दल्ली राजहरा बुधवार 22 जुलाई 2026 भोज राम साहू 9893765541
भिलाई इस्पात संयंत्र के निजीकरण के विरोध में 22 जुलाई से अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी सर्व आदिवासी समाज, भीम आर्मी सहित कई संगठन समर्थन में

 भिलाई इस्पात संयंत्र के निजीकरण और ठेका श्रमिकों के शोषण के विरोध में जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ ने 22 जुलाई से अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी आंदोलन की घोषणा की है। संगठन ने क्षेत्र के बेरोजगार, मजदूर और किसान जनता से बड़ी संख्या में भाग लेकर इसे संवैधानिक तरीके से सफल बनाने की अपील की है।

 

 “सार्वजनिक नाम पर अधिग्रहण, निजी हाथों को बेचने की साजिश”

जन मुक्ति मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले सार्वजनिक उपक्रम के नाम पर भिलाई से लेकर मरोदा, सिकोसा, गुंडरदेही, बालोद, कुसुमकसा और दल्ली राजहरा तक आदिवासी क्षेत्र की खेती और जंगल की जमीन अधिग्रहित की। अब दल्ली राजहरा से रावघाट तक जमीन अधिग्रहण कर सेल के लिए लोहा लाने का काम शुरू करने के बाद भिलाई इस्पात संयंत्र को अडानी को बेचने की साजिश रची जा रही है। संगठन का कहना है कि सार्वजनिक उपक्रम के नाम पर ली गई जमीन को अब निजी कंपनी को बेचा जा रहा है।
ठेका श्रमिकों के शोषण के गंभीर आरोप

 

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि निजीकरण की तैयारी के लिए जबरिया रिटायरमेंट की साजिश की जा रही है। ठेका श्रमिकों को श्रम कानून के तहत न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा और उनसे 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है। “नौकरी से निकालने के भय दिखाकर बिना सुरक्षा उपकरण के काम करने को मजबूर किया जा रहा है। आखिर ठेका श्रमिकों के हिस्से की राशि कौन ठेकेदार, दलाल, ट्रेड यूनियन के नेता और बीएसपी के भ्रष्ट अधिकारी खा रहे हैं, इसका जवाब ठेका मजदूर मांगता है” – विज्ञप्ति में कहा गया।

पैलेट प्लांट से प्रदूषण और कम वेतन का मुद्दा
संगठन ने जग्गनाथ कंपनी द्वारा स्थापित पैलेट प्लांट को भी मुद्दा बनाया। आरोप है कि जिस प्लांट की प्रतिदिन करीब 4000 टन उत्पादन क्षमता है और जिससे लाखों रुपये की कमाई होती है, वहां काम करने वाले ठेका श्रमिकों को केवल 8 से 10 हजार रुपये महीना वेतन दिया जा रहा है।

जन मुक्ति मोर्चा ने कहा कि इस प्लांट से निकलने वाली जहरीली धूल, धुआं और प्रदूषित लाल पानी से आसपास की बस्तियां और गांव उजड़ने की स्थिति में हैं। स्थानीय लोगों से सस्ती कीमत पर खेती की जमीन लेकर बिना प्रशिक्षण, बिना सुरक्षा और बिना भविष्य निधि के उनसे कड़ी मेहनत कराई जा रही है
 “पहले भी लड़ी है लड़ाई, अब आर-पार”
विज्ञप्ति में कहा गया कि क्षेत्र के मजदूर पहले भी इसके विरोध में लड़े हैं और लाठी-गोली, जेल की यातनाएं झेली हैं। उसी लड़ाई को अब जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ आगे बढ़ा रहा है। संगठन ने न्यायप्रिय नागरिकों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं से इस आंदोलन में भाग लेने का आह्वान किया है।
 इन संगठनों का मिला समर्थन
अब तक इस आंदोलन को सर्व आदिवासी समाज जिला बालोद, भीम आर्मी छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, देवार समाज दल्ली राजहरा और मुस्लिम समाज दल्ली राजहरा का समर्थन मिल चुका है।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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