
दल्ली राजहरा
मंगलवार 3 फरवरी 2026
भोजराम साहू 9893 765541
केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया वर्ष 2026 का आम बजट श्रमिक वर्ग, किसानों और मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरा है। इसे ‘कॉरपोरेट समर्थक’ और ‘जनविरोधी’ करार देते हुए इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस इंटक के पदाधिकारियों ने गहरा रोष व्यक्त किया है।
इस संबंध में जारी एक संयुक्त बयान में अभय सिंह प्रदेश महासचिव, इंटक ने कहा कि इस बजट में महंगाई से जूझ रहे आम आदमी को कोई राहत नहीं दी गई है। उन्होंने कहा, “सरकार ने लोकलुभावन वादे तो बहुत किए, लेकिन धरातल पर मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम वेतन में वृद्धि के लिए कोई ठोस योजना नहीं पेश की। यह बजट केवल आंकड़ों की बाजीगरी है।
मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन इंटक दल्लीराजहरा के अध्यक्ष तिलक राम मानकर ने खनन और धातु क्षेत्र के श्रमिकों की उपेक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण की दिशा में बढ़ते कदम श्रमिकों के भविष्य के लिए खतरा हैं। बजट में ठेका श्रमिकों के नियमितीकरण पर चुप्पी साध ली गई है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन सेंट्रल कमेटी इंटक के सचिव भूपेंद्र कुमार दिल्लीवार ने किसानों की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एमएसपी की कानूनी गारंटी और कृषि इनपुट लागत में कमी की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को एक बार फिर ठगा गया है। बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के बजाय केवल बड़े पूंजीपतियों के हितों का ध्यान रखा गया है।
इंटक नेताओं ने बजट की महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जिसमें मध्यम वर्ग और वेतनभोगी कर्मचारियों को कर स्लैब में अपेक्षित छूट नहीं मिली। बेरोजगारी के लिए रोजगार सृजन की कोई स्पष्ट समयबद्ध योजना नहीं है।
असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती की गई है। पेट्रोल-डीजल और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।




