दल्ली राजहरा गुरुवार 10 सितंबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541 एक परिवार, एक खेती, एक मुखिया फिर हर हिस्सेदार का अलग पंजीयन क्यों? किसानों में असमंजस छत्तीसगढ़ में एग्री स्टैक पोर्टल में पंजीयन को लेकर किसानों के बीच भारी असमंजस और नाराजगी बढ़ गई है। इसे लेकर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, जिला किसान संघ बालोद और डौंडीलोहारा क्षेत्र के किसानों ने सरकार के दबावपूर्ण पंजीयन अभियान का कड़ा विरोध किया है। किसानों का सीधा सवाल है कि जब घर का मुखिया एक है, जमीन और खेती का संचालन परिवार से जुड़ा है और धान भी परिवार का एक ही सदस्य बेचेगा, फिर हर हिस्सेदार का सामूहिक और अलग-अलग पंजीयन क्यों कराया जा रहा है?बुजुर्ग, महिलाएं लगा रही चक्कर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर ने कहा कि प्रशासन द्वारा प्रत्येक हिस्सेदार का पंजीयन कराने पर जोर दिया जा रहा है। गांवों में कई परिवारों की जमीन संयुक्त खातों में दर्ज है। ऐसे में बुजुर्ग, महिलाएं, बाहर रहने वाले हिस्सेदार और छोटे किसान बार-बार दस्तावेज लेकर पंजीयन केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इससे उनका समय, मजदूरी और आने-जाने का खर्च बर्बाद हो रहा है। नियम स्पष्ट करे सरकारजिला किसान संघ बालोद के अध्यक्ष गैंद सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार पहले यह स्पष्ट करे कि सामूहिक पंजीयन से किसानों को अतिरिक्त लाभ क्या मिलेगा? यदि सरकार डिजिटल व्यवस्था से सुविधा देना चाहती है तो यह व्यवस्था सरल, स्वैच्छिक और स्पष्ट नियमों के साथ लागू होनी चाहिए। किसानों को बताया जाना चाहिए कि अलग-अलग हिस्सेदारों के पंजीयन से कौन-सा अतिरिक्त लाभ मिलेगा और पंजीयन नहीं कराने पर कौन-सी योजना प्रभावित होगी। किसानों का कहना है कि एग्री स्टैक किसानों की सुविधा का माध्यम बने, परेशानी का कारण नहीं। प्रशासन गांव-गांव जाकर केवल पंजीयन का लक्ष्य पूरा करने के बजाय पूरी जानकारी दे। यदि हर हिस्सेदार का अलग रिकॉर्ड जरूरी है तो उसका स्पष्ट आधार और लाभ भी बताया जाए। मोर्चा ने चेतावनी दी है कि सरकार जितना धान का समर्थन मूल्य नहीं दे रही, उससे ज्यादा अलग-अलग तरीकों से किसानों को परेशान किया जा रहा है। एग्री स्टैक पोर्टल पर सामूहिक पंजीयन तत्काल रोका जाए, नहीं तो छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, जिला किसान संघ बालोद और डौंडीलोहारा क्षेत्र के किसान सड़क पर उतर कर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। क्या है एग्री स्टैक, जिसे लेकर हो रहा है विरोध – एक नजर में सरकारी जानकारी के अनुसार एग्री स्टैक भारत सरकार और राज्य सरकारों की संयुक्त पहल है। इसका उद्देश्य किसानों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है। इसमें क्या होता है ।किसान का भूमि रिकॉर्ड, आधार, बैंक खाता, बोई गई फसल की जानकारी को एक साथ जोड़ा जाता है। पंजीयन के बाद किसान को 11 अंकों की यूनिक फार्मर आईडी जारी की जाती है। सरकार का दावा – ये लाभ मिलेंगे:छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए एग्री स्टैक पंजीयन अनिवार्य किया गया है। बिना फार्मर आईडी के किसान न तो समितियों में धान बेच पाएंगे और न ही पीएम किसान सम्मान निधि और अन्य योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे खाद-बीज सब्सिडी, फसल बीमा, बैंक ऋण की प्रक्रिया सरल होगी और योजनाएं पारदर्शी तरीके से सीधे पात्र किसानों तक पहुंचेंगी। पंजीयन कहाँ होगा: किसान नजदीकी लोक सेवा केंद्र, सहकारी समिति या पोर्टल http://www.cgfr.agristack.gov.in पर बी-1 खतौनी, ऋण पुस्तिका, आधार कार्ड और आधार लिंक मोबाइल नंबर के साथ पंजीयन करा सकते हैं।Spread the lovePost navigationदल्लीराजहरा में साइबर जागरूकता अभियान का शुभारंभ ।