दल्ली राजहरा रविवार 11 अक्टूबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541

 

 कलयुग में मानवता की आखिरी उम्मीद: वो श्याम रसोई जहाँ इंसानियत सिर्फ ₹1 में बिकती है ।

 जब बेटे माँ-बाप को एक रोटी देने से कतरा रहे हैं, तब दो ‘पंडित जी’ हजारों अनजान लोगों को खिला रहे हैं भरपेट भोजन ये सिर्फ खबर नहीं, एक आइना है ।
 आज का समय देखिए। पैसा ही भगवान बन गया है। लोग फ्लैट, गाड़ी, मोबाइल के पीछे भाग रहे हैं। इस भागदौड़ में अपने बूढ़े माँ-बाप तक को वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं। पूछने पर कहते हैं – “टाइम नहीं है।”

 

लेकिन , इसी कलयुग में दो ऐसे फरिश्ते भी हैं जो कहते हैं – “कोई भूखा नहीं सोएगा।” आज की हमारी संडे मेगा स्टोरी एक ऐसी रसोई की है जहाँ थाली की कीमत नोट से नहीं, नियत से तय होती है। ये कहानी है श्री श्याम रसोई की।
हमारा दल्ली राजहरा निष्पक्ष समाचार चैनल ऐसी ही गुमनाम, लेकिन महान शख्सियतों को आपके सामने लाता है ताकि आपको पता चले कि आपका दिया हुआ एक रुपया भी अगर सही जगह जाए तो किसी की जान बचा सकता है।
 दो पंडित जी, दो आँसुओं से शुरू हुई कहानी
 नांगलोई वाले पंडित जी – प्रवीण कुमार गोयल जी की कहानी:
 प्रवीण जी कोई साधु नहीं, एक सफल बिजनेसमैन थे। नोटबुक बनाने की फैक्ट्री थी। एक दिन दिल्ली की 45 डिग्री गर्मी में उन्होंने देखा, एक मजदूर होटल वाले के सामने गिड़गिड़ा रहा था – “भैया 2 रोटी दे दो, 10 रुपये कल दे दूंगा।” होटल वाले ने भगा दिया। वो मजदूर भूखा ही फुटपाथ पर बैठ गया।
प्रवीण जी ने उसी दिन प्रण लिया – महोदय जी, उन्होंने अपनी लाखों की मशीनें बेच दीं। लोगों ने पागल कहा, घर वालों ने विरोध किया। लेकिन उन्होंने कहा – “मशीन फिर आ जाएगी, पर अगर एक आदमी भूख से मर गया तो मेरा पैसा किस काम का?” वहीं से श्याम रसोई का बीज बोया गया।

 

 साहिबाबाद वाले पंडित जी – गोपाल पुजारी जी की कहानी:
गोपाल भैया दिल्ली के सरकारी स्कूल में संगीत के शिक्षक थे। बच्चों को राग सिखाते थे। 2019 में बीमार पड़े तो VRS ले लिया और साहिबाबाद के राम जानकी मंदिर में सेवा करने लगे।

 

फिर आया कोरोना काल। महोदय जी, जब सब अपने घरों में दुबके थे, गोपाल भैया ने देखा कि मजदूर सड़कों पर भूखे चल रहे हैं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी, पेंशन का पैसा, सब निकालकर आटा-दाल खरीद लिया और मंदिर के बाहर भंडारा शुरू कर दिया। लोगों ने कहा – “पैसा खत्म हो जाएगा।” उन्होंने कहा – “बाबा श्याम देख लेंगे।” और बाबा ने देखा भी। आज वही छोटा भंडारा Shree Shyam Rasoi Sahibabad Trust बन गया है।
 ₹10 से ₹1 तक का सफर – ये घाटे का सौदा नहीं, इंसानियत का मुनाफा है

 

शुरुआत में थाली ₹10 की थी। लेकिन लॉकडाउन में जब एक मजदूर ने कहा – “बाबूजी, जेब में 1 रुपया ही बचा है”, तो गोयल जी ने उसी दिन बोर्ड बदल दिया – “भोजन मात्र ₹1 में”

 

ये ₹1 भीख नहीं है। इसके पीछे 3 बड़ी सोच है, जो हर इंसान को सीखनी चाहिए:
1. गरीब का स्वाभिमान: ₹1 देने से खाने वाले को लगता है कि उसने खरीदा है, माँगा नहीं। वो सर झुकाकर नहीं, सर उठाकर खाता है।

