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“बच्चों के जन्मदिन पर दीपक जलाएं उन्हें अच्छे स्वास्थ्य , शिक्षा और उज्जवल भविष्य के लिए आशीर्वाद दें !” : पंडित गजानंद द्विवेदी

दल्ली राजहरा सोमवार 3 नवंबर 2025  भोज राम साहू 98937 65541

 

दल्ली राजहरा राजहरा में मानसी यादव के द्वारा स्वर्गीय श्रीमती सरोज यादव की स्मृति में 28 अक्टूबर से 5 नवंबर तक न्यू बस स्टेशन स्थित ब्राह्मण समाज में चल रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह में पंडित गजानंद द्विवेदी बेरला (बेमेतरा ) ने कथा के चौथे दिन वासुदेव श्री कृष्ण विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया । उन्होंने कथा में सर्वप्रथम सनातन धर्म के संबंध में बताया कि आधुनिक युग में हम लोग अपने बच्चों के जन्मदिन पर दीपक या मोमबत्ती जलाकर उसे बुझाते हैं । हम बच्चों के नाम से जलता हुआ दीपक क्यों बुझाते हैं हमारा धर्म हमें सिखाता है कि बच्चों के जन्मदिन पर उन्हें आशीष दीजिए उनके नाम से दीपक जलाइए उनका प्रकाश युगों युगों तक फैलती रहे ऐसा उन्हें आशीर्वाद दीजिए। उन्हें अच्छे स्वास्थ्य है अच्छे शिक्षा और उज्जवल भविष्य के कामना के लिए प्रार्थना करिए l

 

अगली कथा में उन्होंने कहा कि जब भगवान श्री कृष्णा बाल्यावस्था में थे तब नंद बाबा एक दिन इंद्र भगवान की पूजा करने के लिए तरह-तरह के पकवान बना रहे थे । उन्होंने पूछा की बाबा यह पकवान किसके लिए तब नंद बाबा ने कहा कि इंद्रदेव वर्षा करता है जिसके कारण हमारे खेतों में फसल होती है । इसलिए हम इंद्र भगवान को प्रसन्न करने के लिए उन्हें खुश करने के लिए यह पूजा आयोजन कर रहे हैं । तब बालकृष्ण ने इंद्र भगवान की पूजा करने के बजाय गोवर्धन पर्वत के पूजा करने की सलाह दी । इस बात से इंद्र नाराज हो गए उन्होंने मूसलाधार बारिश करना प्रारंभ कर दिया तब वासुदेव कृष्ण ने इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए 7 वर्ष की उम्र में 7 दिन तक 7 कोस के गोवर्धन पर्वत को उठाकर पूरे गोकुल वासियों को उसके नीचे लाकर उनकी रक्षा की । अंत में इंद्र उनके सामने नतमस्तक हो गए l

 भगवान कृष्ण ने कहा प्रकृति हमें जलवायु और स्वच्छ जीवन प्रदान करती है इसलिए प्रकृति की पूजा करनी चाहिए उन्होंने गोवर्धन पर्वत की पूजा के माध्यम से प्रकृति के महत्वता को गोकुल वासियों को समझाया था उन्होंने समझाया कि इंद्र की पूजा के बजाय गोवर्धन पर्वत के पूजा करें क्योंकि प्रकृति हमें जल वायु और स्वच्छ जीवन प्रदान करती है ।

पंडित जी ने कहा कि जितने पेड़ लगाए जाते हैं उससे ज्यादा काट दिए जाते हैं पेड़ लगाना अच्छी बात है लेकिन उससे अच्छी बात है पेड़ों की संरक्षण करना उसे बचा कर रखना बड़े-बड़े शहरों में कारखाने के लिए हजारों साल पुराने पेड़ काटे जा रहे हैं । पूरा जंगल साफ हो रहा है जिसके कारण प्रकृति अपना रौद्र रूप लेकर मानव का विनाश कर रहे हैं । 

