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संडे मेगा स्टोरी में आज रविवार 27 अक्टूबर 2025 को पढ़िए डॉक्टर शिरोमणि माथुर की कविता और जाग उठा बस्तर के संदर्भ में विशेष आलेख..!

दल्ली राजहरा रविवार 27 अक्टूबर 2025 भोज राम साहू 98937 65541
दल्ली राजहरा के राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित लेखिका डॉक्टर श्रीमती शिरोमणि माथुर के द्वारा बस्तर पर एक कविता प्रकाशित हुआ जिसमें उन्होंने लिखा ” बहुत तड़पते बस्तर वासी सुनिए अब उनकी आवाज , न्याय मांगते बस्तर वासी उनको भी करिए आजाद ।

इस कविता के साथ बस्तर की समस्या पर माताजी डॉक्टर शिरोमणि माथुर ने मेरे अनुरोध पर एक आलेख लिखा है जिसे आपके सामने रख रहा हूं ।
➡️🌺🔥बस्तर की नक्सली समस्या🔥🌺⬅️
नक्सलियों द्वारा आये दिन होने वाली आंतक की घटनाये लुटपाट मारपीट खून खराबा बस्तर की शांति को भंग करते रहे हैं l आवागमन के साधनों पर रोक लगाना ,सड़के न बनने देना स्कूलों को बंद कर देना ,सुरक्षा बलों पर आक्रमण करना ,उन्हें बंदी बनाना या हत्याएं कर देने के कारण बस्तर विकास से वंचित रहा ।

यहां के वनों की शक्ति जो कभी हमारे देश की साधु संत तपस्वियों को आकर्षित करती थी वह अब भय आतंक तनाव चिंता में बदलती गई l बस्तर के गांव में जाने से लोग घबराने लगे , एक भयानक स्थिति वहां पर बनने लगी । वर्षों पूर्व उन्होंने बस्तर की स्कूल तक को तुड़वा दिए थे तथा कई बार भयावक नरसंहार वहां हो चुके हैं । जिनके कारण बच्चों का जीवन असुरक्षित हो गया था तब कई स्वयं सेवी संस्थाओं ने बस्तर के बच्चों को अन्य स्थानों पर लाकर सुरक्षित रखा l उनकी पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था भी की थी l

हमारे दल्ली राजहरा में कुछ बच्चों को लाकर सुरक्षित रखा गया और अभी उनकी शिक्षा व्यवस्था भी की गई है l उस समय मेरा भावुक मन बहुत व्यथित हुआ था l उस समय मैं यथाशक्ति सहयोग किया था । बस्तर के स्कूलों को बंद कर दिए जाने पर हमने छात्र संगठन के बच्चों को साथ लेकर राजहरा में जुलूस निकाला था ।आंदोलन किया था उस समय हमारा नारा था “बंदूक नहीं अब कलम चाहिए , खून नहीं अब दवा चाहिए । इन्हीं नारों के साथ हमने बच्चों को भविष्य को सुरक्षित रखने की पहल की थी । कई बार हमने आंदोलन कर नक्सलियों का विरोध किए थे । इस तरह की घटनाएं झीरमघाटी कांड आदि से छत्तीसगढ़ का जनजाति काफी प्रभावित हुआ ।बस्तर ही नहीं इनका प्रभाव पूरे छत्तीसगढ़ के विकास पर हुआ और छत्तीसगढ़ की छवि भी विश्व में खराब होती रही । इस विषय से दुखी होकर मैने भी एक कविता बनाई है जो साहित्य जगत में बहुत पसंद की गई जा रही है l

