दल्ली राजहरामंगलवार 28 अप्रैल 2026भोजराम साहू 9893 765541 दल्ली राजहरा के सार्वजनिक हनुमान (घोड़ा) मंदिर समिति वार्ड नं 13 एवं समस्त वार्डवासी के तत्वाधान छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कथा वाचक श्री कामता प्रसाद शरण (ग्राम कुदेरा दादर गरियाबंद ) का तीन दिवसीय श्री राम कथा का आयोजन किया गया था जिसका कल समापन हुआ। अतिथि के रूप में रतिराम कोसमा विधायक प्रतिनिधि दल्ली राजहरा पियूष सोनी विधायक प्रतिनिधि डौंडी तोरण लाल साहू नगर पालिका अध्यक्ष गोविंदराम साहू उपाध्यक्ष तहसील साहू संघ युवराज साहू , रेखू राम साहू लक्ष्मण शर्मा उपाध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ईश्वर राव , दिनेश उर्वासा समाजसेवी ।घोड़ा मन्दिर के नीव रखने वाले मिश्री लाल सिन्हा ,रामजी ठाकुर ,जोहन निषाद, परदेशी राम सार्वा , जानकी बाई सार्वा ,दुलारा बाई को समिति द्वारा सम्मानित किया गया । संगीतमय श्री राम कथा के दूसरे दिन आज कामता प्रसाद श्री शरण ने कहा की देव हो या दानव जिसने भी भगवान से विमुख हुआ उन्हें सद्गति और स्वर्ग की प्राप्ति नहीं हुई क्योंकि जब समुद्र मंथन हुआ तब देवता गण अमृत पीकर भगवान को भूलकर मदमस्त हो गए वही ताड़कासुर जैसे दानव ने तपस्या कर स्वर्ग की प्राप्ति कर ली । कर्म और भगवान के नाम को प्राप्त करने के लिए रक्षा भी स्वर्ग की गद्दी पर बैठ गए और जो भूल गए वह निष्कासित हो गए । इस कल युग में जो भगवान को भूल गए उनका पतन हो गया और कई तो सिर्फ नाम के सहारे से दुनिया को भी पार कर गए ।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/04/VID-20260428-WA0064.mp4उन्होंने बताया कि एक समय था जब लोग अपनी परिवार और जान की रक्षा के लिए धर्म परिवर्तन करते थे । ताकि विदेशी आक्रांता आकर उन्हें मार ना दें उनके परिवार की बहू बेटी की इज्जत आबरु ना लुट ले। लेकिन समय में बदलाव आया है अब लोग धन की लालच में धर्म परिवर्तन कर रहे हैं । अब वर्षों पुरानी वैदिक सनातन धर्म दकियानुसी लग रही है । लोग धर्म ग्रंथ पढ़ना नहीं चाहते उन्हें रामायण महाभारत भगवत गीता हमारे धार्मिक ग्रंथ रामायण महाभारत भगवत गीता आदि से कोई मतलब ही नहीं है l जबकि विदेश के रहने वाले लोग हमारे धर्म ग्रंथो के मर्मज्ञ को समझ कर भारत आकर हिंदू धर्म को अपनाने में लगे हुए हैं । दूसरी तरफ युवा पीढ़ी राष्ट्र निर्माण और परिवार निर्माण को भूलकर नशा को अपनाने में लगे हैं । आज देखे तो जिस उम्र में हमारे युवा वर्ग सनातन धर्म के बारीकियां को सिखने में लगे रहते थे । देश की आजादी के लिए मंथन किया करते थे । आज वे सुबह से ही नशे के लिए राशि की कहा से व्यवस्था हो जाए इसमें लगे रहते हैं । https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/04/VID-20260428-WA0065.mp4देश को जागृत रखने ,विश्व गुरु बनाने और परिवार में सुख समृद्धि रखने के लिए युवा वर्ग को आगे आना होगा । ये युवा वर्ग ही राष्ट्र निर्माण के प्रमुख नायक हैं । नशा नाश की जड़ है भाई । जैसे बात को अब इन युवा वर्ग को समझना होगा ।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/04/VID-20260428-WA0067.mp4 आज देखते हैं कई जगह इस नशा के कारण लोग अपनी मर्यादा भूल चुके हैं बच्चे अपने बड़े मां पिता पर हाथ उठा रहे हैं कई जगह तो हत्या भी कर दे रहे हैं यह हमारे मानव समाज , धर्म के लिए बहुत ही दुखदाई पहलू है ।