छत्तीसगढ़डौंडीदल्लीराजहराबालोदविविध

संडे मेगा स्टोरी में आज रविवार 14 दिसंबर 2025 को पढ़िए दल्ली राजहरा में पली बढ़ी एन.अकांक्षा की कहानी जो आज भिलाई नगर में कत्थक की अंतर्राष्ट्रीय कलाकार हैं।

दल्ली राजहरा रविवार 14 दिसंबर 2025 भोजराम साहू 9893 765541

 एन.आकांक्षा दल्ली राजहरा में 10 वी तक की पढ़ाई डी. ए. व्ही इस्पात सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल में हुई। दल्ली राजहरा के मॉडर्न डांस एकेडमी से नृत्य की शुरुआत हुई। नृत्य सीखने की शुरुआत पर दल्ली के विजय बोरकर ने इन्हे बहुत उत्साहित किया और इनके मार्गदर्शन से आकांक्षा का कथक नृत्य सीखने का सफर शुरू हुआ। 16 साल की उम्र से ही इन्होंने अपने विद्यालय और सेक्टर के बीच अपनी पहचान बनानी शुरू कर दिए । स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (भिलाई स्टील संयंत्र ) से भी इन्हें विभिन्न पदक से सम्मानित किया गया है। 11वीं – 12वीं की पढ़ाई भिलाई के बीएसपी हाई सेकेंडरी स्कूल सेक्टर 7 से हुई। ग्रेजुएशन भिलाई महिला महाविद्यालय भिलाई नगर से प्राप्त हुआ।

कथक की रियाज ( पढ़ाई ) इन्होंने कक्षा 10 वीं से शुरू की जिसमें 2023 में ग्रेजुएशन पूरा हुआ l वहीं अब आगे की पढ़ाई भी जारी है। कथक की शिक्षा गुरु तरुण कुमार शर्मा जी से प्राप्त कर रही है l कत्थक की परीक्षा इंदिरा कला संगीत महाविद्यालय खैरागढ़ में करवाई जाती है। 

 

 अभी तक लगभग 100से भी ज्यादा कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर इन्होंने अब तक 36 नेशनल अवार्ड और 5 इंटरनेशनल अवार्ड अपने नाम किया है । पहला इंटरनेशनल कार्यक्रम उड़ीसा के कटक में आयोजित किया गया था और वहांँ इन्हें “नृत्य श्री ” अवार्ड से सम्मानित किया गया है l दूसरा इंटरनेशनल कार्यक्रम केरल के कन्नूर में आयोजित किया गया जहांँ नृत्य कला पूर्ण से सम्मानित किया गया।

इनका पहला नेशनल अवार्ड “नटवर गोपी कृष्ण “नेशनल अवार्ड 2018 में प्राप्त हुआ और आगे नंदी पुरस्कार, रजत मयूर सम्मान, भारत शास्त्रीय नृत्य सम्मान, कला तिलक, नृत्य मनी, नृत्य कला बाल निपुण, संस्कृति संध्या अवार्ड, नृत्य प्रतिभा सम्मान, नृत्य श्रेष्ठ पुरस्कार, नृत्य युवा प्रतिभा, कला परंपरा सर्वश्रेष्ठ सम्मान, नृत्य निष्ठा सम्मान, गौरी कालिका संग्राम, संस्कार भारती सम्मान, नृत्य कौशल सम्मान और हाल ही में प्रज्ञा उत्सव के एक राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में जहांँ 1000- 1100 कलाकारों ने भाग लिया जिसमें किसी एक एकल नृत्य कलाकार को नेशनल कृष्ण अवार्ड से सम्मानित किया जाता है। 2024 में यह “कृष्ण अवार्ड” आकांक्षा जी ने हासिल करके “द कृष्ण स्टार” का टाइटल अपने नाम किया। 

रस बनारस के अंतर्राष्ट्रीय स्तर प्रतिस्पर्धा में भी बनाया अपना नाम

रस बनारस “द इंटरनेशनल कल्चरल फेस्ट” एक सांस्कृतिक प्रतियोगिता जो कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काशी के अस्सी घाट, कृष्ण प्रिया केन्द्र द्वारा आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 26 से 28 दिसंबर तक आयोजित किया गया जिसमे देश विदेश के लोगों ने भाग लेकर अपनी प्रस्तुति दर्शाए। जिसमें (कथक,भरतनाट्यम, कुचीपुड़ी, मोहिनीअट्टम, ओडीसी ,सेमी क्लासिकल) यह सभी वर्ग के कलाकार मौजूद थे। इस आयोजन में भिलाई की कथक कलाकार एन आकांक्षा ने भी भाग लेकर अपनी कड़ी प्रतिस्पर्धा दी और इन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन का खिताब अपने नाम कर कृष्ण कली अंतरराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित हुई।

 

➡️ एन आकांक्षा , “नृत्य रतन सम्मान” से भी हुई सम्मानित ⬅️

नटरंग “द नेशनल फेस्टिवल ऑफ डांस” एक सांस्कृतिक प्रतियोगिता जो कि राष्ट्रीय स्तर, संगीता कला केन्द्र द्वारा आयोजित किया गया। शास्त्रियों नृत्य के सभी वर्ग के कलाकार मौजूद रहे। एन आकांक्षा ने राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताएं में बेहतरीन प्रदर्शन से दर्शकों तथा निर्णायकों का मन मोह लिया है l इस कार्यक्रम में अलग अलग राज्यों के शास्त्रीय कलाकार मौजूद थे जिसमें एन आकांक्षा जी ने कथक की ताण्डव नृत्य की प्रस्तुति देकर फिर एक बार भाग लेकर अपनी कड़ी प्रतिस्पर्धा दी और इन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन का खिताब अपने नाम कर “नृत्य रतन सम्मान” का खिताब अपने नाम किया। 

