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“फरवरी_ 2026 के इस महाशिवरात्रि को हरित ( ग्रीन ) महाशिवरात्रि के रूप में मनाये।” :— पंडित प्रदीप मिश्रा

दल्ली राजहरा शनिवार 29 नवंबर 2025 भोज राम साहू 98937 65541

ग्राम कच्चे में जयसवाल परिवार के सहयोग से आयोजित सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ( सीहोर वाले ) ने शुक्रवार को शिव महिमा के साथ अनेक व्याख्यान भी बताया।

 पंडित प्रदीप मिश्रा ने कल शुक्रवार को कथा में बताया कि संसार में सिर्फ मनुष्य ही है जो पैसे और धन का भूखा है । जबकि पशु पक्षी जानवर सिर्फ प्यार और भाव का भूखा है । आप उनसे प्यार से दो रोटी दे दे और उन्हें प्यार दे तो वह आपके पास आता है वह हमको ढूंढता है उन्हें सिर्फ प्रेम चाहिए इसके अलावा कुछ भी नहीं वह प्रेम के बल पर आपके प्रति इतना समर्पित हो जाता है कि वह प्रेम करने वाले के पीछे-पीछे दौड़ता है जबकि मनुष्य पैसा वालों को ढूंढता है । इसी तरह से मेरे प्रभु मेरे बाबा सिर्फ प्रेम का भूखा है
कई लोगों कहते हैं कि अमुक चीज चढ़ाओ तो भगवान मिलेगा  धन दौलत चढ़ाव  मिठाई चढ़ाव लड्डू चढ़ाओ  लेकिन यह सब मिथ्या है झूठ है भगवान शिव सिर्फ प्रेम का भूखा है । शिव महापुराण की कथा कहती है कि भगवान शिव का कोई दुश्मन नहीं है 33 कोटि देवताओं में सिर्फ एक देव ऐसे हैं जो  पत्ती वृक्ष पशु पक्षी भूत प्रेत यक्ष गण सभी से प्रेम करते हैं । उन्हें तो बस इतना ही पता है कि जो संसार सागर में आया है सब प्रेम के काबिल है । भोले बाबा सभी से निराला है उनके शरण में जो भी आया वह सभी को स्वीकार किया । 

शिव कथा में उन्होंने आगे बताया कि आहूत और पितरो ने हजार वर्ष तक भगवान शिव के दर्शन के लिए इंतजार कर रहे थे । जब आंख खुली तो बाबा ने सबसे पहले उन्हें बुलाया और उनसे आने का कारण पूछा । इस पर आहूत और पितरो ने कहा कि प्रभु संसार में सिर्फ पितृ पक्ष में ही हमारे परिजन हमारी सेवा करते हैं हमें भोजन और जल देते हैं कुछ ऐसी व्यवस्था कर दीजिए की पूरे वर्ष या सप्ताह में कम से कम एक दिन हमें भोजन और जल दे  जिससे हम तृप्त हो जाएं । तब बाबा ने कहा जब परिजन शिवलिंग पर जल चढ़ाएंगे तो शिवलिंग से निकली हुई जल आपको मिलेगी जिससे आप तृप्त हो जाएंगे । लोग कहते हैं कि गुरुदेव मुझे पितृ दोष हो गया है आहूत दोष हो गया है । शिव महापुराण का उमा संहिता कहती है कि जो मनुष्य शिवलिंग पर चढ़े जल से गिरा हुआ जल लेकर अपने घर अपने ऊपर छिड़कता है वह संपूर्ण दोष मुक्त हो जाता है । भोले बाबा के प्रति आप पूर्ण रूप से समर्पित हो जाइए आपके हर समस्या का समाधान हो जाएगा । वह सिर्फ भाव का भूखा है यदि आप सच्चे मन से और पूरे भाव से एक चावल का दान भी उन्हें समर्पित करते हैं तो वह उसे स्वीकार करता है।

