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ईश्वर के द्वारा दी गई शक्ति और धन का उपयोग सत्कर्म में लगाएं।:— पंडित अखिलेश्वरानंद महाराज

दल्ली राजहरा
शुक्रवार 13 फरवरी 2026
भोजराम साहू 9893 765541

 

दल्ली राजहरा में यादव परिवार के द्वारा वार्ड नंबर 24  चंदेनी भाटा में राधा कृष्ण मंदिर के पास श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह  का आयोजन किया जा रहा है । जिसके भागवताचार्य पं अखिलेश्वरानंद महाराज ने कथा में कल भस्मासुर की कथा बतलाया । जिसमें उन्होंने बताया कि भगवान शिव  एक ओर सृष्टि के विनाश का प्रतीक  है तो दूसरी ओर भोले और अत्यंत सरल स्वभाव के भी हैं । जिसका शिव महापुराण के कई कथाओं में वर्णन है । भोले बाबा बिना सोचे समझे जिन्होंने जो मांगा वह दे दिया कभी नहीं सोचा कि इस वरदान से नुकसान होगा या फायदा भोले बाबा इतने भोले हैं, जिनकी कई कथाएं में से एक कथा में आपको बता रहा हूं वह है भस्मासुर की कथा ।

 

 भोले बाबा का चिताओं के भस्म से अपने शरीर पर लेप करते थे । एक दिन वह भस्म लेकर शरीर पर लेप कर रहे थे तो इस भस्म के बीच एक कंकड़ निकला । कंकड़ को उठाकर उन्होंने जैसे ही दूर फेंका वहां से एक राक्षस पैदा हुआ और उन्होंने भोले बाबा को प्रणाम कर कहा बाबा मेरा जन्म आपके सानिध्य में हुआ है मैं आपका दास हूं ।बाबा मेरा नामकरण कर दीजिए तब भोले बाबा ने उनसे कहा की भस्म से तुम्हारी उत्पत्ति हुई है इसलिए आज से तुम्हारा नाम भस्मासुर होगा ।

 भस्मासुर ने कहा आपके द्वारा ही मेरा जन्म हुआ है आप ही मेरा मालिक हैं बताइए मैं आपकी क्या सेवा करूं तो भोले बाबा ने कहा मेरा श्रृंगार भस्म है तुम्हारा काम यही रहेगा कि जहां भी सत्पुरुष ज्ञानी महात्मा की मृत्यु होगी उनके भस्म को लाकर मुझे देना । मैं उस भस्म से अपना श्रृंगार करूंगा ।भस्मासुर का प्रतिदिन यही कार्य होता था की भोले बाबा के लिए भस्म ला कर देना । सुबह से शाम तक वह भस्म की तलाश में निकल जाते कई बार उन्हें ज्ञानी महात्मा और सत्पुरुष की चिता की तलाश में भटकना पड़ता । इसलिए उन्होंने एक दिन भोले बाबा से कहा बाबा आप मेरे कार्य से प्रसन्न है तो मुझे एक वरदान दीजिए कि जिनके सिर पर मै हाथ रखूं वह भस्म हो जाए । ताकि आपके लिए भस्म लाने का कार्य करने में मुझे आसानी हो । भोले बाबा ने आगे पीछे कुछ भी नहीं सोचा और एवमस्तु कह दिया । जैसे ही उन्होंने एवमस्तु कहा भस्मासुर कि मानो मनोकामना पूर्ण हो गई ।

 

अब वह भस्म की तलाश में इधर-उधर भटकना बंद कर दिया जहां भी ज्ञानी सत्पुरुष महात्मा दिखाते उनके सिर पर हाथ रख देते और वह वहीं पर भस्म हो जाता । इस तरह उन्हें भोले बाबा के लिए भस्म मिल जाता उनके इस कार्य को देखकर देवतागण बहुत दुखी हुए और उन्होंने इसका उपाय करने के लिए जग के पालनहार भगवान विष्णु से मिले । उन्होंने कहा कि भोले बाबा ने जिस तरह उन्हें वरदान दिया है कुछ ना कुछ उसका तोड़ तो होगा तब उन्होंने देवताओं को आश्वासन देकर भेज दिया कि आपका कार्य पूर्ण होगा और भस्मासुर का भी अंत होगा ।

इधर भगवान शिव के लिए भस्म लाते लाते भस्मासुर के मन में भी लालसा उत्पन्न हो गई कि मैं कब तक उनकी दास्ता स्वीकार करता रहूंगा । मैं अपनी शक्ति का उपयोग करूंगा उन्होंने सोचा भगवान शिव के सर पर ही क्यों ना हाथ रख दिया जाए ताकि वह भस्म हो जाए । भगवान शिव ने भस्मासुर की भावना को समझ गया और भी सरपट भागने लगे । भस्मासुर भी भगवान शिव के पीछे उन्हें भस्म करने के लिए दौड़ने लगे और एक गुफा में जाकर छुप गए । इधर भगवान विष्णु को पता चला तो वह बीच रास्ते में मोहनी रूप लेकर नृत्य करने लगे । भस्मासुर ने देखा तो मोहनी के रूप में इतने मोहित हो गए कि वह भगवान भोले बाबा को भस्म करने की लालसा को छोड़कर वह भी नृत्य करने लगे ।
मोहनी जैसे-जैसे नित्य करते भस्मासुर भी वैसे ही नृत्य करने लगे नित्य करते-करते मोहिनी रूप में भगवान विष्णु ने अपना हाथ को सिर पर रखकर नृत्य करने लगा ।भस्मासुर मोहिनी के रूप में इतने मोहित हो गए कि भगवान के शिव के द्वारा दिए गए वरदान को भूलकर वह भी नित्य करने लगा । लेकिन जैसी भस्मासुर ने अपना हाथ अपने सिर पर रखा वह वरदान स्वरुप वहीं पर भस्म हो गया । भगवान विष्णु के मोहिनी रूप और भस्मासुर के नृत्य को देवाधी देव महादेव हमारे भोले बाबा बरगद के वृक्ष के रूप में देख रहे थे । आज इसलिए कहा जाता है आपको कहीं भी शिवलिंग ना मिले तो आप बरगद के वृक्ष में जल चढ़ा देंगे तो वह जल भोले बाबा को समर्पित हो जाता है ।

आज इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि भगवान के द्वारा दी गई वरदान का भस्मासुर ने गलत उपयोग किया और मृत्यु को प्राप्त हुई । इसी तरह इंसानों को अपने ज्ञान वैभव और धन का उपयोग दूसरों के भला करने में और सत्कर्म में लगाना चाहिए । कभी भी अपनी शक्ति का उपयोग किसी निर्बल और निर्धन व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने में ना करें । अहंकार और लालच मनुष्य को विनाश की ओर ले जाती है जिस तरह भस्मासुर ने अपनी शक्ति का अहंकार हो गया था और मृत्यु को प्राप्त हुई । अगर इसी शक्ति को सत्कर्म और सत मार्ग में लगाता तो आज भस्मासुर का यस और कृति युगों युगों तक फैली रहती ।

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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