उन्होंने कथा में कल उन्होंने शिव पार्वती विवाह सती के रूप में पूर्ण जन्म अमृत वर्षा और समुद्र मंथन का कथा बताया ।कथा के प्रारंभ में उन्होंने ब्रह्मांड का अद्भुत और अतुलनीय विवाह का उदाहरण के संबंध में बताया उन्होंने बताया कि ब्रह्मांड में जब विवाह होता है तो दो समान विचार दो समान गुण वाले का विवाह संपन्न होता है लेकिन यहां भगवान शिव और मां पार्वती का जब विवाह होने जा रहा था तब ऋषि मुनियों , गंधर्व ने इन्हें संसार का सबसे अद्भुत विवाह कहा था कि मां पार्वती शक्ति और सृजन का पर्याय था । तो भगवान शिव विरक्ति संहार और योगी का । शिव को वैराग वैराग्य शमशान वासी विषधारी अकिंचन थे तो पार्वती राजकुमारी ऐश्वर्या की देवी थी । यह विवाह राक्षस तारकासुर का वध करने के लिए था । जहां उन्हें वरदान था कि भगवान शिव के पुत्र ही उन्हें मारेगा । तारकासुर को घमंड था कि वह कभी मृत्यु को वरन नहीं करेंगे क्योंकि सती के अग्नि में सती हो जाने पर भगवान शिव अखंड तपस्या में बैठ गए थे । कथा में उन्होंने बताया कि पर्वतराज दक्ष की पुत्री से शिव का विवाह हुआ । दक्ष ने यज्ञ में शिव का अपमान किया जिससे सती सह नहीं पाई और योग अग्नि में शरीर त्याग दिया । जिससे भगवान शिव सती की वियोग में समाधि में लीन हो गए । इधर तारकासुर राक्षस ने ब्रह्मा से वरदान पा लिया कि मेरी मृत्यु सिर्फ शिव के पुत्र से ही हो । इधर शिव बैरागी हो गए और विवाह नहीं करेंगे तो पुत्र कहां से होगा । देवताओं को चिंता हुई , उन्होंने इंद्रदेव ब्रह्मा विष्णु के पास गए तब तय हुआ की सती ही पार्वती बनकर पर्वत राज हिमालय के घर जन्म लेगी और फिर से शिव को गृहस्थ बनाएगी । उन्होंने कथा में आगे बताया कि पर्वत राज हिमालय की पत्नी मैंना के गर्भ से पार्वती का जन्म हुआ । बाल्य काल में ही पार्वती को नारद ने आकर बता दिया था कि तुम्हारे पति शिव होंगे । जिसके कारण बचपन से ही देवी पार्वती के मन में शिव बस गए थे। उन्होंने शिव को प्राप्त करने के लिए तपस्या करने लगे कहते हैं की मां पार्वती 5000 साल तक भगवान शिव का तपस्या किया गर्मी सर्दी और बारिश में खुले आसमान की नीचे तपस्या करते गए अंत में उन्होंने भोजन त्याग कर दिए । इधर भगवान शिव को जब पार्वती की तपस्या के बारे में पता चला तो उन्होंने पार्वती की परीक्षा लेने के लिए सप्त ऋषि को भेजें । सप्त ऋषि ने आकर पार्वती से कहा कि शिव शमशान वासी है सर्प बिच्छुओं जैसे विषैला जी वो से घिरे रहते हैं और तुम राजकुमारी हो उनसे विवाह कैसे करोगी। पार्वती ने कहा कि जब भी जन्म लूंगी शिव से ही विवाह करूंगी । अंत में पार्वती और शिव का विवाह की तैयारी होने लगी राजा हिमालय ने ब्रह्मा से लग्न मुहूर्त निकलवाया शिव जी के बारात जब निकली तो बारात में भूत प्रेत नाग शिव के गण आदि नाचते कूदते जा रहे थे । जब राजा हिमालय की घर के सामने बारात पहुंची पार्वती की मां मैना देख कर ही बेहोश हो गई । इस अनोखे विवाह में भगवान ब्रह्मा पुरोहित बने तो भगवान शिव की ओर से विष्णु ने समधि का भूमिका निभाया । इस विवाह के बाद कार्तिकेय का जन्म हुआ जिन्होंने तारकासुर का वध किया ।