दल्ली राजहरा
सोमवार 13 अप्रैल 2026
भोजराम साहू 9893 765541
14 अप्रैल 2026 डॉ बाबा साहब आंबेडकर की 135वीं जयंती पर विशेष हेमंत कांडे  (उपाध्याय   छत्तीसगढ़ बौद्ध महासभा)

  भारत का इतिहास महापुरुषों से परिपूर्ण है। इन्हीं महापुरुषों में उन्नीसवीं शताब्दी में जन्में भारत रत्न संविधान निर्माता का नाम बड़े गौरव से लिया जाता है।जिन्होंने भारत के भाग्य निर्माण में मुख्य भूमिका निभाई ।और हमारे राष्ट्रीय जीवन तथा शासन व्यवस्था पर अमिट छाप छोड़ी ।वे जीवन पर्यंत संघर्ष शील रहकर तिरस्कृत, उपेक्षित,शोषित उत्पीड़ित लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़े और उन्हें राष्ट्र,समाज तथा संविधान ने उचित स्थान दिलाया।उन्होंने सदैव अन्याय,अत्याचार और शोषण के विरुद्ध संघर्ष किया ।वे हर समस्या का समाधान संवैधानिक ढंग से चाहते थे।डॉ आंबेडकर का जीवन और चिंतन मानवाधिकारों के लिए संघर्ष का दस्तावेज है।हर वह व्यक्ति जो दलित है, शोषित है और तिरस्कृत है वे सब उनकी संवेदना के आधार थे ।वे मानव के प्रति सद्भावना,प्रेम तथा सम्मान को प्रदर्शित करना महत्वपूर्ण समझते थे। इस प्रकार हमारे संविधान निर्माता,शोषितों के मसीहा,मानवता के पुजारी,समस्त सामाजिक, आर्थिक,धार्मिक राजनैतिक,विषमताओं के प्रति विद्रोह सशक्त झंडाबदार थे।वे सच्चे देशभक्त,,महामानव विश्व रत्न भाग्य अथवा संयोग वश नहीं अपितु अपने अपने व्यक्तित्व ,संघर्ष,त्याग,निः स्वार्थता,विद्वता,समर्पण,निष्ठा और वचनबद्धता के बल पर बने।

     डॉ आंबेडकर का गतिशील प्रभावशाली व्यक्तित्व बहुआयामी था।वे लोकप्रिय नेता, विख्यात विद्वान,निपुण विधिवेत्ता महान समाज सुधारक,विशिष्ट शिक्षाविद,प्रसिद्ध लेखक, प्रभावशाली वक्ता ,महान राष्ट्रभक्त, कुशल राजनीतिज्ञ, योग्य प्रशासक,मानवता वादि के साथ निर्भीक पत्रकार भी थे।सज्जनता,स्वावलंबन,कर्त्तव्यपरायणता,न्यायप्रियता,सत्यनिष्ठा और मानव स्वतंत्रता के पुजारी थे।राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक,सद्भभाव के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया।समाजोत्थान उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य बन गया था।उन्होंने अपने उत्कृष्ट कृतित्व से यह सिद्ध किया कि श्रेष्ठता किसी जाति विशेष या धर्म विशेष में जन्म लेने पर आधारित नहीं  होती तथा यह किसी धर्म विशेष की बपौती भी नहीं हो सकती।उनके विचार सैद्धांतिक होते हुए भी व्यवहारिक हैं।वे विचारों की दुनिया में ही नहीं किन्तु कार्यों की दुनिया में व्यस्त रहे। भारत का संविधान,हिंदू कोड बिल , मजदूरों महिलाओं के उत्थान, नहरों बांधों का निर्माण, रिजर्व बैंक की स्थापना शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना उनके कृतित्व की जीती जागती मिसाल है ज़ो देश में ही नहीं बल्कि दुनिया के सारे देशों के लिए अनुकरणीय है ।

 

        बाबासाहब ने स्वतंत्रता, समानता,बंधुत्व,न्याय,प्रतिष्ठा, अवसर की समानता ,स्वावलंबन, स्वाभिमान स्वविवेक के आधार पर मानव को ऊपर उठने के लिए प्रेरित किया।डॉ आंबेडकर जाति व्यवस्था के घोर विरोधी थे।जातियां समाज के आर्थिक और सामाजिक संगठन में बाधक हैं।डॉ आंबेडकर ने लोगों में ऐसा आत्मविश्वास और साहस भर दिया कि वे अपने पैरों में खड़े होकर विचार व्यक्त करते हैं।उनके बताए हुए रास्ते में चलने पर क्रांतिकारी परिवर्तन होते हैं।उन्होंने बताया कि संघर्ष के बिना कोई अधिकार नहीं मिल सकता और बिना संगठन के संघर्ष नहीं किया जा सकता ।वे अकेले होते हुए भी अकेले नहीं नहीं है संपूर्ण विश्व उनके साथ खड़ा है।वे कहते हैं कि मुक्ति दिलाने वाला ही परतंत्र है तो उससे मुक्ति की आशा करना व्यर्थ है।समस्त विश्व की मानवता के दर्द को समेटने वाला इंसान जिसकी वाणी में जोश है,विवेक है क्रांति है वह व्यक्तित्व केवल डॉ आंबेडकर हैं तभी तो पूरी दुनिया उनको नमन कर रही है ।उनका संघर्ष मनुष्य की इज्जत के लिया था,इज्जत से जीना मनुष्य का जन्म सिद्ध अधिकार है। जातीय संगठन सामाजिक संगठन नहीं है,जातीय संगठन को सामाजिक संगठन कहना सबसे बड़ा झूठ है।उनके विचारों और कार्यों को स्वार्थी व सत्ता लोलुप व्यक्तियों ने स्वार्थ सिद्धि का माध्यम बनाकर देश को बिलगांव के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।
     आज समूचा राष्ट्र आतंकवाद, अलगाववाद, संप्रदायवाद ,जातिवाद, पूंजीवाद ,नक्सलवाद,प्रांतवाद,भाषावाद, भाई भतीजावाद  धर्मवाद ,गरीबी  ,महंगाई,भुखमरी, भ्रष्टाचार,बेरोजगारी, कु स्वास्थ्य,असमानता,अन्याय,अत्याचार,शोषण,अनाचार,से ऐसा ग्रस्त है कि विकास की धारा अवरुद्ध हो गई है।जिससे स्वतंत्रता,समानता,बंधुत्व,न्याय प्रतिष्ठा अवसर की समानता ,संप्रभुता,धर्मनिरपेक्षता,गंभीर खतरे में पड़ गई है।
     आज इस बात की आवश्यकता है कि जिस प्रकार विश्व के अन्य देश बाबा साहब के आदर्शों विचारों सिद्धांतों के औचित्य को समझकर सही मूल्यांकन कर क्रियान्वित करने की दिशा में सार्थक प्रयास कर रहे हैं। तब हमारा देश जातीय असमानता, वैमनस्यता ,अस्पृश्यता, कर्मकांड  पाखंड, जनतांत्रिक मूल्यों व संगठनों, संविधानवाद  की हत्या कर ताना शाही से ग्रसित हो रहा है।
   अगर हम मानव मात्र के लिए इन निर्योगिताओं को दूर कर सके तो संपूर्ण राष्ट्र के लिए वरदान सिद्ध होगा ।यही बाबा साहब आंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

               

           

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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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