसिक मजबूती की भावना जगाई।

दिवस का मुख्य आकर्षण बौद्धिक परिचर्चा सत्र रहा, जिसमें विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों और अतिथियों ने अपनी बहुमूल्य जानकारियां साझा कीं। महिला एवं बाल संरक्षण विभाग से पधारे श्री नरेंद्र साहू एवं उनकी टीम ने महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों पर विस्तृत प्रकाश डाला। साहू ने स्वयंसेवकों को महिलाओं से संबंधित प्रमुख कानूनी धाराओं की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने का आशय से हमला), धारा 354A (यौन उत्पीड़न), धारा 376 (बलात्कार), धारा 498A (पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता), धारा 304B (दहेज मृत्यु) तथा धारा 326A (एसिड अटैक) जैसी महत्वपूर्ण धाराओं का उल्लेख किया। साथ ही, घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, यौन उत्पीड़न निवारण अधिनियम 2013 तथा दहेज निषेध अधिनियम 1961 जैसी विशेष कानूनों की चर्चा की।
साहू ने जोर देकर कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण ही समाज की वास्तविक प्रगति है और युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करें। उन्होंने स्वयंसेवकों को प्रोत्साहित किया कि वे गांव में महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा या भेदभाव की रिपोर्ट करें तथा कानूनी सहायता प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। इस सत्र ने स्वयंसेवकों में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत किया।

कृषि विभाग से सुमन केसरिया ने कृषि संबंधी वर्तमान योजनाओं पर विस्तार से उद्बोधन दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की प्रमुख योजनाओं जैसे राजीव गांधी किसान न्याय योजना (जिसमें किसानों को इनपुट सब्सिडी के रूप में प्रति एकड़ सहायता प्रदान की जाती है), गोधन न्याय योजना (गोबर खरीद कर जैविक खाद बनाने और किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान करने वाली योजना), कृषक उन्नति योजना (धान बेचने वाले किसानों को बोनस प्रदान करने वाली) तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उल्लेख किया। श्री केसरिया ने बताया कि ये योजनाएं किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देने तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों को सलाह दी कि वे गांव में किसानों को इन योजनाओं के लिए पंजीकरण कराने में मदद करें तथा नशे से दूर रहकर कृषि कार्यों में सक्रिय रहने की प्रेरणा दें।

चाइल्ड केयर से जुड़ी काउंसलर पूर्णिमा साहू ने बाल अधिकारों और संरक्षण पर चर्चा की तथा बच्चों की सहायता के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1098 (चाइल्डलाइन) की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह नंबर 24 घंटे उपलब्ध है और किसी भी बाल शोषण, हिंसा या आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्रदान करता है।

सी प्रमाण पत्र धारी रासेयो वरिष्ठ स्वयंसेवक लक्ष कुमार साहू ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वामी जी युवाओं को “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” का संदेश देते थे। स्वामी विवेकानंद अनुशासन, आत्मविश्वास और सेवा भाव को युवाओं की सबसे बड़ी शक्ति मानते थे। राष्ट्रीय सेवा योजना के उद्देश्यों पर भी विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेवकों में सामाजिक जिम्मेदारी, नेतृत्व गुण, राष्ट्रीय एकता तथा आपदा प्रबंधन की क्षमता विकसित करना है। इसका आदर्श वाक्य “नॉट मी बट यू” (मैं नहीं, तुम) समाज सेवा की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एनएसएस के माध्यम से युवा समुदाय की समस्याओं को समझकर उनका समाधान कर सकते हैं तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं।

ग्राम सुंदरा के ग्राम विस्तार अधिकारी तथा ग्राम प्रमुख की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और गरिमामय बनाया। रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। नृत्य, गीत और नाटकों के माध्यम से दहेज प्रथा के दुष्परिणामों तथा नशा मुक्ति के महत्व को दर्शाया गया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया और नशा मुक्त समाज की ओर एक कदम बढ़ाने की प्रेरणा दी।