अंतरराष्ट्रीय विश्व उद्भवम उत्सव में मिला दूसरा स्थान

एन आकांक्षा को अंतरराष्ट्रीय डांस एवं म्यूजिक फेस्टिवल ग्रीन वुड पब्लिक स्कूल में 20 वा उद्भव उत्सव का आयोजन किया गया । जिसमें एस्टोनिया ऑस्ट्रेलिया इटली रूस यूरोप जैसे देशों ने भारत में आकर प्रस्तुति दी थी। सोलो डांस कथक में छत्तीसगढ़ की ओर से एक आकांक्षा ने प्रस्तुत दी जिसमें उन्होंने द्वितीय स्थान प्राप्त किया ।ऐसे कई पुरस्कारों से आकांक्षा को सम्मानित किया गया है और कई कार्यक्रम में प्रथम पुरस्कार का खिताब भी प्राप्त हुआ है।

 

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि

अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में चाहे कितनी भी मुश्किलें या चुनौतियांँ आए कभी भी उन मुश्किलों से डर कर हारना नहीं चाहिए और अपने लक्ष्य को कभी भूलना नहीं चाहिए l उन मुश्किलों का सामना करके अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते चले जाना और अगर कभी उन मुश्किलों से डर कर पीछे जाने का ख्याल भी आए तो एक बार जरूर इस बात को सोचिए कि आखिर हमने इस सफर की शुरुआत क्यों की …? और क्या हमारा सपना था ….? क्या हमारी परिस्थितियाँ थी …..? और इन्हीं चीजों को याद करके सोचना कैसे मुश्किल के दौर पर हमें कैसे लड़ना है।  एन. आकांक्षा का मानना है जो स्वयं की मदद करता है ऐसे व्यक्ति का साथ ईश्वर हर कदम पर देते हैं।

 

उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य बताया

 शास्त्रीय नृत्य की पहचान बढ़ाना। अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ संयोग एवं वैश्विक कार्यक्रमों में भाग लेकर कत्थक शास्त्रीय नृत्य का महत्व लोगों तक पहुंँचाना एवं‌ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक पहचान बनाना। आगे उन सभी कलाकारों की मदद करना जो किसी कारणवश अपने शास्त्रीय नृत्य की कला को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। भारत के अधिकांश कला रूपों की तरह, कत्थक भी गुरु-शिष्य परंपरा या शिक्षक-शिष्य परंपरा पर आधारित है। 

 

कत्थक की क्षेत्र की प्रेरणा आकांक्षा ने अपनी माता एन रवना को बतलाई हैं। जिन्होंने शास्त्रीय नृत्य एवं कत्थक नृत्य का महत्व बतलाया है। माता जी बचपन से शास्त्रीय नृत्य में बहुत रुचि रखती थी लेकिन परिवार से समर्थन प्राप्त न होने के कारण उनका शास्त्रीय नृत्य में अपनी एक पहचान बनाने का सपना अधूरा रह गया और उनका सपना पूरा करने के लिए आकांक्षा जी शास्त्रीय नृत्य को बहुत आगे बढ़ाकर अपनी एक पहचान बनाना सपना लेकर अपना रास्ता तय कर चुकी है। अपनी मांँ का सपना पूरा करना चाहती है। परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हो पर उस परिस्थितियों से लड़कर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का सिख देती है ।

उन्होंने बताया कि कथक नृत्य शुरू करने के दौरान आकांक्षा की माता ही इकलौती थी जिन्होंने परिवार के बीच में हिम्मत दिखाकर आगे बढ़ने की रास्ता दिखाया। हमें गर्व है उनकी माता पर की अपनी बेटी को उन्होंने इस काबिल बनाया आज आकांक्षा की तरक्की पर उनका पूरा परिवार उनके साथ है और अब आगे बढ़ने पर उनका पूरा सामर्थ दे रहे हैं।
आकांक्षा का मानना है अपने हर एक मौके को अपना आखिरी मौका समझकर हर बार चुनौतियों में अपना कार्य सर्वोत्तम पूर्ण से करें और हर उसे मौके से कुछ नया सीख लेकर आजीवन उसे याद रखें और जीवन में चाहे जितनी भी तरक्की या ऊंचाईयांँ हासिल हो, लेकिन अपनी सादगी और अपनी मुश्किल परिस्थितियों को कभी नहीं भूलें। 

एन आकांक्षा सेल महा रत्न कंपनी भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में बतौर निर्णायक के रूप में पहुंचती है ।उन्होंने कहा कि महारत्न कंपनी के द्वारा मुझे निर्णायक के रूप में सम्मान देना मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है ।
शुभम श्रीवास्तव की कविता एन आकांक्षा के ज़ज्बा को देख कर सटीक बैठती हैं l

 आँखों में कई ख्वाब,

दिल में कई हसरतें बाकी हैं, 

मैं कैसे थक जाऊं… 

अभी कई मंजिले बाकी हैं, 

कहाँ कुछ आसान है…!

राह में कई मुश्किलें बाकी हैं,..! 

कैसे छोड़ दूँ ….!अधूरा ये सफ़र

मेरी…कहानी के अभी कई पन्ने बाकी है।।

 

“हमारा दल्ली राजहरा_ एक निष्पक्ष समाचार चैनल”

के लिए

भोजराम साहू 

दल्ली राजहरा 

9893765541

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!