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संडे मेंगा स्टोरी के रविवार 9 नवंबर 2025 के अंक में पढ़िए छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के रजत जयंती पर हमारा दल्ली राजहरा को क्या मिला…!

दल्ली राजहरा सोमवार 10 नवंबर 2025 भोजराम साहू 9893 765541

संडे मेगा स्टोरी में रविवार 9 नवंबर2025 पर पढ़िए छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के रजत जयंती पर “हमारा दल्ली राजहरा” को क्या मिला इन 25 सालों में इन पर विशेष आलेख..!

परिचय & छत्तीसगढ़ का निर्माण

 

छत्तीसगढ़ पहले मध्य प्रदेश का हिस्सा था 14 जनवरी 1998 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने अलग राज्य बनाने की घोषणा किया l इसके लिए उन्होंने मध्य प्रदेश के 16 छत्तीसगढ़ी भाषा जिले जिसमें 96 तहसील और 146 विकासखंड थे l जिसका क्षेत्रफल 135 190 वर्ग किलोमीटर है को अलग किया गया । सन 2000 में मध्य प्रदेश विधानसभा ने विभाजन को प्रस्ताव को मंजूरी दी तथा संसद में बिल पास हुआ । जिसे राज्य के गठन का रास्ता साफ हुआ अगस्त 2000 में राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ राज्य अधिनियम पर हस्ताक्षर किए तब राज्य की सौगात अटल बिहारी वाजपेई ने 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ वासियों को दिया l बहुमत दल का नेता होने के कारण राज्य का प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी कांग्रेस से बने थे 1 नवंबर 2000 से 7 दिसंबर 2003 तक उनका कार्यकाल रहा उसके बाद भारतीय जनता पार्टी से डॉक्टर रमन सिंह 7 दिसंबर 2003 को मुख्यमंत्री बने थे जो की लगातार 17 दिसंबर 2018 तक तीन कार्यकाल पूरा किया उसके बाद मुख्यमंत्री का पद फिर कांग्रेस की झोली में आया भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने और अब 13 दिसंबर 2023 से विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के कार्यभार संभाल रहे हैं l छत्तीसगढ़ का पूर्व नाम दक्षिण कोशल था छत्तीसगढ़ को रायपुर के 18 और रतनपुर के 18 कुल छत्तीसगढ़ मिला कर बनाया गया था l जिसमें थे

  रतनपुर के अधीन 18 गढ़

रतनपुर, विजयपुर, पंडर भट्टा, पेंड्रा, केन्दा, बिलासपुर, खरौद, मदनपुर (चांपा), कोटगढ़, कोसगई (छुरी), लाफागढ़ (चैतुरगढ़), उपरोडागढ, मातिनगढ, करकट्टी-कंड्री, मारो, नवागढ़, सेमरिया, सोनधी.

रायपुर के अधीन 18 गढ़

रायपुर, पाटन, सिमगा, सिंगारपुर, लवण, अमोरा (ओमेरा), दुर्ग, सारधा, सिरसा, मोहंदी, खल्लारी, सिरपुर, फिंगेश्वर, राजिम, सिंगारगढ़ (सिंघनगढ़), सुवर्मार, टेंगनागढ़, अकलवाड़ा l

अब विकास की बात कहें तो छत्तीसगढ़ का निर्माण होते ही केंद्र सरकार ने विकास के लिए अंधाधुन पैसा राज्य सरकार को दिए जहां पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने भी अपने कार्यकाल में कई कार्य किये जिससे गांव का विकास हुआ । पानी की समस्या दूर करने के लिए जोगी डबरी का निर्माण हुआ । बीजेपी सरकार अपने संकल्प के तहत गांव की और शहरों की सड़कों की समस्या पानी की समस्या हर तरफ अपना ध्यान आकर्षित कर विकास की गति को तेज किया है । किसानों के फसल धान को कोचियों से मुक्त करने के लिए सरकारी समिति का गठन कर उचित मूल्य बोनस के साधन खरीदी कर रहा है । साथ ही फसलों की बीमा आदि से उन्हें राहत मिली है । महतारी वंदन के नाम से माता और बहनों को ₹1000 प्रति माह की राशि उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बना रहा है तो वृद्धो , बेसहारा और विकलांगों को भी उन्होंने मायूस नहीं किया है । खेल प्रतिभाओं को उभारने के लिए भी सरकार के द्वारा मैदान ,बेरोजगार युवकों के लिए परीक्षा फीस में कमी भी इन्हें आगे बढ़ाने के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ है । स्कूलों में शिक्षको की कमी दूर करने के लिए लाखों की संख्या में शिक्षकों की भर्ती किए गए यह सब छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद एक बहुत बड़ी उपलब्धि हुआ है । 

