दल्ली राजहरा शनिवार 12 सितम्बर 2026 भोजराम साहू 9893 765541 दिल्ली के जंतर-मंतर की तरह तब भी चली थी पैलेट गन – छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा और छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ दल्ली राजहरा द्वारा बीएनसी मिल्स (बंगाल नागपुर कॉटन मिल्स) राजनांदगांव के ऐतिहासिक मजदूर आंदोलन में हुए गोलीकांड की 42 वीं बरसी श्रद्धा के साथ मनाई गई। शहीद दिवस कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के राजनांदगांव स्थित कार्यालय में किया गया। इस अवसर पर कपड़ा मिल मजदूर संघ के अध्यक्ष प्रेमनारायण वर्मा, बसंत साहू, रमाकांत, छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके, महामंत्री रामचरण नेताम, अमर सिंह, नासिक, बिहारी लाल ठाकुर, मोहित, परमेश्वर, महिला मुक्ति मोर्चा से सावित्री जगनायक, जोहतरीन बाई, सुनीता तथा रायपुर से सुखलाल, मंथीर, गणेश सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने शहीद साथियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।रैली पर हमला, फिर पुलिस ने बरसाईं गोलियां। वक्ताओं ने बताया कि 11 सितम्बर 1984 को बीएनसी मिल के सामने से मजदूरों की विशाल रैली गुजर रही थी। उसी दौरान जुलूस के आखिरी छोर पर गुंडों द्वारा घातक हथियारों से हमला कर साथी मेहतरू देवांगन की हत्या कर दी गई और कई मजदूरों को लहूलुहान कर दिया गया।अगले दिन 12 सितम्बर 1984 को दोपहर में पुलिस ने बर्बर गोली चालन किया, जिसमें 12 वर्षीय बालक राधे ठेठवार, घनाराम देवांगन और जगत सतनामी शहीद हो गए। इस प्रकार इस आंदोलन में चार मजदूर साथी शहीद हुए थे। दिल्ली जैसी पैलेट गन तब भी चली थी । आंदोलन की सबसे दर्दनाक घटना का जिक्र करते हुए बताया गया कि 12 सितम्बर की सुबह नौजवान साथी सुरेन्द्र पटेल पर पुलिस ने पैलेट गन से वार किया था, जिससे उनके पूरे शरीर में दर्जनों छर्रे धंस गए थे। उन्हें लहूलुहान हालत में अस्पताल ले जाया गया और दूसरे दिन उनकी मौत की खबर तक फैल गई थी, परंतु वे बच गए। दल्ली-राजहरा के शहीद अस्पताल में ऑपरेशन कर कई छर्रे निकाले गए, लेकिन कुछ छर्रे जान को खतरा होने के कारण नहीं निकाले जा सके और वे उनके जीवन भर शरीर में ही रहे। ठीक इसी तरह की पैलेट गन का इस्तेमाल हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए आंदोलन में भी हुआ था।क्या था बीएनसी मिल आंदोलन.? – इतिहास के पन्नों से बीएनसी मिल राजनांदगांव की लड़ाई छत्तीसगढ़ के मजदूर इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक थी। इस आंदोलन को खड़ा करने वाले प्रमुख व्यक्तित्व थे – ठाकुर प्यारेलाल सिंह, कामरेड एस. के. रूईकर और मजदूर नेता शंकर गुहा नियोगी।शंकर गुहा नियोगी 19 साल की उम्र में भिलाई स्टील प्लांट में काम करने आए थे और बाद में 1977 में उन्होंने छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ (CMSS) और 1979 में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा का गठन किया था। उन्होंने मजदूरों के साथ-साथ आदिवासी, पर्यावरण और महिला अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी। भिलाई और राजनांदगांव क्षेत्र के मजदूर न्यूनतम वेतन और निकाले गए श्रमिकों को वापस लेने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इसी संघर्ष के दौरान 1984 में बीएनसी मिल में यह गोलीकांड हुआ। बाद में 1991 में भिलाई में भी 17 मजदूर पुलिस गोलीकांड में शहीद हुए थे और 28 सितम्बर 1991 को शंकर गुहा नियोगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।Spread the lovePost navigationछत्तीसगढ़ की केंद्रीय OBC सूची में ‘रावत’ जाति को शामिल करने की मांग, मुख्यमंत्री और पिछड़ा वर्ग आयोग को सौंपा ज्ञापन