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“छेरीक छेरा _छेर बरतनी छेरछेरा!” “अरन बरन गोरसी बरन _तब्बे देबे तभ्हे टरन” दल्ली राजहरा में धूमधाम से मनाया गया छेरछेरा…!

दल्ली राजहरा

शनिवार 03 जनवरी 2026

भोजराम साहू 9893 765541

 

छत्तीसगढ़ का महापर्व छेरछेरा दल्ली राजहरा में बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है l छत्तीसगढ़ यूं तो त्यौहार और परंपराओं का प्रदेश है जहां हर त्यौहार भाईचारा समाज में एकता और अखंडता दर्शाता है । यहां के विभिन्न प्रकार की जातियां में विभिन्न परंपराएं हैं लेकिन हर परंपरा एक सांस्कृतिक सामंजस्य बनाकर रखे हैं । चाहे वह यादव समाज की राउत नाचा हो या गुरु घासीदास बाबा के अनुयायियों का पंथी नृत्य , सभी एकता और अखंडता का पर्याय है। चाहे सुआ गीत हो , ददरिया या कर्मा सभी सामूहिक रूप से पुरातन परंपरा को संजोए हुए हैं । यह एक पीढ़ी से दूसरी पूरी तक यह हस्तांतरित होते जा रहा है ।

 छेर छेरा छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण त्यौहार जिसे “दान दाता और याचक” के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है । यह त्यौहार हमें सिखाता है कि संपन्न व्यक्ति जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें ।

बच्चे और महिलाएं छुटपुट तौर पर कल शाम से ही घर-घर जाकर छेरछेरा मांगने के लिए दस्तक दे रहे थे l लेकिन आज बच्चे और महिलाएं अलग-अलग टोली में आकर छेरछेरा मांगने घर-घर जा रहे हैं l
क्योंकि यह छत्तीसगढ़ का ही त्यौहार है इसलिए इसे छत्तीसगढ़ी भाषा में ही छेरिक छेरा छेड़छेरा_ माइ कोठी के धान ला हेर हेरा

अरन- बरन गोरसी भरण_ जबभे देबे तबभे टरन

 जैसे बातों से याचक के द्वारा रिझाया भी जाता है l

 छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है l प्राय : इस समय तक सभी किसानों का धान का फसल खेत खलियान से घर में वापस आ जाता है l जिसकी खुशी में किसानों के द्वारा दान किया जाता है l यह त्यौहार उत्सव और उमंग का त्यौहार है l जहां  महिलाएं,बच्चे दान मिलने पर खुश होते हैं तो किसान अच्छी फसल मिलने पर अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा के नाम पर दान करते हैं l छेरछेरा महापर्व का त्यौहार पौष माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है l यह समय ठंड का मौसम समाप्त होने का रहता है l लोग इसलिए अभी खुशी मनाते हैं l गांव और शहरों में महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में वाद्ययंत्रों के साथ नृत्य कर छेरछेरा के नाम पर अन्न और धन की राशि मांगते हैं l लोग सहर्ष इसमें सम्मिलित होकर दान करते हैं l दान में मिले अन्न और रूपए पैसे को को एकत्र कर एक जगह सामूहिक भोजन कर आपसी भाईचारा का संबंध भी कायम रखते हैं l 
आज दल्ली राजहरा के आसपास के ग्रामों की महिलाएं एवं बच्चे टोली बनाकर घरों में तथा दुकानों में जा जाकर छेरछेरा मांग रहे थे । तो वहीं अड़जाल की युवतियों की टीम भी पारंपरिक वेशभूषा में सुआ गीत नाच कर छेरछेरा मांग रहे थे तो आधुनिक वाद्य यंत्र के साथ ग्राम दमकसा बरहेली की टीम भी शहर में नजर आई जहां महिला पुरुष एक साथ नृत्य करते हुए छेर छेरा मांग रहे थे ।

 ➡️🔥💥क्या है छेरछेरा का महत्व💥🔥⬅️

हिंदू धर्म में  छेरछेरा का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है इस दिन प्रात उठकर लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं इस दिन से विभिन्न धार्मिक स्नान की परंपराएं चालू होती है जिसमें कार्तिक स्नान मकर संक्रांति मांघ पूर्णिमा स्नान शिवरात्रि स्नान है। कहा जाता है कि आज के ही दिन भगवान शंकर ने मां अन्नपूर्णा से अन्न का दान मांगा था।

कहा जाता है कि भगवान शंकर संसार को यह संदेश देना चाहता था कि भोजन के बिना जीवन संभव नहीं है उन्होंने मां पार्वती के अन्नपूर्णा स्वरूप का दर्शन कर उनके सामने भिक्षा पात्र बढ़ाकर विनम्रता से अन्न की याचना की थी और आज ही के दिन मां अन्नपूर्णा ने शिव जी के पात्र में अन्न का दान दिया था । इस परंपरा को जारी रखते हुए आज के दिन दान पुण्य के कार्य करते हैं ।

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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