बस्तर को संवारने की दिशा में बेहतरीन पहल ।

बस्तर के प्राकृतिक दृश्य को निहारने के लिए लोग तरसते थे । बस्तर एक अबूझ पहेली बना था लेकिन केंद्रीय मंत्री अमित शाह के द्वारा मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सली मुक्त बनाने की वादा ने बस्तर को नया जीवन दिया है । अब या तो नक्सलवाद का सफाई हो रहा है या फिर सरकार के सामने नक्सलवाद अपना हथियार समर्पित कर नया जीवन जीने की दिशा में जा रहे उन्हें अपने परिवार अपने घर लौटने की खुशी भी हो रहा है जो कभी जंगल जंगल मारे मारे फिरते थे । जो पहले मध्य प्रदेश में राज्य के समय नहीं हुआ करता था ।

“हमारा दल्ली राजहरा” को छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद क्या मिला..?

यह सब तो ठीक है लेकिन अब बात रखनी है छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद हमारा दल्ली राजहरा को क्या मिला । दल्ली राजहरा के निवासियों ने क्षेत्र का सबसे बड़ी जनसंख्या वाला शहर होने के कारण दुर्ग जिले टूटने के बाद नए जिले के निर्माण के समय दल्ली राजहरा को जिला बनाने की मांग रखी थी । लेकिन राज्य सरकार ने उनकी मांगों को नजर अंदाज कर दिया । तहसील बनाने की मांग रखी लेकिन इसकी सौगात डोडी को मिला । 

छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही पूरे राज्य का विकास हुआ है मात्र हमारा दल्ली राजहरा को छोड़ कर क्योंकि दल्ली राजहरा की वर्तमान स्थिति बताता है के वास्तव में यहां का विकास नहीं बल्कि विनाश हुआ है । 

 

कई स्कूल बंद हो चुकी है।

लौह नगरी दल्ली राजहरा में पूर्व 1990 के दशक और आज 2025 इन 35 साल में बहुत से बदलाव आए हैं l जहां 90 के दशक में चल रहे BSP के स्कूल क्रमांक 1 ,2, 3 ,6 ,22 ,26 ,28, 30, 33 और सीनियर सेकेंडरी स्कूल बंद हो चुके हैं l सीनियर सेकेंडरी स्कूल और बीएसपी स्कूल क्रमांक 1 के जगह पर DAV इंग्लिश मीडियम स्कूल संचालित हो रहा है l वहीं निजी स्कूल के तौर पर गांधी विद्या मंदिर श्री गुरु नानक हाई स्कूल क्रमांक 1 और 2 जो की 30 नंबर स्कूल में संचालित हो रहा है l नेहरू स्कूल के साथ आत्मानंद स्कूल ,श्री सरस्वती शिशु मंदिर संचालित है ।
 शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए केंद्रीय विद्यालय एक विकल्प के रूप में दल्ली राजहरा में स्थापित हो रहा है लेकिन कब तक पूर्णत: स्थापित होगा क्या यह गरीब स्तर के बच्चों के लिए भी फायदेमंद होगा या नहीं । क्या सरकार फिर इसमें बदलाव लाएंगे यह तो समय ही बताएगा ।

नगर में बेरोजगारी की समस्या बढ़ रही है ।

 जीवन जीने के लिए एकमात्र बीएसपी का ही सहारा है l वहां पर भी नियमित कर्मचारियों की भर्ती बंद है l जो चल रहा है वह ठेका श्रमिक के भरोसे l बाहर से कंपनियां बीएसपी के अंदर काम करने के लिए आ रही है साथ में कर्मचारी भी लेकर आ रहे हैं जिसके कारण स्थानीय युवकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है वे बेरोजगार हो रहे हैं । 

