विविध
संडे मेगा स्टोरी में आज 15 मार्च को पढ़िए कुसुम सिन्हा की कहानी जिनके नेतृत्व में वनांचल ग्राम कुमुरकट्टा पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी पहचान बना रही है ।

दल्ली राजहरा
रविवार 15 मार्च 2026
भोजराम साहू 9893 765541
बालोद जिले के डौण्डी विकासखण्ड का एक छोटा सा गाँव ’’कुमुड़कट्टा’’ आज एक नई पहचान बना रहा है। इस पहचान के पीछे हाथ है कुसुम सिन्हा का, जिन्होंने अपनी मेहनत और सरकार की योजनाओं के सही तालमेल से खुद को और अपने साथ जुड़ी महिलाओं को आर्थिक आजादी दिलाई है।

कुसुम सिन्हा की सफलता की कहानी तब शुरू हुई जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ीं। उन्होंने जय माँ पहाड़ों वाली स्वसहायता समूह का गठन किया और उसकी अध्यक्ष बनीं। जहाँ पहले ग्रामीण महिलाओं के पास आय के सीमित साधन थे, वहीं इस समूह ने उन्हें हुनर और स्वरोजगार का मंच प्रदान किया।

कुसुम सिन्हा और उनके समूह की 12 महिलाओं ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने समय की मांग को समझा और अपने काम में विविधता लाई। त्यौहार के दौरान आकर्षक राखी, रंगोली और हर्बल गुलाल, लोगों की मांग के अनुरूप विभिन्न प्रकार के शुद्ध अचार और मशरूम उत्पादन तथा सिलाई-कढ़ाई से कपड़ों का निर्माण।

इन विविध गतिविधियों ने यह सुनिश्चित किया कि समूह के पास साल भर आय का स्रोत बना रहे। आज कुसुम सिन्हा गर्व के साथ खुद को लखपति दीदी कहती हैं, जो उनकी आर्थिक उन्नति का प्रमाण है।

कुसुम सिन्हा बताती हैं कि राज्य सरकार की ’’महतारी वंदन योजना’’ ने महिलाओं के आत्मविश्वास को एक नया आयाम दिया है। समूह की महिलाओं को मिलने वाली 01 हजार रुपये की मासिक राशि, छोटी लग सकती है, लेकिन ग्रामीण परिवेश में यह उनकी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने और बचत की आदत डालने में क्रांतिकारी साबित हो रही है।

कुसुम सिन्हा जय मां पहाड़ा वाली स्व सहायता समूह के नाम से सन 2017 में समूह बनाई ।उन्होंने बताया कि जनपद डौंडी के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान की जानकारी दी गई ।

जिससे उन्हें लगा कि समूह बनाकर कुछ आमदनी हो सकती है उन्होंने इसके लिए अपने गांव के महिलाओं को जागरूक किया और स्वयं आगे आकर समूह का नेतृत्व करने की ठानी । उनका मकसद था की गांव के महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना आत्म निर्भर बनाना तथा समय का सदुपयोग करना ।

उनके समिति में आज 12 सदस्य हैं ।लेकिन प्रमुख कुसुम सिन्हा ही है जिन्होंने आज अपने कार्य को एक सम्मानजनक स्थान पर पहुंचाई है ।समिति के अध्यक्ष स्वयं कुसुम सिन्हा है । सचिव लिली सिन्हा तथा अन्य सदस्य हैं रीना मंडावी मधु कुलदीप लक्ष्मी मांडवी शिमला मंडावी ओ पी सिन्हा तोमेश्वरी मंडावी उमेश्वरी मंडावी शारदा यादव और सत्या मंडावी।

➡️🔥💥 राखी 💥🔥⬅️
उन्होंने सबसे पहले राखी बनाने का काम चालू किया जिसमें वे अनाज से राखी बनाया करती है । उन्होंने राखी धान चावल मसूर दाल चना की दाल गेहूं सब्जी के बीज और बास के करिल से लगभग 75 प्रकार की राखी बना लेती है । उनकी राखी आसपास के शहरों में भेजी जाती है जिनमें डोंगरगांव राजनंदगांव अंतागढ़ भिलाई रायपुर और दुर्ग ।