 एक व्यक्ति ने एक पंडित जी कहा कि मैं सनातन धर्म को नहीं मानता । यह  जानना चाहता हु कि सनातन धर्म में गाय को माता कहा गया है जबकि वह पशु है ऐसा क्यों । तब पंडित जी ने बताया कि सनातन धर्म में सात को माता की संज्ञा दी गई है । जिसमें है वह मां जिन्होंने जन्म दिया वह माता कहलाती है । दूसरा सनातन धर्म में जो गुरु होते हैं उनकी धर्म पत्नी को मां की संज्ञा दी गई है । हमारे शहरों गांव में ब्राह्मण होते हैं जो पूजा पाठ करते हैं धार्मिक आचरण करते हैं उनकी पत्नी को मां की संज्ञा दी गई है । चौथा राजा की धर्म पत्नी होती है उन्हें भी सनातन धर्म में मां की संख्या दी गई है क्योंकि वह अपनी प्रजा को पुत्र की तरह देखभाल करती है । पांचवा गौ माता, गाय को मां की संज्ञा दी गई है क्योंकि वह अपने बछड़े को दूध पिलाने के साथ-साथ अपने दूध से संसार का भी पालन पोषण करती है । छठवीं धात्री माता है जो अपने बच्चों को दूध पिलाने के अलावा अन्य मां से उत्पन्न बच्चे के भी मां की तरह दूध पिलाकर पालन पोषण करती है और अंत में सातवीं माता वसुंधरा धरती को कहा गया है क्योंकि मां धरती सिर्फ देती है तथा किसी से कुछ भी नहीं लेती ।
उन्होंने बताया कि गौ माता जब आपके दरवाजे के पास खड़ा होती है तो वह सिर्फ एक रोटी और अन्न की लालसा करती है वह जब आपके घर के सामने मुंह करके खड़ा हो तो आपके रोटी या अनाज के आने का इंतजार करते हुए अपने सांस आपके घर के तरफ छोड़ती है और आपके घर के नकारात्मक ऊर्जा आपके ऊपर आने वाले विपत्ति को खींचकर अपने आप में समाहित कर लेती है ।

➡️🌺🔥इस महाशिवरात्रि को ग्रीन शिवरात्रि मनाएं🔥🌺⬅️

पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि लोग कहते हैं कि मैं जीवन में किसी का कोई कर्ज नहीं लिया लेकिन वह भूल जाता है की सबसे ज्यादा कर्जदार हम इस धरती इस वसुंधरा के हैं । मरने से पहले इस वसुंधरा का कर्ज अवश्य चुकाये । इसके लिए इस वसुंधरा में एक पेड़ जरूर लगाए ।

उन्होंने बताया कि आगामी महाशिवरात्रि फरवरी 2026 को जो आने वाला है । उसे पूरे विश्व में ग्रीन हरित शिवरात्रि के रूप में मनाया जाएगा । इस शिवरात्रि में जितने भी भक्तगण है उसकी तैयाारी अभी से कर दें अपनेे घर के गमला में बेल का वृक्ष  लगाएं। नवरात्रि से दो दिन पहले बेल वृक्ष की पूजा अर्चना करें और शिवरात्रि के दिन करोड़ों की संख्या में एक साथ अपने घरों के आसपास उचित स्थान पर बेल के वृक्ष लगाए । यह पौधा बड़ा होगा हम मर भी जाएंगे तो हमारे हाथों का लगा  बेल पौधा की  पत्ता शिवलिंग पर चढ़ेगी । बेल की पत्ती चढ़ाने वाले को तो पुण्य मिलेगा साथ-साथ हमें भी पुण्य मिलेगा तभी हम कर्ज से मुक्त होंगे । जो व्यक्ति भगवान शिव पर बेल की पत्ती चढ़ाता है वह तो धन्य है लेकिन चढ़ाने वाला के साथ-साथ वह भी धन्य हो जाता है जिन्होंने बेल का वृक्ष लगाया है । आप दूसरे के द्वारा लगाए हुए बेल वृक्ष की पत्ती को चढ़ाते हैं उससे अच्छा है कि अपने हाथों से लगाए हुए बेल वृक्ष की पत्ती को चढ़ाए तो ज्यादा पुण्य प्राप्त होगा । 

उन्होंने बताया कि रामायण के अंत में सब की मुक्ति और मोक्ष की कथा है  ।बजरंगबली को अजर अमर होने का वरदान मिला  लेकिन  मनथरा की कहीं भी कोई वर्णन नहीं है क्योंकि मंथरा आज भी इस धरती पर विराजमान है । वह बहुत बड़े-बड़े पद प्राप्त कर लेने के बाद भी आज भी नहीं सुधरे हैं । वह लोगों के कान भरने का काम आज भी कर रही है । मंथरा बड़े-बड़े पद प्राप्त कर लेने के बाद अपने सनातन धर्म को बदनाम करने में लगे हुए हैं । देश के अहित करने में लगे हैं समाज को नुकसान करने में लगे हैं जिनकी नियत खराब हो वह कितने भी बड़ा पद में रहे वह अपना स्वभाव नहीं बदल सकता । इसे समझे इस तरह के मंथरा से सावधान रहे । आज वह लोगों को धर्म परिवर्तन कराने में लगी हुई है आप मेरे साथ चलिए आपकी समस्याओं दूर होगा आपके दुख दर्द दूर होंगे लेकिन सच्चाई तो यही है कि देवाधिदेव महादेव से बढ़कर कोई देव नहीं है इस संसार में वह आपसे धन दौलत कुछ नहीं मांगता । वह सिर्फ आपके भाव का भूखा है । वह एक लोटा जल का भूखा है आप सच्चे मन से सच्चे भाव से उन्हें जल अर्पित करिए शिवलिंग से गिरने वाली जल को आचमन कर अपने शरीर पर लगाइए अपने घरों पर छिड़के आपके घरकी विपत्ति दूर होगी आपकी शरीर की दुख दर्द दूर होंगे ।

