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” मन वचन और कर्म से भी हमारे जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए कि किसी को परेशान करना , किसी को सताना ।” :– आचार्य जितेंद्र महराज चैतन्य

दल्ली राजहरा
मंगलवार 17 फरवरी 2026
भोजराम साहू 9893 765541
झरन मैया प्राचीन मंदिर, जन कल्याण समिति एवं नगर वासियों के द्वारा लगातार तीसरा वर्ष सात दिवसीय संगीतमय श्री शिव महापुराण कथा का 7 दिवसीय आयोजन 8 फरवरी से 15 फरवरी तक झरन मैया मंदिर प्रांगण डौंडी रोड़ पुराना बाजार वार्ड क्रमांक 12 में किया गया ।

जिसके छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय कथावाचक आचार्य जितेंद्र महाराज” चैतन्य” थान खमरिया (बेमेतरा) थे। मन कर्म और वचन से ही पुण्य और पाप होता है । इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है आपका दल्ली राजहरा के भीष्म रथ नगर वासियों को इस भीष्म व्रत से शिक्षा लेनी चाहिए हमारे धर्म ग्रंथो और पुराणों में कहा गया है कि हमें अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है भीष्म पितामह ने कभी पाप नहीं किया था फिर भी उनको बानो की सैया पर लेटना पड़ा था। जानते हो क्यों..?

महाभारत युद्ध जब अपने अंतिम पड़ाव में था तब अपने प्रिय पोता अर्जुन के हाथों महारथी भीष्म पितामह को बानो की सैया पर लेटना पड़ा । भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान था फिर भी अपने प्राण नहीं त्यागे । जब वासुदेव श्री कृष्णा अर्जुन के साथ उनसे मिलने पहुंचे भीष्म पितामह ने श्री कृष्ण से पूछा वासुदेव मैंने जीवन में कभी किसी भी प्राणी को कष्ट नहीं पहुंचा लेकिन मुझे मुझे आज इतनी कष्ट और दुख क्यों तब वासुदेव श्री कृष्ण ने उन्हें बताया कि आप अपने पूर्व जन्म के बारे में याद करिए पितामह जब आप राजा थे । और आप अपने सेना के साथ जा रहे थे । तभी बीच में रास्ते में एक घायल सर्प पड़ा था जिसे आपके आदेश के अनुसार सैनिकों ने रास्ते से हटाकर दूर फेंका लेकिन सैनिक की गलती से वह सर्प कांटों के बीच में जाग गिरा और वह जितना निकलने की कोशिश करता है उतना कांटों में फसता जाता और तड़प तड़प कर उसकी मृत्यु हो गई । इस पूर्व जन्म की कथा के कारण आपको आज यह फल भोगना पड़ रहा है ।भागवत आचार्य श्री जितेंद्र महराज ने बताया कि जीवन में सबसे बड़ा गहना है परोपकार । मन वचन और कर्म से हमारे जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए कि किसी को परेशान करना । किसी को सताना ।

उन्होंने कथा में द्वादश ज्योतिर्लिंग की कथा बताई जिसमें बतलाया कि हमारे हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ- जहाँ स्वयं प्रकट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम इस प्रकार हैं । सोमनाथ (गुजरात) – मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश) महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश) ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) केदारनाथ (उत्तराखंड) भीमशंकर (महाराष्ट्र) काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश) त्र्यम्बकेश्वर (महाराष्ट्र) वैद्यनाथ (झारखंड) नागेश्वर (गुजरात)- रामेश्वरम (तमिलनाडु) घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र)

इनमें से किसी सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना चंद्र देव ने मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की स्थापना भगवान शिव और मां पार्वती ने बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना रावण ने रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना भगवान श्री राम ने तथा बाकी सभी ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं महादेव ने की है ।

भगवताचार्य ने द्वादश ज्योतिर्लिंग की कथा में बताया कि देवाधिदेव महादेव की संख्या इस संसार में अनंत है इतनी है कि गिना नहीं जा सकता इस संसार ही लिंग मय है । कहते हैं कि कण कण में शंकर है स्पष्ट है कि यह संसार लिंग मय है ।

कथा उन्होंने प्रथम सोमनाथ लिंग के बारे में बताया कि रोहिणी सहित 27 कन्याओं का विवाह राजा दक्ष ने चंद्र देव के साथ करवाया था । यह 27 का कन्या उनके नक्षत्र हैं उनकी पत्नियों है । चंद्रदेव रोहिणी से अपेक्षाकृत अधिक प्रेम करते थे ।इसकी शिकायत सभी 26 बहनों ने राजा दक्ष से की । तब राजा दक्ष ने चंद्र देव को समझाया कि सभी 27 कन्याओं को आपके साथ विवाह इसी शर्त पर किया गया है कि आप सभी से समान प्रेम करेंगे ।किसी के साथ भेदभाव नहीं करेंगे लेकिन राजा दक्ष के बात का चंद्र देव के ऊपर कुछ भी असर नहीं हुआ । तब चंद्र देव को राजा दक्ष ने श्राप देते हुए कहा कि तुमने अपनी वचन की अवहेलना की है इसलिए तुम्हारा शरीर तुम्हारा सुंदरता धीरे-धीरे गलने लगेगा, नष्ट हो जाएगा । चंद्रदेव घबराकर ब्रह्मा देव से श्राप से बचने के लिए प्रार्थना की । तब ब्रह्म देव ने भगवान भोलेनाथ की आराधना करने और महामृत्युंजय मंत्र की जाप करने की बात बतलाया । चंद्रदेव ने शिवलिंग का निर्माण कर भगवान भोलेनाथ की आराधना करना प्रारंभ कर दिया ।

चंद्र देव की प्रार्थना से भगवान शिव प्रसन्न हुए उन्होंने चंद्र देव से कहा राजा दक्ष के द्वारा दी गई श्राप तो आपको लगेगा ही लेकिन उसमें मैं एक बदलाव कर सकता हूं एक पक्ष 15 दिन में आपकी सुंदरता धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी और अगले पक्ष 15 दिन में धीरे-धीरे सुंदरता कम होती जाएगी उनकी कृपा स्वरूप चंद्र देव रोगमुक्त हो गया । उनकी रोग समाप्त हो गया गुजरात के प्रभात क्षेत्र में चंद्र देव के द्वारा शिवलिंग की निर्माण किया गया था और उनके आराधना किया गया तब से वह सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कहलाया ।





