दल्ली राजहरा शुक्रवार 17 जुलाई 2026 भोजराम साहू 9893 765541
👉रथ यात्रा (गुंडिचा ) का चौथा साल शानदार ढंग से संपन्न
 👉आस्था का सरोबार ऐसा बरसात भी हो गए नतमस्तक ।
👉आर बी गहरवार (मुख्य महाप्रबंधक राजहरा खदान समूह) जयप्रकाश एवं विपिन कुमार ने निभाई छेरा पहुरा की परंपरा ।
👉 5000 से अधिक भक्तों ने लिया महाप्रसाद ।

  ➡️ 🔥🌹समाचार 🌹🔥⬅️
लौह नगरी दल्ली राजहरा में उड़ीसा के पुरी के तर्ज पर भगवान जगन्नाथ भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा की रथ यात्रा बड़ी धूमधाम से मनाया गया श्री जगन्नाथ सेवा समिति के द्वारा आयोजन किया चौथ वर्ष है l

 कल सुबह से ही बारिश ने रथ यात्रा में खलल डाली लेकिन भक्तों के हौसला के सामने बरसात भी कुछ समय रुक गए लेकिन रथ यात्रा के अंतिम पड़ाव पर पहुंचते ही बरसात ने फिर अपना रौद्र रूप दिखाकर पुरी ताकत के साथ बरसा लेकिन भगवान जगन्नाथ के भक्त भी पूरी श्रद्धा के साथ रथ को खींचने में लग रहे अंतत: गुंडिचा मंडप पहुंच कर ही भक्तों ने दम लिया l

रथ यात्रा का प्रारंभ मंदिर परिसर से भगवान जगन्नाथ बलभद्र और देवी सुभद्रा को विधि विधान से पूजा अर्चना किया गया। इसके बाद उत्कल समिति के द्वारा आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पीले साफी के साथ किया गया।

 

 स्वागत उपरांत पारंपरिक छेरा पहुरा का परंपरा लौह अयस्क खान समूह के मुख्य महाप्रबंधक आर बी गहरवार, जयप्रकाश , विपिन कुमार यस के बास्के अरुण कुमार , डी के सिंह मंगेश सेलकर एस पी सिंह साथ में उत्कल समिति के पदाधिकारी राजेंद्र बेहरा मोनू चौधरी विजय भंज टूटू मोहंती विनोद मिश्रा गगन परेरा के मौजूदगी में निभाया गया l
इसके बाद सर्वप्रथम माय सुभद्रा को मंदिर परिसर से रथ तक बाजे गाजे के साथ लाया गया इसके बाद भगवान बलभद्र और अंत में भगवान जगन्नाथ को भी इसी तरह पूरी श्रद्धा के साथ मंदिर से रथ तक जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ लाकर पूरी श्रद्धा के साथ विराजमान कराया गया । 

 

जहां नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू एवं अनु विभागीय अधिकारी सुरेश साहू के द्वारा भगवान जगन्नाथ भगवान बलभद्र एवं माई सुभद्रा का पूजा अर्चना कर नगर में सुख शांति और अमन के लिए प्रार्थना की गई ।
  पूजा अर्चना और भगवान की रथ में स्थापना के बाद के बाद सभी अतिथि एवं श्रद्धालु गण महा प्रसाद का ग्रहण करने के लिए गए ।
  महाप्रसाद में राजहरा नगर के अलावा चिखला कसा एवं अन्य जगहों से भी भक्त गण उपस्थित हुए थे । जहां सभी जात -पात , अमीर गरीब को भूलकर सभी कतार बद्ध होकर महा प्रभु भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद ग्रहण किया। महा प्रसाद की व्यवस्था बनाए रखने के लिए समिति के द्वारा महिलाओं एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग स्थान सुनिश्चित किए थे ।

 महा प्रसाद ग्रहण के बाद रथ यात्रा प्रारंभ हुआ l रथ यात्रा में शामिल होने देवलाल ठाकुर प्रदेश प्रवक्ता भाजपा, पवन साहू पूर्व जिला अध्यक्ष के सी पवार राकेश यादव जिला महामंत्री जिला मंत्री प्रेमलाल साहू विशेष तौर पर रथ यात्रा में शामिल होने के लिए दल्ली राजहरा आए हुए थे l 

 

आर बी गहरवार मुख्य ( महाप्रबंधक राजहरा खदान समूह ) ने नगर वासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ के चरणों में सादर नमन तथा भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की सभी नगर वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं । हम भगवान जगन्नाथ से यही प्रार्थना करते हैं कि यह साल सभी के लिए सुखमय और निरामय हो तथा माइंस बिरादरी के लिए भी सुखमय हो इन्हीं शुभकामनाओं के साथ रथ यात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं..!
उन्होंने भगवान जगन्नाथ भगवान बलभद्र और बलभद्र और मैं सुभद्रा का पूजा अर्चना कर शहर के साथ देश और प्रदेश के जनता के सुख समृद्धि और विकास के लिए प्रार्थना किया ।