कविता की प्रथम पंक्ति है बहुत तड़पते बस्तर वासी सुनिए अब उनकी आवाज
(बस्तर की आवाज)
बहुत तड़पते बस्तरवासी,
सुनिए अब उनकी आवाज ।
न्याय माँगते बस्तरवासी,
उनको भी करिए आज़ाद ।।
अपनी ही मस्ती में नाचें,
लोक नृत्य से करते प्यार ।
सुविधाओं से वंचित रहते,
भरे शासन के भंडार।।
कोई आकर हमें बचाये,
कहते. रहते बारम्बार l
नक्सलवादी हमें सताते,
बना रहे हमको औजार।।
कीट पतंगा हमें न समझो,
हम भी मानव की औलाद ।
तड़फ – तड़फ कर हम मरते हैं,
अभी हटाओ नक्सलवाद ।।
जीवन भय में बीत रहा है,
मौत कभी आ जाती है ।
रक्त फैलता है धरती पर,
लाशें बिछती जाती हैं।।
भीख में हमको जीवन दे दो,
करिए अब सार्थक संवाद ।
जंजीरों में जकड़े हम हैं,
हमको करिए अब आज़ाद ।।
जरा देखिए मेरी पीड़ा,
नहीं दबाओ अब आवाज ।
खून की होली बंद करिए,
होने दो बस्तर आबाद।।
कितने घाव सहे है हमने,
कितनी लाशें गईं बिछाएं l
गिनती करना बड़ा कठिन है,
अंतहीन हो गई लड़ाई।।
मानवता का पाठ पढ़ाते,
मानव वादी कहां गए हैं..?
नक्सलवाद बंद करो अब,
बस्तर वासी ठगे गए हैं।।
बहुत तड़फते बस्तर वासी,
सुनिए अब उनकी आवाज ।
न्याय मांगते बस्तर वासी,
उनको भी करिए आजाद ।।
(डॉ शिरोमणि माथुर )
➡️🪷🔥मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा 🪷🔥⬅️

17 अक्टूबर 2025 को 210 नक्सलियों ने आतंकवाद का दामन छोड़ मुख्य धारा में लौटे थे । इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा मौजूद थे । विष्णु देव साय ने कहा था कि आज का दिन छत्तीसगढ़ की इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा । भटके हुए लोग अहिंसा के मार्ग और सरकार की पूर्णवास नीति पर विश्वास जताकर लौटे हैं । हम उन्हें तीन वर्षों तक आर्थिक सहायता और जीवन पुनर्वास का संपूर्ण अवसर देंगे । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में बनी हमारी पूर्ण वास और उद्योग नीति का यह परिणाम है l

➡️🌺🔥अब संपादकीय कलम से 🔥🌺⬅️

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बस्तर दशहरा के समय अक्टूबर के प्रथम अक्टूबर 2025 के प्रथम सप्ताह में बस्तर आगमन हुआ था l उन्होंने दंतेश्वरी माई का दर्शन के उपरांत जगदलपुर के लाल बाग मैदान में संबोधित करते हुए ऐतिहासिक संकल्प लिया जो आज बस्तर की दशा और दिशा को बदलने में कारगर साबित हो रहा है उन्होंने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक लाल आतंक बस्तर से समाप्त होगा l साथ उन्होंने कहा कि मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं जो युवा बीच बंदूक उठाए हैं उन्हें समझाइए हमारे सरकार ने सलेंडर पॉलिसी बहुत अच्छा बनाया है l समाज के मुख्य धारा में जुड़े ।सरकार चाहता है कि बस्तर का विकास हो । यहां के बच्चे युवा भी अन्य प्रदेश के युवकों की तरह विभिन्न क्षेत्रों में अपना प्रदर्शन दिखाएं तथा रोजगार के लिए जाएं सरकार आपके साथ हैं ।

बस्तर के विकास और देश के विकास में युवाएं अपना भागीदारी दें । आपके विकास में जो भी बाधाये आएगी उसे सरकार पूरे संकल्प के साथ दूर करेगी। बस्तर में खेलों की शुरूआत किया है और इस बार पूरे देश के आदिवासी भाई इस बस्तर ओलंपिक में शामिल होंगे ।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर में नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक खत्म करने का संकल्प के बाद बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान तेज हो गई है l जहां पूर्व सरकारों ने सुरक्षा बलों और प्रशासन का हाथ बांधकर पंगु बना दिया था ।उसे वर्तमान भाजपा सरकार ने फ्री हैंड दे दिया है उनका मकसद है “बस्तर का पूरा विकास” यह तभी संभव हो पाएगा जब वहां पर आने वाले बधाएं दूर होगी । बधाएं सिर्फ नक्सलवाद ही नहीं है कई विषमताएं हैं जिसके कारण बस्तर में विकास नहीं हो पा रहा है । जहां प्रमुख रूप से लोगों को नक्सलवाद ने घेर रखा है उनके विचारों को इस तरह से दिग भ्रम कर दिया है कि सरकारी तंत्र उनका सबसे बड़ा दुश्मन है । छोटे से बच्चे से लेकर उम्रदराज लोग भी सरकार को बस्तर का विकास का विरोधी मानते थे ।