कथा में उन्होंने राजा दक्ष प्रजापति की कथा बताया

उन्हें बताया कि राजा दक्ष के घर में बेटों का जन्म हुआ । राजा दक्ष प्रजापति के बेटों को देव ऋषि नारद शिव महिमा की कथा बताया करते थे इससे राजा दक्ष नाराज थे । उन्होंने देवर्षि नारद को श्राप दे दिया कि तुम एक जगह स्थित नहीं रहोगे इधर-उधर घूमते रहोगे । तब से नारद मुनि एक जगह है स्थिर नहीं रहता ।
राजा दक्ष प्रजापति मां दुर्गा भवानी का बहुत बड़ा भक्त था मां भी उनकी सेवा से प्रसन्न थी उन्होंने मां भवानी से बेटी की मांग की । मां ने प्रसन्न होकर कहा दक्ष प्रजापति आप मेरी जैसी पुत्री चाहते हो मैं आपके लिए कहां पुत्री ढूंढने जाऊंगी उसके बजाय मैं स्वयं तेरे घर में तेरे धर्म पत्नी के गर्भ से बेटी के रूप में उत्पन्न होउगी ।

बेटी का आपके घर में यदि जन्म हो तो खूब प्रसन्न होना चाहिए क्योंकि जब मां एक बेटा को जन्म देती है तो मां का उम्र कम होती है और यदि बेटी जन्म देती है तो मां का उम्र बढ़ जाती है । बेटी जन्म लेती है तो माता को खूब सुख मिलता है । बेटी के जन्म होती है तो लोगों के आंखों में आंसू आ जाते हैं की बेटी हुई है और बेटा की जन्म पर खुशी मनाते हैं यह गलत है क्योंकि बेटी दो कुलों को पार लगती है । बेटी को खूब शिक्षा दें संस्कार दें उसे खूब पढ़ाये लिखाएं कॉलेज भेजें । उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने के लिए मदद भी करें ।

मेरा बेटियो से हाथ जोड़े कर निवेदन है कि मां बाप आप लोगों को हर सुख सुविधा देते है बस उनसे उनकी कन्या दान की हक मत छीनना । उन्हें कन्या दान का मौका जरूर देना । किसी का धन वैभव को देखकर इधर उधर मत भटक जाना । लोग तो चाहेंगे आप भटके आपका नुकसान हो लेकिन मां बाप का साथ कभी मत छोड़ना । उनके आत्म सम्मान को ठेस मत पहुंचाना ।
 कलयुग में बेटा पिता से मां बेटी से तो भाई-भाई के साथ बहन बहन के साथ लड़ाई झगड़ा कर रहा है । कभी किसी में स्थिरता या सद्भावना नहीं बन रही है । एक पिता ने अपने बेटे से कहा बेटा राम बनो श्रवण बानो तब बेटे ने कहा पिताजी आप कभी राम बानो कभी श्रवण बानो कहते हो कभी कृष्णा बनो क्यों नहीं कहा । तब उनके पिता ने कहा कृष्णा कि तुमने सिर्फ बाल लीला और गोपियों के साथ लीला को ही जाना है । कृष्ण को समझ नहीं पाए लेकिन जिन्होंने कृष्ण को समझ लिया उनका जीवन ही भवसागर से पार हो गया ।कृष्ण को जानना और समझना इतना आसान नहीं है । जितना श्रवण कुमार और भगवान राम को समझना और जानना ।

➡️🌺🔥शिव भक्ति का चमत्कार 🔥🌺⬅️

कथा में भक्तों ने अपने साथ हुए शिव चमत्कार के बारे में भी बताया ।

👉1. देववती मांडवी पति मुकेश मांडवी देवी नवागांव जिला कांकेर ने बताया की शादी के 10 साल हो जाने के उपरांत भी बच्चा प्राप्त नहीं हो रहा था । अस्पतालों का चक्कर लगाए रायपुर दुर्ग धमतरी जगदलपुर आदि के अस्पतालों में इलाज करने के लिए गई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ ।एक दीदी के बताने पर मैंने कि शिव महापुराण की कथा सुनी ।आपके बताए गए उपाय सफेद आंकड़े की जड़ का किया । पशुपतिनाथ के व्रत चालू किया पांचवें व्रत के बाद गर्भ ठहर गया । आज मेरा बच्चा पूर्णता स्वस्थ है उन्होंने बच्चों को लेकर पंडित प्रदीप मिश्रा के गोद में लाकर रख दी उन्होंने उन्हें आशीर्वाद दिया।

