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“शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी संग्रहालय बनाने में हुए करोड़ों के घोटाला की निष्पक्ष जांच हो ।” :– छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा

दल्ली राजहरा रविवार 07 दिसम्बर 2025
भोजराम साहू 9893 765541

छत्तीसगढ़ के राजधानी में सरकार के जिम्मेदार लोगों का कारनामों का एक और नायाब मामला सामने आया है,जिसमें आदिवासी संग्रहालय रायपुर के नाम से करोड़ों का घोटाला हुआ है । जिसको 15 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से आदिवासी शहीदों के नाम से संग्रहालय बनाने की घोषणा की थी 2017-18 में केंद्र ने 11 राज्यों में संग्रहालय बनाने के लिए चुनाव किया जिसमें छत्तीसगढ़ में भी शहीद हुए वीर नारायण सिंह पर आधारित संग्रहालय रायपुर,का नाम भी शामिल हुआ था इसके लिए केंद्र ने 15 करोड रुपए दिए थे । इसमें राज्य अंश 10.66 करोड रुपए था ,जिसका टेंडर निकाला गया । निर्माण और मूर्ति का टेंडर सिंगल टेंडर में हुआ था जबकि दोनों का अलग-अलग काम है, तो टेंडर भी अलग-अलग निकलना था । छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर ने कहा कि जब सरकार के जिम्मेदार लोगों ने दो कार्यों के लिए एक ही टेंडर निकला तभी गड़बड़ी /और धांधली की शुरुआत हो चुकी थी । इसमें स्पष्ट नजर आ रहा है संग्रहालय के भवन निर्माण और मूर्ति कला दो अलग अलग कार्य है और दोनों का एक के बाद एक अलग अलग टेंडर होना था । पूरा कार्य 25.66 करोड़ में पूरा होना था, लेकिन जे पी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भवन निर्माण में 6 गैलरी की जगह पर जानबूझ कर 16 गैलरी बना दिया जिससे संग्रहालय का निर्माण कार्य का खर्च और बड़ जाए, और इसी बहाने जो कार्य 25.66 में पूरा होना था उसके लिए और अतिरिक्त राशि 25.34 करोड़ बिना जांच पड़ताल के कंपनी को राशि दे दिया गया । जो संग्रहालय 25.66 में बनना था उसकी राशि अब 51करोड़ रुपए हो गया, जिस गैलरी में 600 मूर्तियां लगानी थी उन मूर्तियों की संख्या बढ़ाकर 700 से अधिक मूर्तियां जे पी कंस्ट्रक्शन बना दिया।

➡️🔥💥केंद्रीय जांच एजेंसी भी सवालों के घेरे में💥🔥⬅️
केंद्र सरकार ने संग्रहालय निर्माण के देखरेख की जिम्मेदारी के लिए जांच एजेंसी को सौंपा था ,लेकिन जब संग्रहालय निर्माण का कार्य चल रहा था तब एक बार भी जांच हेतु टीम नहीं पहुंची , जब 1 नवंबर 2025 को पीएम मोदी द्वारा इसकी उद्धघाटन करने की सूचना मिली तब जांच एजेंसी तत्काल संग्रहालय के जांच हेतु रायपुर पहुंची । तब उन्हें संग्रहालय के निर्माण में गड़बड़ी की जानकारी मिली और उन्होने 700 से अधिक बनी मूर्तियों में से 100 को बाहर निकलवाया और केवल 650 मूर्तियों को संग्रहालय में स्थान दिया, जांच एजेंसी को जब इस गड़बड़ी का पता चला तब उन्हें तत्काल कंस्ट्रक्शन कंपनी के ऐसे अनाप सनाप कार्यों की तत्काल गड़बड़ी की जांच कर उस पर जुर्माना लगाया चाहिए था, लेकिन जांच एजेंसी ने ऐसा कुछ भी नहीं किया इससे साफ जाहिर होता है जांच एजेंसी और जे पी कंस्ट्रक्शन कंपनी की मिलीभगत है।
छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके ने सरकार के ऐसे अनिमिताओ भरे कार्यों की कड़ी नींद कर कहा कि आदिवासी संग्रहालय के नाम पर ही धांधली सरकार के नाक के नीचे से हो और सरकार को इसकी जानकारी ना हो ऐसा नहीं हो सकता अगर सरकार इसमें शामिल नहीं है तो इसकी जांच कर इस मामले की सच्चाई सामने लाए । अगर सरकार इसकी सच्चाई सामने नहीं ला पाती तो आम जनता समझदार है इसके पीछे किसका हाथ ये पता चल जाएगा, जो काम 25 करोड़ में होना उसके सरकार ने 51 करोड़ दे दिया । 
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा और छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ प्रदेश की सरकार से ये मांग करता है कि इस धांधली और घोटाले कि निष्पक्ष जांच कर इस इसमें शामिल मंत्री, अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही किया जाए।