 

 नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू , बीएसपी अधिकारी आर बी गहरवार, जयप्रकाश ,राजहरा महिला समाज अध्यक्ष रेखा गहरवार, उपाध्याय शीला जय प्रकाश मिनोती बास्के उत्कल समिति के सदस्य, भगवान जगन्नाथ सेवा समिति के सदस्यों के साथ हज़ारों के संख्या में बच्चे बड़े एवं बुजुर्ग सभी वर्ग के शहर वासी भगवान जगन्नाथ के रथ का रस्सा खींचने में शामिल हुए l 

 

कल इस रथ यात्रा में पूरा दल्ली राजहरा भक्तिमय हो गया l रथ यात्रा के दौरान विभिन्न समाजसेवियों के द्वारा भक्तों के लिए शरबत एवं फ्रूटी का इंतजाम किये थे । 

 

 रथ के आगे लोगों की रस्सी खींचने की होड़ आग़ा देव, कांकेर से आये बस्तरिया राउत नाचा के साथ नृत्य करते लोग डीजे में नृत्य करते लोग बहुत आकर्षक लग रहे थे l लोगों के भीड़ को देखकर ऐसा लग रहा था कि यह रथ यात्रा एक क्षेत्र विशेष का ही नहीं बल्कि पूरा लौह नगरी दल्ली राजहरा का आयोजन है।पूरा शहर महाप्रभु जगन्नाथ के रथ यात्रा का आनंद ले रहे थे l 

 उत्कल समिति एवं श्री जगन्नाथ सेवा समिति दल्ली राजहरा के द्वारा महाप्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा की तैयारी पिछले कई दिनों से बड़े जोर शोर से की जा रही थी l

 

 रथ यात्रा जगन्नाथ मंदिर के सामने से जैन भवन चौक से माइन्स ऑफिस चौक से पेट्रोल पंप से गुप्ता चौक होते हुए शहीद शंकर गुहा नियोगी चौक से बीएसपी हॉस्पिटल चौक से राम मंदिर चौक होते हुए गुंडीचा मंडप भगवान जगन्नाथ मंदिर स्थल पहुंचा l
  स्वागत द्वार पर भगवान जगन्नाथ भगवान बलभद्र और माई सुभद्रा का विधि विधान से पारंपरिक रूप से पूजा अर्चना कर आसन ग्रहण कराया गया । जहां पर समिति के सदस्यों एवं राजहरा के नागरिकों के द्वारा 9 दिन तक महाप्रभु जगन्नाथ भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा अर्चना किया जाएगा l

रथ यात्रा के आयोजन में पुलिस प्रशासन का भी बहुत योगदान रहा जहां नगर पुलिस अधीक्षक विकास पाटले के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन के द्वारा पूरी सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाई गई।जिसके कारण रथ यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ ।

 जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष मोनू चौधरी ने जगन्नाथ सेवा समिति के ओर से दल्ली राजहरा के समस्त नागरिकों का , समिति के सदस्यों , जन प्रतिनिधियों , विभिन्न समाज के सदस्यों को भगवान जगन्नाथ के रथ यात्रा में सम्मिलित होने और सहयोग करने के लिए धन्यवाद दिया है l तथा उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन का भी हम लोग बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं कि उनके सहयोग से महाप्रभु जगन्नाथ के रथ यात्रा शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक ढंग से पूर्ण हुआ l 

आगे भी मैं सभी से इसी तरह सहयोग की आशा करता हूं l उन्होंने कहा कि आगामी 9 दिनों तक प्रस्तावित मंदिर प्रांगण में विराजित भगवान जगन्नाथ भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन करने अवश्य आए l भगवान जगन्नाथ जगत के नाथ हैं वे हर किसी की मनोकामना अवश्य पूरा करते हैं l 

