दल्ली राजहरारविवार 26 अप्रैल 2026भोजराम साहू 9893 765541 लौह नगरी राजहरा में :– छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कथावाचक श्री कामता प्रसाद शरण की कथा दल्ली राजहरा के सार्वजनिक हनुमान (घोड़ा) मंदिर समिति वार्ड नं 13 एवं समस्त वार्डवासी के तत्वाधान छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कथा वाचक श्री कामता प्रसाद शरण ग्राम कुदेरा दादर गरियाबंद का श्री राम कथा का आयोजन किया गया है । उनके द्वारा नगर वासियों को 25 अप्रैल से 27 अप्रैल तक तीन दिवसीय संगीत मय श्री राम कथा का आनंद प्राप्त दोपहर 3:30 से 6:30 तक प्राप्त होगा । इस कथा का मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पूजा अर्चना के बाद आज प्रारंभ हुआ जहां अतिथि के रूप में तोरण लाल साहू अध्यक्ष नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा रामेश्वर साहू भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रदीप बाग पार्षद वार्ड क्रमांक 23 छगन साहू प्रदेश अध्यक्ष श्रमजीवी पत्रकार संघ रेखु राम साहू पूर्व उपाध्यक्ष तहसील साहू संघ दल्ली राजहरा उपस्थित थे ।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/04/VID-20260425-WA0145.mp4कार्यक्रम में आयोजक समितियां एवं अतिथियों के द्वारा कथावाचक कामता प्रसाद शरण का पुष्पहार से स्वागत किया गया । साथ ही आयोजन समिति के द्वारा अतिथियों को श्रीफल एवं साल से सम्मानित किया गया ।आज कथा में सुप्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी कथा वाचक कामता प्रसाद शरण के द्वारा प्रसिद्ध श्री राम चरित्र मानस से हटकर छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा लोक रामायण की कथा बताया।कथा में उन्होंने कौशल्या हरण की कथा और भगवान श्री राम की जन्म की कथा बताया । अयोध्या के महाराजा दशरथ का विवाह कौशल नरेश भानुमंत की बेटी कौशल्या के साथ तय हुआ । सगाई के उपरांत जब शादी का समय निकट आ रहा था तब लंका के महाराजा रावण को ज्ञात हुआ कि दोनों के विवाह के उपरांत उत्पन्न पुत्र से रावण का वध होगा । तब रावण ने छल से कौशल्या को हरण करने का प्रयास किया । वह उसे पुष्पक विमान से हरण कर समुद्र के बीच में मछली के हाथों संभाल कर रखने के लिए सौंप दिया । राजा दशरथ को जब इस बात की जानकारी हुआ तब वह रावण को ढूंढते हुए अगस्त मुनि के आश्रम पहुंचे । उन्होंने अगस्त मुनि को वहां पहुंचने का कारण बताया । तब अगस्त मुनि ने बताया कि लंका के राजा रावण ने आपकी पत्नी को हरण कर ले गया है उसे मारने के लिए उन्होंने अपने बाण से प्रत्यंचा चढ़ाया । तब भगवान ब्रह्मा प्रकट होकर बताया कि रावण की मृत्यु आपके हाथों से नहीं मां कौशल्या के गर्भ से उत्पन्न होने वाले राम के हाथों होगी । उन्होंने मां कौशल्या की हरण उपरांत रखी गई जगह को बताया ।तथा यह भी बताया कि कौशल्या को लाने के लिए आपको रावण का वेश धारण करना होगा । तभी कौशल्या को वापस ला सकते हो राजा दशरथ उस मछली की तलाश में भी समुद्र में पहुंचा । उन्होंने मछली को रावण के रूप में आह्वान किया । जैसे ही मछली प्रकट हुई उन्होंने कौशल्या की मांग की । कौशल्या ने दशरथ के रूप में रावण को देखकर समझ नहीं पाई कि वास्तव में कौन है । तब उन्होंने सगाई की अंगूठी को देखकर पहचान गई की राजा दशरथ रावण का रूप लेकर उन्हें बचाने आया है ।जैसे ही समुद्र पार कर राजा दशरथ अगस्त मुनि के आश्रम पहुंचा वे अपना वास्तविक रूप में आ गए ।