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“भगवान से आप पुत्र की तरह प्रेम करिए यह भक्ति का सर्वश्रेष्ठ रूप है जिससे भगवान के हृदय पिघल जाते हैं और वह प्रेम को ग्रहण करने स्वयं दौड़े चले आते हैं ।”:– पंडित विजय शर्मा

दल्ली राजहरा

शनिवार 17 जनवरी 2026

भोज राम साहू 9893765541

 

दल्ली राजहरा के वार्ड क्रमांक 25 अनिल प्रिंटिंग प्रेस के ऊपर रेलवे कॉलोनी पानी टंकी के पास श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन दिनाँक 10 जनवरी 2026 से 18 जनवरी 2026 तक मोहल्ला वासीयो के द्वारा शानदार चौथा वर्ष में किया जा रहा है। श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के भागवताचार्य पंडित पं. विजय शर्मा ( दल्ली राजहरा ) श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह में कल कथा की छठवें दिन कंश उद्धार और रुक्मणि मंगल की कथा बताया ।

 कंस मोक्ष की कथा में कल बताया कि कंस मथुरा का राजा थे जो अपने पिता उग्रसेन को गद्दी से उतारकर खुद राजा बन गया था। वह बहुत ही क्रूर और अधर्मी था। वह अपनी बहन देवकी से बहुत प्यार करता था उसने बहन देवकी की शादी वसुदेव से की थी । बहन देवकी से उसे इतना प्यार था कि उन्हें विदा करने के लिए वह सारथी बन गए और रथ को स्वयं हांकते हुए बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को ससुराल छोड़ने गए । जब देवकी को छोड़ने जा रहे थे तब आकाशवाणी हुई कि हे पापी कंस ! देवकी के आठवां पुत्र ही तुम्हारा काल होगा वही तुम्हारा वध करेगा ।

कहां कंस देवकी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को ससुराल छोड़ने जा रहा था एक पल की आकाशवाणी ने कंस की दशा और दिशा ही बदल दी। बहन के वात्सल्य प्रेम के बदले मौत के डरने ने उन्हें फिर से क्रूर कंस बना दिया और बहन को मारने के लिए तलवार उठा लिया । वासुदेव ने गिड़गिड़ा कर अपनी पत्नी की जीवन की भीख इस शर्त पर मांगी की जन्म होते ही उनके सभी संतानों को कंस को सौंप दी जाएगी । 

तब कंस ने देवकी और वासुदेव को जेल में डाल दिया और उनके छह बच्चों को मार डाला। लेकिन सातवें बच्चे को बचाने के लिए वसुदेव ने उसे गोकुल में नंदबाबा के घर पहुंचा दिया, जो बलराम थे। फिर आठवें बच्चे कृष्ण का जन्म हुआ, जिन्हें वासुदेव गोकुल में यशोदा मैया के पास छोड़ आए। कंस ने कृष्ण को मारने के लिए कई प्रयास किया लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें मारते गए। यहां तक की कंस ने अपने बहन पुतना को भी भेजा उसका भी वध भगवान श्री कृष्णा ने किया ।
अंत में भगवान श्री कृष्ण ने कंस का वध कर अपने जन्म देने वाले मां और पिता वासुदेव को उनके कैद से मुक्त कराया और मथुरा का राज्य फिर से अपने नाना महाराज उग्रसेन को सौंपा।

कथा के मध्य भागवताचार्य पंडित विजय शर्मा ने बताया कि भगवान से निस्वार्थ प्रेम करना चाहिए । जिस तरह गोपिया और बृजवासी किया करते थे।भगवान से जब आप निस्वार्थ प्रेम करोगे तो वह आपके और ज्यादा निकट आएगी । भगवान हमें प्रेम की कसौटी में कसता है जिस तरह नन्हे बालक पालने में लेटा रहता है तो वह भूखा नहीं रहने के बावजूद जानबूझकर रोता है। रोने की आवाज सुनकर जब मां खींची चली आती है तो वह उन्हें देखकर मुस्कुराता है। भागवत कथा में भक्त और भगवान को जोड़ने का कई भाव बताए हैं उन्होंने बताया कि लेकिन वात्सल्य (संतान और माता का प्रेम ) को सर्वश्रेष्ठ और सरल माना गया है यह प्रेम भक्त को सांसारिक बंधनों से मुक्त कराता है और उसे भगवान के करीब लाता है ।

 अपने भगवान अपने आराध्य से मां , पिता से पुत्र और भाई-बहन की तरह प्रेम करना चाहिए जिससे हमें अपने प्रेम में प्रगाढ़ता आएगी और हम उनके अत्यधिक करीब होते जाएंगे । क्योंकि यह प्रेम निस्वार्थ होता है यही भक्ति का सर्वश्रेष्ट रूप है जिसे भगवान के हृदय पिघल जाते हैं और वह प्रेम को ग्रहण करने स्वयं दौड़े चले आते हैं ।क्योंकि निस्वार्थ प्रेम ही ऐसा माध्यम है जिसे भगवान से भक्तों को जोड़ता है । आप भगवान से मांगिए मत उन्हें मालूम है कि आपको किस चीज की आवश्यकता है और आपको क्या कब और कैसे देना है ।

महाराज जी ने उद्धव और गोपियों के बारे में बताया कि भगवान श्री कृष्ण के मथुरा जाने के बाद उनकी दशा बहुत ही दयनीय हो गई थी। कृष्ण के जाने के बाद गोपियों और वृंदावन के लोगों को बहुत ही दुखी हुए । वे कृष्ण के बिना नहीं रह पा रहे थे । मानव तो मानव यहां तक की पेड़ पौधे पशु पक्षी सब उनके वियोग में शोकग्रस्त थे तथा गाय बछड़े घास चरना छोड़ दिए थे । गोपियों और उनके साथी खाना पीना छोड़ दिए हर तरफ उन्हें कृष्ण ही नजर आते थे कृष्ण के वियोग में लोग अत्यंत व्याकुल हो गए थे । जैसा गोकुल वासियों का हाल था वैसे ही भगवान कृष्ण का भी हालत था ।
भगवान कृष्ण ने अपने मित्र उद्धव को वृंदावन भेजा था, जिन्होंने गोपियों को कृष्ण का संदेश सुनाया था। उद्धव ने गोपियों को बताया कि कृष्ण मथुरा में राजा बन गए हैं और वे वृंदावन नहीं आ सकते हैं । लेकिन नंद बाबा मां यशोदा गोपियों और गोकुलवासी अपने नटखट कृष्णा को देखने कि उनकी जिज्ञासा ने उन्हें और उनके करीब ला दिया । भगवान कृष्ण ने जहां-जहां उनके साथ लीलाएं की उस जगह जाकर उन्हें याद करके आंसू बहाते थे इतने प्रेम में पागल हो गए थे । ऐसा लगता कि सचमुच भगवान कृष्ण उनके बीच आ गए हो । 

 भागवतचार्य पंडित विजय शर्मा ने कथा का मार्मिक चित्रण इस तरह से किया कि कथा पंडाल में उपस्थित दर्शकों के आंखों में भी आंसू आ गए ऐसा लगा कि सचमुच यह कथा पंडाल ना होकर नंद बाबा की ग्राम गोकुल हो और भगवान श्री कृष्णा सचमुच में मथुरा चले गए हो । और उनके प्रेम में व्याकुल कथा में बैठे लोग सचमुच में आंसू बहा रहे हो। अंत में उन्होंने रुक्मणी विवाह की कथा बताया।

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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