दल्ली राजहरा शुक्रवार 11 सितम्बर 2026 भोजराम साहू 9893 765541

 

 

छत्तीसगढ़िया संस्कृति और भाईचारे की दिखी झलक, सुवा नृत्य और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने मोहा मन

 छत्तीसगढ़ समन्वय समिति के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ भवन दल्ली राजहरा में छत्तीसगढ़िया बहनों का पारंपरिक त्योहार तीज पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में 200 से अधिक महिलाओं को साड़ी भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर पंचायत चिखलाकसा की अध्यक्ष श्रीमती कुंती देवांगन उपस्थित थीं। मंचस्थ अतिथि के रूप में नगर पालिका परिषद दल्लीराजहरा के अध्यक्ष तोरण लाल साहू, रामदास मानिकपुरी, काशी निषाद, छगन साहू, घनश्याम पारकर, रूपलाल साहू एवं मोहन लाल साहू मौजूद थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार छत्तीसगढ़ महतारी के तैल चित्र की पूजा-अर्चना के साथ किया गया।

24 समाजों को जोड़ने का एकमात्र उदाहरण है समन्वय समिति – रामदास मानिकपुरी

स्वागत भाषण में समिति के अध्यक्ष रामदास मानिकपुरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 24 समाजों को एकत्र कर जात-पात और ऊंच-नीच के भेद को समाप्त करने और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देने के लिए समिति का गठन किया गया है, जो पूरे छत्तीसगढ़ में एकमात्र उदाहरण दल्लीराजहरा में है।
उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” कहलाने वाले हमारा छत्तीसगढ़िया समाज में एकता और सामंजस्य नहीं होने के कारण अपने ही प्रदेश में पराए होते जा रहे हैं। दूसरे प्रदेशों के लोग यहां आकर बड़े-बड़े सामाजिक भवन बना रहे हैं और एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं, जबकि हम सहयोग तो दूर एक-दूसरे के पास भी नहीं आ पाते। हमें अपनी सोच बदलकर छत्तीसगढ़ी संस्कृति और समाज को मजबूत करने के लिए एक होना पड़ेगा।

संस्कृति को जीवित रखना है तो बच्चों को बताना होगा – कुंती देवांगन

मुख्य अतिथि कुंती देवांगन ने सभी बहनों को तीजा तिहार की बधाई देते हुए कहा कि आयोजन समिति ने बहनों के लिए सोचा यह बहुत खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहार और संस्कृति को हम भूलते जा रहे हैं। जैसे हमारे पूर्वजों ने हमें अपनी संस्कृति के बारे में बताया, वैसे ही हमें भी अपने बच्चों को छत्तीसगढ़ की संस्कृति, वेशभूषा और तीज-त्योहारों के बारे में बताना होगा, तभी हमारी संस्कृति जीवित रहेगी। उन्होंने कहा कि हमारे पुरखा कहते थे बेटियां ब्राह्मण के समान होती हैं, जैसे हम ब्राह्मण का सम्मान करते हैं वैसे ही बेटियों का भी सम्मान करना चाहिए।
बेटों को भी पढ़ाइए, मोबाइल से दूर रखिए – तोरण लाल साहू

नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज परिस्थितियां विपरीत हैं। बेटियां पढ़ाई में आगे बढ़ रही हैं और बेटे पिछड़ रहे हैं। समाज को आगे बढ़ाने के लिए बेटों को भी पढ़ाना जरूरी है, खासकर बच्चों को मोबाइल से दूर रखें। उन्होंने कहा कि अपने-अपने समाज की कुलदेवी-देवताओं, मां कर्मा, मां दंतेश्वरी, भक्त गुहा निषाद राज, संत कबीर दास, मां परमेश्वरी, गुरु घासीदास, बूढ़ा देव की जानकारी और उनका इतिहास की जानकारी बच्चों को अवश्य दें।
प्रतियोगिताओं ने बांधा समा

तीज मिलन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया।

सोलह श्रृंगार प्रतियोगिता:

छत्तीसगढ़ी वेशभूषा के 16 प्रकारों को 2 मिनट में धारण करना था। इसमें प्रथम अनीता गंगराले, द्वितीय उषा साहू एवं तृतीय सोनम भूआर्य रहीं।
व्यंजन प्रतियोगिता:
प्रथम सुनीता नेताम, द्वितीय उषा साहू एवं तृतीय सरस्वती सार्वा रहीं, सांत्वना पुरस्कार अनीता गंगराले को मिला।

फुगड़ी प्रतियोगिता:
प्रथम आरती निषाद, द्वितीय उषा मेश्राम एवं तृतीय गीता निषाद रहीं।

 

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण महिलाओं द्वारा सुवा गीत पर प्रस्तुत सामूहिक नृत्य रहा, जिसमें मुख्य अतिथि कुंती देवांगन सहित अन्य अतिथियों ने भी हिस्सा लिया।
प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम बना आकर्षण का केंद्र

 

कार्यक्रम में विशेष समा तब बंधा जब निषाद समाज के अध्यक्ष घनश्याम पारकर द्वारा प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति, इतिहास और परंपरा से जुड़े रोचक प्रश्न पूछे और सही जवाब देने वाली महिलाओं को मौके पर ही पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

प्रश्नों में पूछा गया कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना कब हुई थी? तीजा उपवास क्यों रखा जाता है? पंडवानी की विश्व प्रसिद्ध गायिका पद्म विभूषण एवं पद्मश्री स्वर्गीय तीजन बाई पंडवानी गायन के समय गले में गोली की तरह जो माला पहनती थीं, उसका नाम क्या है? तीजा उपवास का महत्व क्या है? तीजा उपवास से पहले करेले की सब्जी विशेष रूप से क्यों बनाई जाती है, इसका वैज्ञानिक कारण बताएं? और “कल जरूर आना” को छत्तीसगढ़ी में कैसे बोलेंगे?

इन ज्ञानवर्धक प्रश्नों का महिलाओं ने बढ़-चढ़कर उत्साह के साथ जवाब दिया, जिससे पूरे पंडाल में हर्ष और ज्ञान का अनूठा संगम देखने को मिला।

 चंपा साहू द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी गीत की सभी ने सराहना की।

कार्यक्रम का मंच संचालन कोमल पटेल एवं देवनतीन पारकर ने संयुक्त रूप से किया तथा आभार प्रदर्शन विद्या रावटे ने किया।

इस अवसर पर मीना दास मानिकपुरी, चंपा साहू, ममता पटेल, पूर्णिमा राठौर सहित छत्तीसगढ़ समन्वय समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में महिलाएं तथा समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

 

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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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