
दल्ली राजहरा शुक्रवार 13 फरवरी 2026 भोजराम साहू 9893 765541
केंद्र सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जा रहे चार श्रम कानूनों के विरोध में पूरे देश हुई राष्ट्रव्यापी हड़ताल के साथ दल्ली राजहरा की लौह अयस्क खदानों में भी कल 12 फरवरी को सीटू के नेतृत्व में जबरदस्त हड़ताल हुई ।

दल्ली राजहरा में सात यूनियन होने के बावजूद सिर्फ सीटू ने ही इस हड़ताल का बीड़ा उठाया। अन्य सभी यूनियनों ने हड़ताल से किनारा कर लिया। यहां तक कि राष्ट्रीय स्तर पर हड़ताल में शामिल इंटक, व एटक यूनियन ने भी हड़ताल का समर्थन नहीं किया । फिर भी सीटू ने अकेले ही खदान के सभी श्रमिकों के बीच जाकर इस हड़ताल के महत्व का जमकर प्रचार किया ।

नये श्रम कानूनों के मजदूर विरोधी प्रावधानों से सबको अवगत कराते हुए हड़ताल पर रहने की अपील की, जिसका अच्छा प्रतिसाद मिला, और खदान के बहुत से मजदूर काम बंद हड़ताल में शामिल रहे।जिससे खदानों मे उत्पादन प्रभावित हुआ। सुबह 5 बजे से ही सीटू के साथियों ने मोर्चा संभालते हुए सभी खदानों में नाका बंदी कर दी।

हर खदान का गेट एक धरना स्थल बना दिया गया था। इस माहौल से प्रभावित श्रमिकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अधिकांश श्रमिक ड्यूटी पर नहीं गये। लौह अयस्क समूह की राजहरा खदान में लगभग 60% उत्खनन कार्य नहीं हो सका।

महामाया, दुलकी, और कलवर नागुर खदानों में 7 घंटे तक बिल्कुल उत्पादन नहीं हुआ। इसी तरह दल्ली खदान के उत्पादन में भी कमी रिकार्ड की गई। इसके साथ ही उत्पादन में सहायक मेंटेनेंस, केंटीन, सुरक्षा गार्ड, इत्यादि सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।

इसी दौरान सुबह 11बजे हडताली साथियों ने पूरे शहर में बाइक रैली निकाली। इस रैली मे नये श्रम कानूनों रद्द करने के नारों से शहर गूंज उठा।

हड़ताल के साथ ही शाम 4 बजे माइंस आफिस के सामने विशाल आमसभा का आयोजन भी किया गया। इस आम सभा को संबोधित करते हुए सीटू अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि- आज की हड़ताल पिछली सभी हड़तालों से बिल्कुल अलग है।आज की हड़ताल में हम वेतन भत्ता बढाने की मांग नहीं कर रहे हैं।

बल्कि वर्षों पहले अपने संघर्षों से हासिल किए श्रमिक अधिकारों, को नये लेबर कोड के जरिये समाप्त किये जाने के खिलाफ हम आज सड़कों पर हैं। मजदूरों के पुराने 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर 21 नवम्बर 2025 को अधिसूचित किए गए चार लेबर कोड पूरी तरह मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं।

इन कानूनों को बनाते समय , मजदूर प्रतिनिधियों से कोई चर्चा व विमर्श नहीं किया गया। केवल मालिक वर्ग के मुनाफे को बढाने के लिए मजदूरों के शोषण की खुली छूट इस कानून में दे दी गई है। जिसे एक लोकतांत्रिक व सभ्य समाज कभी स्वीकार नहीं कर सकता है।

उन्होंने कहा की मजदूर हितों की रक्षा के लिए बनाए गए कानून को न केवल कमजोर किया गया है, बल्कि हित रक्षक श्रमिक संगठनों को सीमित और समाप्त किए जाने का षड्यंत्र भी इस कानून में छुपा हुआ है। इसी तरह अपनी मांगों पर हड़ताल जैसे हथियार के इस्तेमाल पर भी लगभग पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है ।

मजदूरों के शोषण के लिए काम के घंटे को बढ़कर 12 घंटे तक कर दिया गया है। 300 तक मजदूर वाले खदानों कारखानों व संस्थानों में छटनी व तालाबंदी की खुली छूट मालिकों को दे दी गई है। इसी तरह से रात्रि पाली में महिलाओं की ड्यूटी लगाने की स्वतंत्रता मालिकों के हाथ में होगी , जिससे महिलाओं के जीवन के लिए खतरा और बढ़ जाएगा ।

सरकार इन कानूनों का अपनी भोंपू मीडिया से बेहद जोर-जोर से प्रचार कर यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि ये श्रमिक जगत में एक क्रांतिकारी परिवर्तन है और श्रमिकों के लाभकारी है। जबकि इन कानूनों का गहराई से अध्ययन करने पर पता चलता है, कि वास्तव में ये लेबर कोड मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज है । जिसे लागू कर देने के बाद देश का मजदूर वर्ग सरकार, प्रबंधन, ठेकेदार,और कारखाना मालिकों का गुलाम बनकर रह जाएगा। अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कोई आवाज नहीं उठा पाएगा ।