कुमारी विभा निर्मलकर के द्वारा हाथ से बनाया गया महाराज कामता प्रसाद जी का चित्र (पेंटिंग) महाराज जी को विभा निर्मलकर, प्रेरणा निर्मलकर, ईशवर निर्मलकर के हाथों भेंट किया गया। अंत में हनुमान मंदिर जिसे घोड़ा मंदिर के नाम से जाना जाता है उनके जीर्णोद्धार के लिए दानदाताओं ने आज भी अपनी दानशीलता का परिचय दिया l जहां पर मंदिर निर्माण में कल शांति साहू की ओर से ₹1100 ईश्वर लाल भूआर्य की ओर से ₹1100 रामस्वरूप देवांगन की ओर से 5101 रुपया वाइस मानिकपुरी की ओर से ₹1100 रूपलाल साहू की ओर से ₹50000 शैलेंद्र राव की ओर से ₹10000 का सहयोग प्राप्त हुआ है । अब तक प्राप्त राशि में जहां कोखन मिश्रा के द्वारा ₹10000 दिलीप जैन के द्वारा 5100 नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू के द्वारा अध्यक्ष निधि से 10 लाख रुपए निर्माण के लिए देने की बात कही । मंदिर निर्माण की शुरुआत कथा वाचक श्री कामता प्रसाद शरण के द्वारा 11000 रुपए देने से शुरुआत हो चुकी है । कार्य क्रम में मंच संचालन ईश्वर लाल भूआर्य ने किया ।आभार व्यक्त अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने किया उन्होंने कथा वाचक श्री कामता प्रसाद शरण को दल्ली राजहरा में श्री राम चरित्र मानस कथा की मर्मज्ञ संगीतमय कथा में अपनी प्रस्तुति देने के लिए धन्यवाद दिया । नगर के सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक सहयोग करने वाले दानदाताओं को भी धन्यवाद दिया गया । उन्होंने इस आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाने वाली महिला टीम को भी धन्यवाद दिया । उन्होंने कहा कि इस आयोजन में शुरू से लेकर अंत तक महिला टीम ने जिस तरह से अपनी भागीदारी निभाई है उसके लिए हम बहुत-बहुत उनका धन्यवाद करते हैं । उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए सहयोग करने वाले दानदाताओं को भी धन्यवाद दिया उन्होंने कहा कि मंदिर हम सब का है मैं चाहता हूं कि इस मंदिर के निर्माण में हर एक आदमी का सहयोग हो । हर एक आदमी का कम से कम ₹1 भी इस मंदिर के निर्माण में लगे ताकि उन्हें मंदिर को देखकर लगे कि इस के निर्माण में मेरा भी योगदान है । कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारा का आयोजन किया गया था।आयोजन में इनका सहयोग रहा । सिलोचना सिन्हा , शिव कुमारी, परमेश्वरी साहू , कुसुमलता निर्मलकर, अंजनी निर्मलकर , रेणुका निर्मलकर , अनिता सोनवानी , रेखा साहू , पेमिन साहू , गौरी पैकरा , डामिन साहू, मंजू , नीलम,हलालखोर (पुजारी),विजय सिन्हा (अध्यक्ष) रूपलाल साहू (सचिव), रामसिंग साहू (उपाध्यक्ष), रामदास मानिकपूरी (कोषाध्यक्ष) ,चेतन साहू (सह कोषाध्यक्ष) ,आर एस देवांगन (उपाध्यक्ष) ,संजय सोनवानी ईश्वर निर्मलकर ,राजेंद्र निर्मलकर ,नवीन साहू (सह सचिव), वाल सिंग साहू, रामावतार निर्मलकर ,अजय निर्मलकर ,सुनील साहू ,विनय देवांगन, देवकरण साहू ,जोहान सिन्हा ,दुज राम साहू ,प्रकाश रावनेम सिंह , लोकनाथ, कोमल साहू सोनी जी , रामू, , संदीप एवं नगर वासी। https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/04/VID-20260428-WA0068.mp4Spread the lovePost navigationदल्लीराजहरा में प्रयास आवासीय विद्यालय का संचालन होगा इसी शिक्षा सत्र में। टी ज्योति (पार्षद ) का सहारणीय कार्य, वार्ड वासियों को मिलेगी ओपन जिम की सुविधा ।