कुसुम सिंह ने बताया कि राखी की मांग इतनी होती है की पूरा करना भी मुश्किल हो जाता है । समूह गर्मी के दिनों से ही राखी बनाना चालू कर देती है ताकि समय पर ज्यादा से ज्यादा मांग को पूरी की जा सके ।

➡️🔥💥 अचार बनाने का कार्य💥🔥⬅️
कुसुम सिंह ने बताया कि समूह के द्वारा सन 2018 से अचार बनाने का काम चालू किया गया है उन्होंने बताया कि वह आम नींबू लहसुन आंवला करौंदा करेला गोभी मटर लौकी और महुआ तथा बॉस के करील के भी अचार बनाती है । जिसे लोग बहुत ही पसंद करते हैं । उनकी अचार जिला पंचायत , जनपद पंचायत के माध्यम से तथा कई बार लोगों की स्वयं के मांग पर भेजी जाती है ।

👉 फिनायल निर्माण कुसुम सिन्हा ने बताया कि विभिन्न प्रकार के रसायन मंगवाकर फाइनल का भी निर्माण करती है । जिसमें रसायन के साथ फ़िल्टर पानी आदि का उपयोग करती है । रंगोली निर्माण एवं गाय के गोबर से से दिया और हवन कुंड का भी उनके द्वारा निर्माण किये जाते हैं । इनके संस्था के द्वारा मोमबत्ती के विभिन्न डिजाइन और रंग के मोमबत्ती भी बनाई जाती है हर्बल ।

➡️🔥💥गुलाल का निर्माण 💥🔥⬅️
कुसुम सिन्हा ने बतलाई कि समिति के द्वारा प्राकृतिक रूप से गुलाल का निर्माण किया जाता है ।जिसमें उन्होंने पेड़ पौधे के पत्ते फूल, भोजन में उपयोग आने वाले सब्जी भाजी का भी उपयोग करती है । परसा और सेमर के फूल , पालक चौड़ाई कांदा भाजी चुकंदर के कंद के उपयोग से गुलाल बनाती है ।

कुसुम सिन्हा कुमूरकट्टा के स्कूल में राखी तथा राजनांदगांव जिला पंचायत और बालोद शिवनी जैसी जगहों पर जाकर उन्होंने बच्चों को इस सिखाई है ।
➡️🔥💥अब तक नहीं मिला कुछ भी सम्मान🔥⬅️

सरकार की ओर से सम्मान के बारे में जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अब तक उन्हें सरकार की ओर से सम्मान नहीं मिला लेकिन विभिन्न संस्थाओं में जहां भी उनके उत्पादन गए सभी ने उनकी तारीफ की तथा उन्हें सम्मानित किया । जनपद पंचायत डौंडी कुमुर कट्टा के स्कूल में भी इन्हें प्रशस्ति पत्र दिया गया ।
➡️💥🔥 लोगों को क्या संदेश देना चाहती है 🔥💥⬅️

तब उन्होंने बताया कि मैं बस इतना कहना चाहती हूं की मन में यदि ठान ले कुछ करने की तो रास्ते कई है कई बार महिलाएं रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकती है घर में छोटे बच्चे को भी छोड़ नहीं पाती । इसके लिए एक बेहतर विकल्प है छोटे-छोटे समूह बनाकर कुछ राशि जमाकर ले और घर में रहकर ही इस तरह के राखी अचार जैसे उत्पादन तैयार कर सकते हैं । जिससे आय के साधन भी बनी रहेगी और आत्मनिर्भरता भी बनेगी ।

अंत में उन्होंने कहा कि मैं अपने जिस घर में यह उत्पादन तैयार करती हूं वह बहुत ही छोटा है मैं सरकार से निवेदन करती हूं कि यदि मुझे भवन उपलब्ध करा दे तो मैं वहां पर अन्य बहनों को भी प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर सकती हूं । यदि आपके पास भी कोई ऐसी संस्था हो या व्यक्तित्व हो जो जिनकी उपलब्धि को लोगों तक लाया जा सके तो आप अवश्य संपर्क करें ..!