लेकिन अब लोग का भ्रम टूट रहा है लोग जाग रहे हैं सरकार की सफलता का बेहतरीन उदाहरण अब बस्तर में देखने मिल रहा है l क्योंकि बस्तर बदल रहा है बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में अब गोली की जगह घर में रोशनी दिखाई दे रही है । छत्तीसगढ़ में लाल आतंक का भेद किला ढह रहा है ।बस्तर में हिंसा और भय की पहचान खत्म हो रही है । सरकार सभी तरफ विकास और बदलाव की नई कहानी लिख रही है । जंगल में गूंजती गोलियों की आवाज अब सड़कों के निर्माण पुलों की ढलाई में बदल रही है । अंदरूनी इलाकों में बच्चे फिर से स्कूल पढ़ने जाने लगे हैं l

जहां नक्सलवाद की वजह से अंदरूनी क्षेत्रों में 300 से भी ज्यादा स्कूल बंद हो चुके थे । अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल ” स्कूल चलो अभियान” और “शिक्षा मिशन वापसी” के जरिए से 150 से ज्यादा स्कूल चालू हो चुके हैं । जहां 15000 से भी ज्यादा स्कूल बच्चों का दोबारा नामांकन हुआ है । सुदूर क्षेत्रों में स्कूलों का निर्माण किया जा रहा है । जहां बिजली शौचालय पानी की सुविधा भी दी जा रही है l “बेटी पढ़ाओ _ बस्तर बढ़ाओ” मुहिम से जनमानस में चेतना जगाई जा रही है । स्थानीय गोड़ी हल्बी और अन्य भाषाओं का भी प्रयोग शिक्षा को स्तर को सुधारने के लिए सरकार के द्वारा किया जा रहा है । जिसमें स्थानीय नौजवानों को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है । ताकि वह रोजगार के साथ-साथ बस्तर में शिक्षा के विकास में भी अपना भागीदारी दे सके l कई ऐसे जगह है जहां स्कूल भवन आदि की सुविधा नहीं है वहां मोबाइल स्कूल और शिक्षा रथ चलाया जा रहा है l

सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्र के विकास के लिए 52000 करोड़ की योजना चलाई जा रही है जहां बस्तर का आदिवासी अंचल का पूर्ण निर्माण किया जाएगा साथ ही 43000 करोड़ की रेलवे और सड़क विस्तार की योजनाएं लाई गई है l

एक विचारणीय तथ्य यह है कि जितने भी लोग सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए हैं वह मूल निवासी ही है । बड़े माओवादी इन्हें बरगलाकर सरकार के खिलाफ लड़ाकर भूमिगत हो गए और उन्हें मरने मारने को छोड़ गए ।

अब अबूझमाड़ अबूझ नहीं रहेगा उनकी प्राकृतिक सौंदर्य को निहारने देसी विदेशी पर्यटक भी आएंगे बस्तर की जीवन शैली उनके रहन-सहन को लोग बारीकी से जानेंगे l बस्तर को रोजगार मिलेगा तथा बस्तर का विकास होगा ।

जैसा भी हो लेकिन अब बस्तर जाग चुका है । वहां के रहने वाले मूलनिवासी अब समझ चुके हैं कि उनका विकास तभी संभव है जब सरकार के साथ सहयोग करेंगे । अब तक माओवादियों के बहकावे में आकर अपना परिवार अपना अस्मत खो चुके हैं । उन्हें वापस तो नहीं लौटाया जा सका सकता लेकिन आने वाले पीढ़ी जंगलों में मारे मारे फिरने के बजाय अपने घरों में अपने परिवारों के साथ सुखी जीवन जिएंगे ।
आगामी समय में सरकार रहे या ना रहे लेकिन जब भी बस्तर की विकास की गाथा लिखी जाएगी माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के बस्तर के विकास और संवारने की दिशा में जो कदम उठाया है उसे स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा ।

भोजराम साहू
संपादक
“हमारा दल्ली राजहरा एक निष्पक्ष समाचार चैनल ” के संडे मेगा स्टोरी के लिए ।