 तीसरी कथा में उन्होंने कालिया बाल्यावस्था में कालिया नाग के युद्ध का वर्णन किया उन्होंने बताया कि कालिया नाग यमुना नदी में रहते थे वह एक विशाल और जहरीला नाग था जो यमुना नदी के जल को जहरीला बना देता और नदी के आसपास के क्षेत्र में आतंक फैलाता था । भगवान श्री कृष्ण ने उसे पराजित कर यमुना नदी को उसके आतंक से मुक्त कराया था । कालिया नाग को यमुना से निकालकर समुद्र में भेज दिया । उन्होंने कालिया नाग को समुद्र में रहने का आदेश दिया जहां अपने परिवार के साथ रह सके और किसी को नुकसान न पहुंच सके । 

 

भागवत कथा में उन्होंने कंस वध की भी कथा बताई उन्होंने बताया कि कंस ने अपने पिता मथुरा के राजा उग्रसेन को कैद में डालकर स्वयं राजा बन गए और प्रजा पर अत्याचार करने लगे । वह अपनी बहन देवकी से बहुत प्रेम करते थे l जब देवकी का विवाह वासुदेव से हुआ तब वह अपने बहन को स्वयं विदा करने सारथी बनकर गए l जब वह रथ में अपनी बहन और वासुदेव को लेकर जा रहे थे l उसी समय आकाशवाणी हुआ कि जिस बहन को रथ में लेकर विदा करने जा रहे हो उसका आठवां पुत्र आपका काल बनेगा l उन्हीं के हाथों आपकी मौत होगी l तब कंस ने बहन के प्रति प्रेम को भूलकर देवकी को मारने के लिए अपना तलवार उठा लिया l वासुदेव ने पति धर्म का पालन करते हुए पत्नी देवकी की जीवन की कंश से भीख मांगी l उन्होंने कहा कि यदि आपको लगता है कि देवकी का आठवां पुत्र आपकी मौत का कारण होगा l तो मैं उनके आठवां पुत्र को जन्म लेते ही आपको सौंप दूंगा l तब कंस ने उन्हें जीवन दान दिया l लेकिन कंस ने सोचा कि देवकी का आठ पुत्र हो तो आठों पुत्र में से कौन सा नंबर का पुत्र मेरा मौत का कारण बनेगा यह आकाशवाणी ने स्पष्ट नहीं बताया l

इसलिए कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल दिया और उनके उत्पन्न होने वाले पुत्रों को मौत के घाट उतारता गया l भाद्र पक्ष अष्टमी की मध्य रात्रि को जब उनका आठवां पुत्र उत्पन्न हुआ तो चारो ओर घोर अंधकार, और मूसलाधार बारिश हो रहा था l पहरेदार भगवान की माया से चिर निद्रा में सो गए और वासुदेव की हथकड़ी तथा सभी कारागार की द्वार खुल गए l फिर आकाशवाणी हुई और आकाशवाणी के अनुसार वासुदेव ने अपने पुत्र को यमुना पार अपने मित्र नंद बाबा के घर ले गए और वहां से उनके नवजात पैदा हुई पुत्री को लाकर कंस के हाथों में सौंप दिया l कहते हैं कि कंस ने जब उन्हें मारने की चेष्टा की तो कन्या ने उनके हाथ छुट कर आकाश में चले गए और आकाश से भविष्यवाणी हुई l हे पापी कंस ! तुझे मारने वाला तो गोकुल में पैदा हो चुका है ।

  कंस कई बार श्री कृष्ण को मारने का प्रयत्न करते हर बार वह हार जाता और अंत में भगवान कृष्ण ने कंस को मार कर अपने नाना राजा उग्रसेन को राजपाठ सौंप कर अपने जन्म देने वाली मां देवकी और वासुदेव को मुक्त कराया l 

अंत में पंडित गजानन द्विवेदी ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा को समझना आसान नहीं है लेकिन जिन्होंने यह समझ लिया उनके ज्ञान को आत्मसात कर लिया वह हम उनका जीवन सफल हो गया श्रीमद् भागवत कथा धर्म की रक्षा प्रकृति से प्रेम करना सीखना है इस भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण ने बताया है कि कम करो फल की चिंता मत करो लेकिन जो आप बोओगे वही आपको मिलेगा इसका भी आपको ध्यान रखना है l
कथा में जजमान के रूप में श्रवण एवं संध्या और दूसरे जजमान के रूप में ऋषि और मोनिका बैठे थे ।

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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