👉2 अनिमा रक्षित /स्वामी प्रताप कुमार रक्षित मालदा पश्चिम बंगाल से आए थे उन्होंने बताया कि मैं 2021 से कथा सुन रही हूं 2023 में पेट का दर्द हुआ सोनोग्राफी से पता चला कि पित्ताशय में पथरी है डॉक्टर ने बताया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। मैं ने पशुपति नाथ का व्रत करना चालू किया । शिवलिंग पर जल चढ़ाई शिवलिंग से निकले जल को पीती गई डॉक्टर के दवाई भी खाती गई ऑपरेशन से पहले अल्ट्रासाउंड हुआ जिससे मेरी पथरी गायब थी । ऑपरेशन की नौबत ही नहीं पड़ी ।
👉3 .शिवसागर आनंद प्रवाह सुभाष नगर दुर्ग ने बताया कि मेरी बहू ने मुझसे पूछती थी कि पापा जी मैंने बहुत पढ़ाई की है क्या मैं कभी जज बन पाऊंगी ।तो मैंने कहा यदि शिव महापुराण की कथा पंडाल में बैठकर सुनो जी और सच्चे मन से शिव आराधना करोगी तो जरूर जज बन पाओगी । मेरी बहू ने वैसा ही किया वह शिव महापुराण की कथा पंडाल में जाकर सुनी वहां की मिट्टी को तिलक लगाई उसका प्रतिफल मिला आज बहु जज बन गई है और आज पोता भी हो गया है ।

👉 4.गंगाबाई ठाकुर जुगेरा बालोद से आई थी उन्होंने बताया कि मेरी बेटी गांव में शिव महापुराण की कथा सुनती थी आपके बताएं अनुसार भोले बाबा के ऊपर जल चढ़ाती गई आज बेटी सरकारी स्कूल में शिक्षिका है । 

👉 5.संतोष कुमार साहू नगर पंचायत भाखड़ा कुरूद से आया था उन्होंने बताया कि मेरी बेटी गरिमा 2021 से नीट की तैयारी कर रही थी मंदिर जाती पूजा अर्चना करती झाड़ू पोछा करती । आज भगवान शिव ने मेरी बेटी का सुना आज बेटी का 2025 में नीट में सिलेक्शन हुआ अब वह एमबीबीएस की पढ़ाई दुर्ग में कर रही है ।

👉6 सरोज साहू सालिया पारा भानप्रतापपुर से आई थी । उन्होंने बताया कि मेरे नस में प्रॉब्लम थी कितने भी डॉक्टर को दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ । शिव महापुराण की कथा सुनी महादेव को एक लोटा जल चढ़ाना चालू की आज मेरी सारी समस्या दूर हो गई आज मैं पूर्ण स्वस्थ हूं ।
अंत में पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि बाबा के पंडाल में जब आप कथा सुनने आते हैं  । जहां पर भी जगह मिले जैसे भी जगह मिले बैठकर कथा सुनना । कथा के दौरान बाबा से प्रार्थना करें कि आपके शरीर का दुख आपके घर परिवार की समस्याएं का हल हो । आपके घर में सुख शांति आए आप संपन्न हो आपके परिवार आपके गांव सब सुख रहे । बाबा की कथा में वही आते हैं जिन्हें बाबा बुलाते हैं । कथा उपरांत जब भी अब घर जाने के लिए उठे जहां पर आप बैठे हो उसे जगह को प्रणाम करें वहां की मिट्टी का तिलक लगाए और हमेशा बाबा का स्मरण करें की बाबा हमें हमारी इच्छा पूर्ति में मदद करें ।
कथा प्रारंभ होने से पहले भक्तों के द्वारा कोई फल कोई बिस्किट कोई चॉकलेट तो कोई पानी के पाउच बांट रहे थे । पुलिस प्रशासन भी चुस्त नजर आई जहां शांति व्यवस्था बनाए रखने में उनका बेहतरीन योगदान था । कथा के दौरान निशक्त जनों और महिलाओं दिव्यांगों के लिए ई रिक्शा ऑटो की भी निशुल्क का सुविधा व्यवस्था की गई थी प्राथमिक उपचार के लिए चिकित्सा शिविर भी लगाई गई है ।आने वाले भक्तों के लिए अपनी कीमती सामान के स्वय देखभाल करने संभाल कर रखने के लिए भी एलाउंस मेट किया जा रहा था ।

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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