दल्ली राजहराशुक्रवार 01 मई 2026भोजराम साहू 9893 765541 अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा एवं छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ, दल्ली राजहरा द्वारा श्रमिक एकजुटता और संघर्ष की परंपरा को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विश्व के तमाम शहीद मजदूरों एवं शहीद शंकर गुहा नियोगी को पुष्पांजलि अर्पित कर मौन धारण किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने श्रमिक अधिकारों, वर्तमान परिस्थितियों और संघर्ष की आवश्यकता पर विस्तार से विचार रखे।महामंत्री रामचरण नेताम ने कहा कि श्रम और उत्पादन की शुरुआत से ही मजदूर वर्ग शोषण का शिकार रहा है। इतिहास गवाह है कि मजदूरों ने 12 से 18 घंटे की अमानवीय कार्य अवधि के खिलाफ संघर्ष करते हुए 1 मई को प्रतिरोध का प्रतीक बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज केंद्र की भाजपा सरकार पुनः उसी दौर को थोपने की कोशिश कर रही है, जहां श्रमिकों से 12 से 16 घंटे काम लेने की मंशा दिख रही है। चार श्रम संहिताओं के जरिए श्रमिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है, जिसका संगठित विरोध जरूरी है। उपाध्यक्ष सुरेंद्र साहू ने कहा कि मजदूर दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि संघर्ष की विरासत को याद करने का दिन है। शहीद मजदूरों ने लंबी लड़ाई के बाद 8 घंटे कार्य, साप्ताहिक अवकाश जैसे अधिकार हासिल किए थे। उन्होंने बीएसपी में संभावित छंटनी पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे युवाओं के सामने रोजगार का संकट गहरा सकता है। उन्होंने पूंजीवादी नीतियों के खिलाफ एकजुट संघर्ष का आह्वान किया।संगठन मंत्री तुलसी कोला ने दल्ली राजहरा को आंदोलनों की ऐतिहासिक धरती बताते हुए कहा कि युवाओं को पुराने संघर्षों से सीख लेकर नेतृत्व की भूमिका में आगे आना होगा। वहीं महेश भारती ने “लाल-हरा परिवार” के शहीदों के बलिदान को याद करते हुए क्रांतिकारी विचारधारा को आत्मसात करने पर जोर दिया। हितेश डोंगरे ने अपने वक्तव्य में कहा कि मजदूर आंदोलन केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल रहे हैं। लाल झंडा इस संघर्ष और क्रांति का प्रतीक है, जिसे नई पीढ़ी को समझना होगा। कोषाध्यक्ष राजा राम बरगद ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्रमिकों द्वारा संघर्ष से अर्जित अधिकारों को समाप्त करने की कोशिश हो रही है। 44 श्रम कानूनों को चार कोड में बदलना मजदूर विरोधी कदम है, जिसका मुंहतोड़ जवाब देना होगा।माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उईके ने कहा कि1 मई को मजदूरों का ऐतिहासिक जीत हुआ जिसमें काम के घंटे 8 घंटे करने और श्रमिकों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1 मई 1886 में अमेरिका में हुए एक बड़े आंदोलन के बाद हुई, जब शिकागो के हेमार्केट में कामगारों ने 8 घंटे काम की मांग को लेकर हड़ताल की थी। श्रमिक आंदोलन लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की नींव हैं। उन्होंने शिकागो के ऐतिहासिक आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहीं से लाल झंडा मजदूर एकता का प्रतीक बना। उन्होंने याद दिलाया कि “8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे सामाजिक जीवन” का सिद्धांत संघर्षों से हासिल हुआ था, जिसे आज कमजोर किया जा रहा है।शिकांगो के शहर में लाल रंग से लथपथ मजदूर थे ,वहीं से मजदूरों का प्रतीक लाल झंडा निकल कर आया,मार्क्स के देहांत के समय केवल 17 लोगों उनकी यात्रा में शामिल हुए लेकिन थे,लेकिन इन 17 लोगों ने इनके विचारधारा को आगे बढ़ाया वही नियोगी जी दुनिया के तमाम आंदोलनों को समझा और संघर्ष और निर्माण के लिए लोगो संगठित किया।मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जनक लाल ठाकुर ने कहा कि 1886 से शुरू हुए मजदूर आंदोलनों ने संगठित शक्ति की मिसाल पेश की है। लेकिन वर्तमान में श्रमिकों के संगठन और अधिकारों को कमजोर करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। भविष्य निधि जैसी सुविधाओं पर भी खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के निजीकरण से आम जनता का भविष्य संकट में पड़ सकता है।चार नए श्रम कानूनों के जरिए मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा पर सीधा हमला किया जा रहा है। विशेष रूप से भविष्यनिधि (पीएफ) जैसी व्यवस्था, जो श्रमिकों के बुढ़ापे और संकट के समय सहारा होती है, उसे कमजोर करने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।ठेका प्रथा, अस्थायी रोजगार और नियमों में ढील देकर सरकार स्थायी नौकरियों को खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है, जिससे लाखों मजदूर पीएफ के दायरे से बाहर हो सकते हैं। यह केवल एक आर्थिक बदलाव नहीं, बल्कि श्रमिकों और कर्मचरियो के भविष्य को असुरक्षित करने की नीति है।मजदूरों ने लंबे संघर्ष के बाद ये अधिकार हासिल किए हैं। अगर आज चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियों के हाथ से भी यह सुरक्षा छिन जाएगी। इसलिए जरूरी है कि श्रमिक और कर्मचारी वर्ग एकजुट होकर इस साजिश का विरोध करे—क्योंकि हक लड़कर ही बचते हैं, मांगने से नहीं।इस मजदूर दिवस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ/ छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के सभी पदाधिकारियों और कर्मचारी, युवा सदस्य शामिल हुए।1 मई याद दिलाता है—हक मांगने से नहीं, लड़ने से मिलता है : छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चादल्ली राजहरा। अंतर्राष्ट्री मजदूर दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा एवं छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ, दल्ली राजहरा द्वारा श्रमिक एकजुटता और संघर्ष की परंपरा को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विश्व के तमाम शहीद मजदूरों एवं शहीद शंकर गुहा नियोगी को पुष्पांजलि अर्पित कर मौन धारण किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने श्रमिक अधिकारों, वर्तमान परिस्थितियों और संघर्ष की आवश्यकता पर विस्तार से विचार रखे।महामंत्री रामचरण नेताम ने कहा कि श्रम और उत्पादन की शुरुआत से ही मजदूर वर्ग शोषण का शिकार रहा है। इतिहास गवाह है कि मजदूरों ने 12 से 18 घंटे की अमानवीय कार्य अवधि के खिलाफ संघर्ष करते हुए 1 मई को प्रतिरोध का प्रतीक बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज केंद्र की भाजपा सरकार पुनः उसी दौर को थोपने की कोशिश कर रही है, जहां श्रमिकों से 12 से 16 घंटे काम लेने की मंशा दिख रही है। चार श्रम संहिताओं के जरिए श्रमिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है, जिसका संगठित विरोध जरूरी है।उपाध्यक्ष सुरेंद्र साहू ने कहा कि मजदूर दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि संघर्ष की विरासत को याद करने का दिन है। शहीद मजदूरों ने लंबी लड़ाई के बाद 8 घंटे कार्य, साप्ताहिक अवकाश जैसे अधिकार हासिल किए थे। उन्होंने बीएसपी में संभावित छंटनी पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे युवाओं के सामने रोजगार का संकट गहरा सकता है। उन्होंने पूंजीवादी नीतियों के खिलाफ एकजुट संघर्ष का आह्वान किया।संगठन मंत्री तुलसी कोला ने दल्ली राजहरा को आंदोलनों की ऐतिहासिक धरती बताते हुए कहा कि युवाओं को पुराने संघर्षों से सीख लेकर नेतृत्व की भूमिका में आगे आना होगा। वहीं महेश भारती ने “लाल-हरा परिवार” के शहीदों के बलिदान को याद करते हुए क्रांतिकारी विचारधारा को आत्मसात करने पर जोर दिया।