आज इस महा आयोजन में उत्कल समिति की ओर से मोनू चौधरी राजेंद्र बेहरा विजय भंज राजकिशोर मोहंती  राजेन्द्र राठी, तोरण लाल साहू, गगन सर, एस. के. बास्के, पवन गंगबोइर, अशोक लोहिया, शैलेन्द्र प्रसाद सिंग, सुनिल जयसवाल, सरजीत सिंह, विजय देवांगन, कुबेर नायक, चन्द्रशेखर (चन्दु), संजय महांती, विजय भंज, मृत्युंजय सुतार, दशरत महंत, रामा रेड्डी, मोहन नायक, प्रशांत दलई, प्रमोद नायक, दामोदर राव, अशोक बेहरा, शरद साहू, शेखर रेड्डी, एम. ब्रम्हैय्या, गौतम माइतो, तापस पडया, प्रदीप बाग, सूरज विभार, राजेन्द्र बेहरा, सपन बेरा, दीपक पटनायक, संजय राउत, टी. कांताराव, राजकुमार मुंडा, सुरेश जेना, रविंद्र जेना, राजेन्द्र महंती, धर्मानंद भट्ट महाराज, भगवान बिसाई, विक्रम बेहरा, निर्मलचंद मांझी, प्रशांत साहू, प्रमोद चौधरी, राजकिशोर महांती, दिवाकर बाग, मंथन नायक, दशरथ नायक, मुकेश नायक, सोनू राकेश नायक जी, रिपू नायक, पिंटू महंती, जय प्रकाश बिसोई, विनोद मिश्रा, कैलाश पंडा , मातृ शक्ति पुरोबी वर्मा, बबीता जेना, रीना पडया, भारती रमना, नीरजा रेड्डी, माधुरी रथ, सविता वर्मा, शिल्पी राय, सविता चौधरी, नमिता महंती, अनुपमा बेहरा, माधवी लता, प्रतिभा भंज, सुनीता राउत, मामाली सुथार, सुज्ञानी जेना, ममता पटेल, श्रीसूर्या, निर्मला राव,  वीणा साहू गायत्री, बता रजक, द्रौपदी साहू सुनिता भांडेकर, इंदुलता सिन्हा, किरण कुमरे, लक्ष्मी पिल्लै, लक्ष्मी बाग, सुजाता हरपाल, पूजा नायक, दशरी नायक, मानिता पोटाइ, सुलता बिसोई, किरण बेहरा एवं पूरे जनमानस को विशेष सहयोग रहा l
🚩🔥रथ यात्रा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी🔥🚩

 

रथ यात्रा हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी शहर में मुख्य रूप से आयोजित की जाती है। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण), उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों में सवार होकर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं। 

इस धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के पीछे कई पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियां व मान्यताएं जुड़ी हैं:

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा ने द्वारका नगरी से बाहर घूमने और नगर के दर्शन करने की इच्छा व्यक्त की। उनकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए भगवान कृष्ण और बलराम जी ने उन्हें एक विशाल रथ पर बैठाया और नगर भ्रमण कराया। इसी घटना की स्मृति में आज भी रथ यात्रा निकाली जाती है।

गुंडिचा मंदिर को भगवान की मौसी का घर माना जाता है। माना जाता है कि राजा इंद्रद्युम्न और रानी गुंडिचा की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान जगन्नाथ हर साल सात दिनों के लिए अपनी मौसी के घर जाते हैं। इस दौरान वहां भगवान को बहुत प्यार, आदर और स्वादिष्ट व्यंजन (जैसे पोड़ा पीठा) अर्पित किए जाते हैं।

🚩🔥कथा जो प्रचलित है🔥🚩 
राजा इंद्रद्युम्न का सपनाः पुरी के राजा इंद्रद्युम्न को भगवान विष्णु ने स्वप्न में दर्शन दिए और बताया कि उनकी मूर्ति समुद्र में बहकर आने वाले एक पवित्र लकड़ी के लट्ठे से बनाई जाएगी।

 जब वह पवित्र लकड़ी मिली, तो मूर्तिकार के रूप में स्वयं देव शिल्पी विश्वकर्मा एक वृद्ध बढ़ई (कारपेंटर) के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने राजा के सामने शर्त रखी कि वे एक बंद कमरे में मूर्ति का निर्माण करेंगे और कोई भी दरवाजा नहीं खोलेगा।

 

 कई दिनों तक कमरे से कोई आवाज न आने पर राजा की रानी गुंडिचा (या राजा स्वयं) घबरा गईं। उन्हें लगा कि शायद बढ़ई की मृत्यु हो गई है। उत्सुकतावश उन्होंने कमरे का दरवाजा खोल दिया।शर्त टूटने के कारण विश्वकर्मा जी तुरंत अंतर्ध्यान (गायब) हो गए और तीनों देवों की मूर्तियां अधूरी (हाथ और पैरों के बिना) ही रह गईं।

 माना जाता है कि यह कोई त्रुटि या कमी नहीं है, बल्कि ईश्वर का यह रूप यह संदेश देता है कि भगवान को किसी शारीरिक अंग की आवश्यकता नहीं है। वे बिना हाथों के भी संसार की रक्षा करते हैं और बिना पैरों के सर्वव्यापी हैं।

 

 

 

 

 

रिपोर्ट :– “हमारा दल्ली राजहरा निष्पक्ष समाचार चैनल” 
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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