 सच्चाई तो बस यही है कि केंद्र और राज्य के सरकार ने दल्ली राजहरा के ऊपर कभी ध्यान नहीं दिया l उनका ध्यान तो सिर्फ बीएसपी से मिलने वाली राजस्व पर ही है ताकि यहां से मिलने वाले राजस्व की राशि को जिले के अन्य जगह, प्रदेश और केंद्र में उपयोग कर सके l उन के द्वारा राजहरा के भविष्य के बारे में कभी ऐसा कोई काम नहीं किया गया जिससे यहां के निवासियों को निरंतर रोजगार मिल सके l

कल्पना कीजिए यदि दल्ली राजहरा से बीएसपी अपना कारोबार समेट कर आयरन ओर खनन बंद कर दें और अन्य स्थान पर चला जाए तब दल्ली राजहरा के निवासियों के जीवन जीने के लिए रोजगार की साधन क्या रहेगी ? क्योंकि यहां सहकारी कर्मचारी की संख्या बहुत ही कम है l

बी एस पी सरकार को देता है करोड़ों के राजस्व

 बीएसपी आयरन ओवर खनन के बदले सरकार को लगभग 1000 करोड़ की राशि राजस्व के तौर पर प्रति वर्ष देती है l इसका उपयोग दल्ली राजहरा के लिए नहीं हो रहा है l बल्कि इसका उपयोग अन्य जगहों पर हो रहा है । 

नियमित कर्मचारियों की भर्ती बंद होने से बीएसपी के क्वार्टर हो रहे हैं खाली

यह तो सच है सन 1955 से दल्ली राजहरा में लौह अयस्क खनन चालू हुआ था और आज 70 सालों में स्थिति बहुत सोचनीय हो गया है l बीएसपी के बने क्वार्टरों खाली हो रहे है और आगामी 5 सालों में और भी दर्दनाक स्थिति दल्ली राजहरा के होने वाली है l केंद्र और राज्य सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है कि नगर में गृह निर्माण विभाग की ओर से फिर से मकान बनाया जा सके या खाली जमीन पर रोजगार की साधन खोल सके।

      अस्पताल के नाम पर पकड़ाया झुनझुना

100 बिस्तर सरकारी अस्पताल की मांग वर्षों से की जा रही  है ।  लेकिन सरकार ने अब तक मांग पूरा नहीं किया है । इससे बेहतर एशिया का सबसे बेहतरीन मजदूरों के द्वारा निर्मित और मजदूरों के द्वारा संचालित शहीद अस्पताल है जहां हजारों की संख्या में न्यूनतम दर पर इलाज करा कर लोग जाते हैं  । सरकार नगर में बेहतर  अस्पताल की सुविधा कब देगी यह भी सोचने बात है।

पर्यटक में रोजगार की भी है यहां संभावनाएं

 दल्ली राजहरा के आसपास प्राकृतिक ने इतनी सौगात दी है कि बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए देखने लायक स्थान है ऐतिहासिक झरण कुंड, नगर देव राजहरा बाबा शिकारी बाबा ,कोकाण घाटी की पहाड़ियां राजहरा बाबा डैम साइड बोडी डेम के आसपास की पहाड़ियां उसमें उगने वाले पेड़ जो सूर्योदय और सूर्यास्त के समय बहुत ही सुंदर नजर आता है । डैम साइड में तो अगर सरकार ध्यान दें तो वोटिंग का व्यवस्था भी कर सकते हैं ।
कुछ माह पहले नीलू शर्मा (अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य पर्यटक विभाग निगम ) का आगमन दल्ली राजहरा में हुआ था l उस समय उन्होंने डैम साइड को देखकर जल्द ही पर्यटक विकास निगम के साथ चर्चा करने की बात कहा था l अब तक इस संबंध में कुछ नहीं हुआ है आगे भविष्य ही तय करेगा कि वास्तव में जिम्मेदार पदाधिकारी की द्वारा कही गई बात कहां तक सच साबित होती है l

गोविंद वाधवानी अध्यक्ष राजहरा व्यापारी संघ के द्वारा राजहरा बचाओ आंदोलन के रूप में पिछले वर्ष जो आंदोलन छेड़ा था l उससे कुछ सकारात्मक पहल शायद भविष्य में देखने को मिले l लेकिन रोजगार के मामले में पूरे राजहरा नगर को जागने की आवश्यकता है । आज देखने को मिलता है नगर में सिर्फ यही एक व्यक्ति है जिन्हें नगर के सुख और सुविधा की चिंता है ।

जनक लाल ठाकुर (पूर्व विधायक एवं मजदूर नेता)