हितेश डोंगरे ने अपने वक्तव्य में कहा कि मजदूर आंदोलन केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल रहे हैं। लाल झंडा इस संघर्ष और क्रांति का प्रतीक है, जिसे नई पीढ़ी को समझना होगा।कोषाध्यक्ष राजा राम बरगद ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्रमिकों द्वारा संघर्ष से अर्जित अधिकारों को समाप्त करने की कोशिश हो रही है। 44 श्रम कानूनों को चार कोड में बदलना मजदूर विरोधी कदम है, जिसका मुंहतोड़ जवाब देना होगा।माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उईके ने कहा कि 1 मई को मजदूरों का ऐतिहासिक जीत हुआ जिसमें काम के घंटे 8 घंटे करने और श्रमिकों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1 मई 1886 में अमेरिका में हुए एक बड़े आंदोलन के बाद हुई, जब शिकागो के हेमार्केट में कामगारों ने 8 घंटे काम की मांग को लेकर हड़ताल की थी। श्रमिक आंदोलन लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की नींव हैं। उन्होंने शिकागो के ऐतिहासिक आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहीं से लाल झंडा मजदूर एकता का प्रतीक बना। उन्होंने याद दिलाया कि “8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे सामाजिक जीवन” का सिद्धांत संघर्षों से हासिल हुआ था, जिसे आज कमजोर किया जा रहा है। शिकांगो के शहर में लाल रंग से लथपथ मजदूर थे ,वहीं से मजदूरों का प्रतीक लाल झंडा निकल कर आया,मार्क्स के देहांत के समय केवल 17 लोगों उनकी यात्रा में शामिल हुए लेकिन थे,लेकिन इन 17 लोगों ने इनके विचारधारा को आगे बढ़ाया वही नियोगी जी दुनिया के तमाम आंदोलनों को समझा और संघर्ष और निर्माण के लिए लोगो संगठित किया।मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जनक लाल ठाकुर ने कहा कि 1886 से शुरू हुए मजदूर आंदोलनों ने संगठित शक्ति की मिसाल पेश की है। लेकिन वर्तमान में श्रमिकों के संगठन और अधिकारों को कमजोर करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। भविष्य निधि जैसी सुविधाओं पर भी खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के निजीकरण से आम जनता का भविष्य संकट में पड़ सकता है। चार नए श्रम कानूनों के जरिए मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा पर सीधा हमला किया जा रहा है। विशेष रूप से भविष्यनिधि (पीएफ) जैसी व्यवस्था, जो श्रमिकों के बुढ़ापे और संकट के समय सहारा होती है, उसे कमजोर करने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है। ठेका प्रथा, अस्थायी रोजगार और नियमों में ढील देकर सरकार स्थायी नौकरियों को खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है, जिससे लाखों मजदूर पीएफ के दायरे से बाहर हो सकते हैं। यह केवल एक आर्थिक बदलाव नहीं, बल्कि श्रमिकों और कर्मचरियो के भविष्य को असुरक्षित करने की नीति है।मजदूरों ने लंबे संघर्ष के बाद ये अधिकार हासिल किए हैं। अगर आज चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियों के हाथ से भी यह सुरक्षा छिन जाएगी। इसलिए जरूरी है कि श्रमिक और कर्मचारी वर्ग एकजुट होकर इस साजिश का विरोध करे—क्योंकि हक लड़कर ही बचते हैं, मांगने से नहीं।इस मजदूर दिवस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ/ छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के सभी पदाधिकारियों और कर्मचारी, युवा सदस्य शामिल हुए।Spread the lovePost navigationरेलवे इंस्टिट्यूट दल्ली राजहरा द्वारा समर कैंप का सफल आयोजन । सीटू ने पूरे जोश से मनाया मजदूर दिवस, कहा- संघर्ष के बिना मजदूर वर्ग को कुछ भी नहीं मिला।