अगस्त मुनि के आश्रम में ही राजा दशरथ और रानी कौशल्या का विवाह संपन्न हुआ। इस विवाह के समय नारी शक्ति और महाराज दशरथ के रज तथा जगत नारायण की भभूति से एक बालक का उत्पन्न हुआ जिसका अगस्त ऋषि ने विभीषण नाम रखा । जब बालक आंगन में सो रहा था अगस्त ऋषि की पुत्रवधू विश्वा मुनि की पत्नि राक्षसी रूप में वहां से विचरण कर रही थी। बालक को देखकर उन्होंने उसे खाने की नीयत से निगल लिया । उन्हें श्राप था कि वह दिन में राक्षसी रूप में रहेगी तथा रात्रि होते ही सुंदर महिला का रूप धारण कर ऋषि का सेवा करेगी । अगस्त ऋषि ने ऋषि पत्नी की हरकत की जानकारी अपने भाई ऋषि विश्वा को दी । रात्रि में राक्षसी मानव रूप में ऋषि के पास आकर चरण स्पर्श की उन्होंने पुत्रवती होने का आशीर्वाद दिया और कमंडल से जल निकालकर जैसे ही छिड़का । निकला हुआ बालक फिर से बालक के रूप में उसके गोद में आ गया तथा ऋषि विश्वा ने उन्हें पालन पोषण के लिए मंदोदरी को सौंप दिया ।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/04/VID-20260425-WA0144.mp4 इधर रावण कौशल्या को मांगने के लिए मछली के पास पहुंचा तब उन्होंने बताया कि आप कौशल्या को ले गए हो तब रावण समझ गया कि महाराज दशरथ ही उनका रूप बनाकर ले गए हैं । फिर उन्होंने माता कौशल्या का हरण करने के लिए जैसे ही अयोध्या की सीमा में प्रवेश किया नर सिंह भगवान प्रकट हो गए । नरसिंह भगवान को देखकर रावण वापस श्रीलंका आ गए । कथा में उन्होंने बताया कि राजा दशरथ चौथ पन में पुत्र की लालसा देकर गुरु वशिष्ट के पास गए । गुरु वशिष्ठ ने बताया कि आपके चार पुत्र होंगे इसके लिए आपको पुत्रेष्ठी यज्ञ करना होगा । उन्होंने यज्ञ के लिए छत्तीसगढ़ के ही सिहावा पर्वत पर रहने वाले श्रृंगी ऋषि को आमंत्रण दिया । पुत्रेष्ठी यज्ञ के बाद तीनों रानी गर्भवती हुई और सुंदर से चारों पुत्र को जन्म दिया । जिसका नाम राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न रखा गया । पुत्र पाकर राजा दशरथ आनंद मय हो गए । उन्होंने गुरु वशिष्ट के चरणों में गिर गए ।कथा के मध्य में कामता प्रसाद शरण ने बताया कि हमारे समाज में बेटियां आगे बढ़ रहे हैं इसके विपरीत बेटे पढ़ाई लिखाई से विमुख हो रहे हैं । यह समाज के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय है । कारण यह है कि विवाह योग्य बेटे के लिए योग्य बेटियां नहीं मिल पाती क्योंकि बेटियों की शिक्षा बेटों से कई गुना बड़ी हो चुकी है । उन्होंने यह भी कहा कि जब भी आपको कोई समस्या हो किसी दुख से घिरे हो कथा में आकर आप अपनी समस्या और दुख को भगवान को अर्पित कर दो और सच्चे मन से कथा का आनंद लो भगवान आपके दुख का निवारण अवश्य करेंगे ।क्योंकि कथा में आए हुए भक्तों का दुख वह हर लेते हैं ।उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए अपनी ओर से ₹11000 की राशि सहयोग स्वरूप देने की बात कही तथा लोगों से भी अपील की कि मंदिर की स्थिति जर्ज हो चुकी है आप सभी भक्त भी इस मंदिर निर्माण में सहयोग करें ।श्री राम कथा के आयोजक समिति के सदस्य है। विजय सिन्हा रूपलाल साहू चेतन साहू ईश्वर निर्मलकर संजय सोनवानी राम अवतार निर्मलकर राजेंद्र निर्मलकर बाल सिंग साहू नवीन साहू सुनील साहू सुलोचना सिन्हा अनिता सोनवानी कुसुमलता निर्मलकर अंजनी निर्मलकर परमेश्वरी साहू रेखा साहू पेमिन साहू रेणु निर्मलकर शिव कुमारी डामिन साहू गौरी नीलम एवं नगर वासी ।Spread the lovePost navigationविश्व हिंदू परिषद ने कुत्ते के काटने से घायल हुए बच्चे के इलाज के लिए परिजन को सौंपे ₹145000.00 की राशि । विश्व मलेरिया दिवस पर उप स्वास्थ्य केंद्र टाउनशिप में हुआ विविध कार्यक्रम ।