ये कानून बिलकुल वैसे ही हैं, जैसे देश के किसानों के लिए सरकार तीन काले कानून लेकर आई थी ,जिन्हें किसानों ने कभी नहीं मांगा था । अब सरकार मजदूरों के लिए भी उसी तरह लेबर कोड लेकर आयी है। जिसे मजदूरों ने कभी नहीं मांगा है।
ये कानून मालिकों की मांग पर बनाए गए हैं और मालिकों के हित साधने के लिए ही बनाए गए हैं । इसलिए ऐसे कानून का मजदूर वर्ग पुरजोर विरोध कर रहा है, और आज देश के 30 करोड़ मजदूर, किसान मोर्चा के समर्थन से हड़ताल में है। हम हर हाल में सरकार को पीछे ढकेलेगें और वर्षों पहले कुर्बानियों से हासिल किए गए अधिकारों में कटौती नहीं करने देंगे।

उन्होंने बताया कि दुनिया के पूँजीवादी संकट में उलझे हमारे देश के उद्योगपतियों, कारखाना मालिको का मुनाफा कम हो रहा है। जिसकी भरपाई सरकार मजदूरों के पसीने को बंधक बनाकर करना चाहती है। जो हम कभी नहीं होने देंगे।जरूरत पड़ी तो आगे और बड़े व लंबे संघर्ष के लिए देश का मेहनतकश वर्ग तैयार है।

यूनियन के संगठन सचिव प्रकाश क्षत्रिय ने कहा कि

आज की हड़ताल किसी एक यूनियन की हड़ताल नहीं है बल्कि हर मजदूर के लिए स्वयं को और मजदूरों की अगली पीढ़ी को बचाने की लडाई है। पूंजीपति लोग करोड़ों रुपए इन्हें चुनाव में जीतने के लिए चंदा देते हैं । इसलिए सरकारें पूजीपतियों के फायदे के लिए ऐसे कानून ला रही है कि मजदूर, मालिकों के सामने खडा ही न हो पाए। इसीलिए इस कानून में हड़ताल करने वाले यूनियन नेताओं को जेल भेजने और उन पर जुर्माना लगाने का कड़ा प्रावधान किया गया है।

उन्होंने बताया कि पिछले 10 -12 सालों में देश के पूजीपतियों का मुनाफा 100 गुना तक बढ गया है।लेकिन मजदूर वर्ग अपनी पूरी मजदूरी पाने के लिए अब भी संघर्ष कर रहा है। वर्तमान केंद्र सरकार आम जनता की सरकार नहीं है, ये पूंजीपतियों की सरकार है। इसलिए अपने पूजीपति मित्रों को देश की खनिज संपदा, जल जंगल, जमीन,और सभी संसाधन लुटा रही है।

छत्तीसगढ़ के हसदेव जंगल की कटाई और अब बस्तर को अडानी के हवाले करने की तैयारी इस बात का सबूत हैं। हम वर्षों से ऐसी ताकतों से लडते आये हैं , आज भी लड रहे हैं,और कल भी लडेंगे, लेकिन मजदूरों पर गुलामी नहीं थोपने देंगे।

यूनियन के सचिव कामरेड पुरुषोत्तम सिमैंया ने कहा कि आज की हड़ताल कितनी सफल हुई है यह हमारे अन्य मजदूर साथी देख रहे हैं । सीटू के साथी कितनी ईमानदारी के साथ हमारा रोजगार और हमारे अधिकार बचाने के लिए लड़ रहे हैं, । आज उन्होंने अपना एक दिन की वेतन भी हमारे अधिकार की रक्षा के लिए कुर्बान कर दिया । देश के 30 करोड़ मजदूर सरकार से लेबर कोड को रद्द करने की गुहार लगा रहे हैं । दल्ली राजहरा के तमाम श्रमिक वर्ग ने सहयोग दिया और इस हड़ताल में अभूतपूर्व सफलता मिली है जिसके लिए मै सबको धन्यवाद देता हूँ।
यदि दल्लीराजहरा की अन्य यूनियनें भी देश के 30 करोड़ मजदूरों के साथ अपने हिस्से की लड़ाई लड़ते, तो दल्ली राजहरा में फिर एक बार इतिहास बन जाता, जिसके लिए दल्लीराजहरा जाना जाता है। उन्होंने कहा कि सीटू के साथियों ने बेहद गंभीरता और बहादुरी के साथ यहां के मजदूरों की लड़ाई लडी है। आगे स्थानीय मांगों पर भी हमें इसी जज्बे के साथ संघर्ष में उतरना है।
आज केंद्र सरकार द्वारा लागू किये जा रहे चार श्रम कानून के विरोध में दल्ली राजहरा के मजदूर संगठनो में सिर्फ सीटू द्वारा की गई एक दिवसीय हड़ताल ने कई मायने में यह साबित कर दिया है कि वास्तव में मजदूरों के हक और अधिकार के लिए लड़ने वाला कौन संगठन है। आज मजदूर वर्ग को इस विषय पर विचार करना होगा । श्रम कानून यदि केंद्र सरकार लागू करने में सफल हो जाता है तो मजदूर वर्ग फिर से गुलाम जैसे काम करने पर मजबूर हो जाएंग। साथियों लड़ाई से यह कहकर पीछे हट जाना की यह केन्द्र का मुद्दा है सही नहीं है क्योंकि इन तमाम मुद्दों का असर सीधा श्रमिक वर्ग पर ही पड़ता है। इसलिए आज की हड़ताल अपने अधिकारों को बचाने की लड़ाई है जो श्रमिकों ने अनेकों संघर्षो और कुर्बानियों के बाद पाये है। हर एक अधिकार के लिये श्रमिक वर्ग को लड़ना पड़ा है। अतः आज इस हड़ताल के माध्यम से हम अपना विरोध दर्ज कर सरकार से यह मांग करते हैं कि चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए और 29 श्रम कानूनों को बहाल करें।





