दल्ली राजहरा रविवार  9 नवंबर 2025 भोज राम साहू 9893765541

 दल्ली राजहरा वार्ड नंबर 2 आजाद नगर वार्ड के रामनगर चौक में शिव मंदिर के पास नारी शक्ति शिव परिवार के द्वारा श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन 6 नवंबर से 12 नवंबर तक किया जा रहा है । श्री शिव महापुराण कथा के भागवत आचार्य पंडित सौरभ शर्मा ग्राम अरमरीकला हैं। आज उन्होंने बताया कि यह संसार एक मेंढक की तरह है जिसमें आप किसी को भी संतुष्ट नहीं कर सकते ।एक को तराजू में रखो तो दूसरा कुद कर तराजू से बाहर चले जाते हैं दूसरे को रखो तो तीसरा कूद जाते हैं । संसार में लोग भगवान में भी कमी निकाल लेते हैं तो आप और हम इंसान हैं । लोगों को किसी की अच्छाई नजर नहीं आती उनके बुराई पहले दिख जाती है पूरे कोरे कागज में यदि कहीं पर बिंदी लगा दिया जाए तो उन्हें पूरे कागज की कोरापन नहीं दिखाई देगा मात्र बिंदी ही नजर आती है । 

आज भागवत आचार्य विजय शर्मा ने सती कथा राजा दक्ष और सती के संबंध में कथा बताया । उन्होंने कथा में बताया कि लोगों को इन जगहों पर बिना आमंत्रण के भी जाना चाहिए । जिनमें है भगवान के मंदिर , किसी के मृत्यु होने पर , गुरु के पास और माता-पिता के पास यदि सम्बन्ध अच्छा हो तो ।

आज भागवताचार्य सौरभ शर्मा ने कथा बताया कि सती को अपने पिता राजा दक्ष से बहुत प्रेम था लेकिन सती के द्वारा भगवान शंकर के साथ विवाह कर देने के कारण राजा दक्ष उनसे नाराज थे। एक बार आजा दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया उसमें उन्होंने सभी राजाओं को बुलाया लेकिन भगवान शिव को आमंत्रण नहीं भेजा । जब सती को राजा दक्ष के यज्ञ किए जाने के बारे में जानकारी मिला तब उन्होंने भगवान शिव से यज्ञ में चलने को कहा । लेकिन भगवान शिव ने कहा कि जब राजा दक्ष ने उन्हें नहीं बुलाया है तो बिना बुलाए जाना उनका अपमान है , इसलिए वहां नहीं जाना चाहता । इस बात से सती नाराज होकर राजा दक्ष के यज्ञ में शामिल होने चली गई । वहां अपने पिता राजा दक्ष से भगवान शिव को यज्ञ में नहीं बुलाया जाने के संबंध में पूछा लेकिन राजा दक्ष ने भगवान शिव की निंदा की और उन्हें कोई भी कारण नहीं बताया । जिससे सती नाराज हो गई और यज्ञ के अग्नि में कूद कर अपनी जान दे दी । जब भगवान शिव को सती की मृत्यु की जानकारी मिली सती के जिद से उन्हें बहुत नाराजगी हुई । लेकिन सती के द्वारा अग्नि में कूद जाने से बहुत दुख भी हुआ जिस कारण उन्होंने अपने गणों को राजा दक्ष को मारने का आदेश दे दिया । उनके गणों ने राजा दक्ष का सिर काट दिया और उसकी सेना को नष्ट कर दिया ।

 बाद में भगवान शिव ने सती के शव को कंधे में उठाकर तांडव किया इस तांडव से पूरे विश्व का विनाश हो गया देवताओं में त्राहि त्राहि मच गई । तब उन्होंने भगवान विष्णु से इस घटना से मुक्ति का मार्ग पूछा । तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 टुकड़े में काट दिया । यह टुकड़ा जहां-जहां पर गिरा वहां शक्तिपीठ का निर्माण हुआ । कथा का आयोजन दोपहर 2:00 से शाम 6:00 बजे तक किया जा रहा है जिससे सुनने भक्तों की प्रतिदिन भीड़ लग रही है ।

Spread the love
Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

You missed

error: Content is protected !!