ने बताया कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के द्वारा दल्ली राजहरा के भविष्य और विकास के लिए दोनों सरकारों ने मिलकर कोई कार्य नहीं किया और न ही कोई योजना बनाई है। शहीद कामरेड शंकर गुहा नियोगी जी, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ माईन्स श्रमिक संघ के द्वारा राजहरा बस्ती को बचाने के लिए अनेकों लड़ाईयां लड़ी गई और लोगों के जीवन स्तर को उठाने के लिए संघर्ष के साथ ही साथ निर्माण का कार्य किया गया है।

आज भी शहीद कामरेड शंकर गुहा नियोगी जी संघर्ष और निर्माण के रास्ते पर आम जनता, मजदूर, किसान, छात्र, नौजवान, अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार, व्यापारी, जन संगठन, बुद्धिजीवी वर्ग को एक साथ मिलकर दल्लीराजहरा के पुनः उत्थान के लिए आगे चलने के लिए सोचें तो निश्चित ही  दल्ली राजहरा ‎‫और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा एवं दल्ली राजहरा का भविष्य सुरक्षित होगा।

अशोक बांबेश्वर (अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी दल्ली राजहरा)

ने बताया कि दल्ली राजहरा के स्थानीय बेरोजगारो का भविष्य अंधकारमय होते जा रहा है। जबकि पहला हक दल्ली राजहरा के स्थानीय बेरोजगारों का है। प्रबंधन को चाहिए कि स्थानीय लोगों के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाये। ज्ञात हो कि दल्ली राजहरा माइंस क्षेत्र में झारखंड और बिहार के बेरोजगारों को बाहरी ठेकेदारों द्वारा यहां लाकर नौकरी में लगाया जा रहा है जो कि स्थानीय बेरोजगारों के लिए बड़ी समस्या बनते जा रही है। और इसी कारण स्थानीय लोग नौकरी से वंचित होते जा रहे हैं।

श्रीजीत (शिक्षक ,लेखक एवं भाजपा युवा नेता )

ने बताया कि जब नगर पालिका, राज्य और केंद्र – तीनों जगह पर एक ही पार्टी या विचारधारा की सरकार है, तो राजहरा के पुनर्जीवन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। सरकार को चाहिए कि बीएसपी से मिलने वाले वार्षिक करोड़ो के राजस्व में से कम से कम 25% हिस्सा यहां के विकास में लगाया जाए। आधुनिक स्किल डेवलपमेंट सेंटर और रोजगार प्रशिक्षण संस्थान खोले जाएं।

बीएसपी की खाली पड़ी जमीन पर स्टार्टअप हब, टेक्नोलॉजी पार्क, एजुकेशन हब जैसी परियोजनाओं की नींव रखी जाए। जनप्रतिनिधियों को पार्षद से लेकर सांसद तक मिलकर एक साझा मंच बनाना चाहिए जो दल्ली राजहरा के लिए केंद्र सरकार से विशेष पैकेज मांगे। खनिज क्षेत्रों के पुनर्विकास अधिनियम के तहत यहां विशेष अनुदान मिले। रेलवे, ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म मंत्रालय से परियोजनाएं लाई जाएं । और अंत में दल्ली राजहरा आंदोलन की नगरी है छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद जिस उद्देश्य से विभिन्न आंदोलन हुए उसका प्रतिफल दल्ली राजहरा को नहीं मिला दल्ली राजहरा वासियों ने सोचा था की रेल लाइन का विस्तार होने के बाद हमें फायदा मिलेगा । सरकार ने रेलवे लाइन का विस्तार तो कर दी लेकिन नगर वासियों को फायदा होने के बजाय और नुकसान हो रहा है । नगर से भिलाई दुर्ग रायपुर जाने वालों को बैठने की तो बहुत दूर की बात है खड़ा होने के लिए भी जगह मिलना मुश्किल हो गया है l 

 संडे मेगा स्टोरी में आज बस इतना ही आलेख के संबंध में आप अपना विचार भी भेजें । राजहरा के भविष्य वास्तव में मुट्ठी में रखी रेत की तरह हो रही है । धीरे-धीरे एक दिन महामाया और कच्चे जैसे जगह में ना बदल जाए । इसके लिए राजहरा को जागना होगा आपका विचार क्या है अवश्य बताएं …!

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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