 

 अन्न का सम्मान: मुफ्त की चीज लोग फेंक देते हैं महोदय जी। ₹1 वाली थाली में एक चावल का दाना भी थाली में नहीं छूटता।
3. सबके लिए भोजन: , सबसे बड़ी बात – जिसके पास वो ₹1 भी नहीं है, उससे वो भी नहीं लिया जाता। उसे सबसे पहले और सबसे ज्यादा प्रेम से खिलाया जाता है।
 थाली में क्या है? – 5 स्टार होटल भी फेल है

 

यहाँ कोई 1 सब्जी नहीं मिलती। यहाँ मिलता है: असीमित (Unlimited) – जितना मन करे उतना खाओ ताजी रोटी (तवा और कई बार कोयले की भट्टी पर बनी) जीरा राइस / सादा चावल दाल सूखी सब्जी मिक्स वेज / मटर पनीर  रायता मीठे में खीर / बर्फी / हलवा और सब कुछ बिना लहसुन-प्याज का, एकदम सात्विक भोजन ।
रोजाना 700 से 1500 लोग खाते हैं। रिक्शा वाला, छात्र, बुजुर्ग, मजदूर, सब एक ही लाइन में, एक ही थाली में। यहाँ कोई अमीर-गरीब नहीं।

 

: श्याम रसोई के 3 कठोर नियम – जो आज के समाज को सीखने चाहिए
 नशेबाजों को भोजन नहीं: बोर्ड पर साफ लिखा है। यहाँ शराब पीकर आने वालों को भोजन नहीं मिलता। पंडित जी कहते हैं – “जो ₹200 की शराब खरीद सकता है, वो ₹1 की रोटी क्यों नहीं खरीद सकता? हम नशे को बढ़ावा नहीं देंगे।”
 नकद दान नहीं: ये संस्था कैश नहीं लेती। आप पैसा नहीं, राशन दीजिए – 10 किलो आटा, 5 किलो दाल, तेल। ताकि एक-एक पैसे का हिसाब बाबा श्याम को दिया जा सके। इसमें पारदर्शिता है महोदय जी, यही ईमानदारी है।
 बचा हुआ खाना फेंका नहीं जाता: शाम को जो भोजन बचता है, उसे गौशाला और जरूरतमंद बस्तियों में बाँट दिया जाता है। अन्न देवता का अपमान नहीं होता।
 सिर्फ रसोई नहीं, ये तो पूरा तीर्थ है – अन्य सेवा कार्य
, ये लोग सिर्फ खाना नहीं खिला रहे, ये समाज बना रहे हैं:
. बेटियों की शिक्षा: 20 से ज्यादा गरीब बच्चियों की स्कूल फीस यही ट्रस्ट भरता है।
. गरीब कन्याओं की शादी: हर साल 2-3 असहाय परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाते हैं।
 ₹1 में इलाज: साहिबाबाद में श्याम रसोई डिस्पेंसरी चलती है जहाँ ₹1 की पर्ची पर डॉक्टर, दवाई और ब्लड टेस्ट होता है।
अंत में – आपसे एक अपील, महोदय जी के चैनल की ओर से आप अपने बच्चों के जन्मदिन पर हजारों रुपये केक और होटल में उड़ा देते हैं। एक बार अपने बच्चे का जन्मदिन यहाँ मनाकर देखिए। ₹2000-3000 में 100 लोगों का पेट भर जाएगा और आपके बच्चे को जीवन भर की सबसे बड़ी सीख मिलेगी – “बांटने में ही खुशी है।”

 

आप अपनी माता-पिता की पुण्यतिथि पर यहाँ 1 दिन का भोजन स्पॉन्सर कर सकते हैं। राशन दान कर सकते हैं। पता: डी-403, राम जानकी मंदिर के पास, लाजपत नगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद।नांगलोई पता: भूतों वाली गली, नांगलोई, दिल्ली (समय सुबह 11 से 1 बजे) इसके लिए आप मोबाइल नंबर 9891321712   पर संपर्क कर सकते हैं ।

आज बस इतना ही आपके पासभी संडे मेगा स्टोरी के लायक कहानी हो तो हमें अवश्य बताएं आपकी कहानी पूर्णतः नि: शुल्क प्रसारित किया जाएगा 
 धन्यवाद
भोज राम साहू
संपादक
हमारा दल्ली राजहरा निष्पक्ष समाचार चैनल 
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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