दल्ली राजहरा
सोमवार 9 फ़रवरी 2026
भोजराम साहू 9893 765541

 

राजहरा के ऐतिहासिक देव मंडई “श्री शिकारी बाबा मंडई” का आयोजन दिनांक – 10 फरवरी 2026 , दिन – मंगलवार स्थान – 256 चौक, वार्ड क्र. 05, शिकारी बाबा वार्ड में आयोजित किया जा रहा है। मेला उपरांत रात्रि कालीन कार्यक्रम का आयोजन रात्रि 9 बजे से किया गया है ।

  जिसमें बी. ए. फर्स्ट ईयर, आई लव यू, बेनाम बादशाह मोर जोड़ीदार 2, आई लव यू 2, माटी पुत्र, रंग रंगीले साथी रे, घर परिवार, गोलमाल, मितान 420 अर्जुन, बादशाह ईज़ बेक जैसे अनेक फिल्मों की अदाकारा मुस्कान स्टार नाईट की प्रस्तुति.. होगी । श्री शिकारी बाबा मंदिर उत्सव समिति ने नगर वासियों से निवेदन किया है कि इस आयोजन में दशकों की भीड़ बढ़ने की आशंका है इसलिए जल्दी पहुंच कर अपना साथ सुनिश्चित कर लें ।

 

        कौन थे शिकारी बाबा

        (जो उनके वंशज ने बताया)

शिकारी बाबा मूलतः आदिवासी गोड़ जाति के कुमेटी गोत्र से सम्बन्ध रखते थे उनके वंशज दयाराम कुमेटी पिता स्वर्गीय सुकलाल कुमेटी जो कि वर्तमान में ग्राम बोगर पोस्ट बोगर थाना भानु प्रतापपुर जिला कांकेर (उत्तर बस्तर ) में रहते हैं । उन्होंने इतना बताया कि वंशज तो हैं लेकिन कौन सी पीढ़ी के हैं वह उनको जानकारी नहीं है । बस उनको इतना पता है कि उनके दादा पर दादा ही शिकारी बाबा थे । जिसकी दल्ली राजहरा में पूजा अर्चना की जाती है । उन्होंने बताया कि बहुत समय पहले शिकारी बाबा दो भाई थे वे दोनों शिकार करने के लिए गए थे । छोटे भाई को लघु शंका की आवश्यकता हुई तो वह पेड़ की ओट में चले गए इस समय कोई जानवर आ गया बड़े शिकारी बाबा ने सोचा कि यह कोई शिकार है जो पेड़ की ओट में छुपा है उन्होंने भरमार बंदूक उठाया और गोली दाग कुछ समय बाद जब उनके भाई नहीं आया तब उन्होंने शिकार को उठाने के लिए घटनास्थल पर जाकर देखा तो भाई के साथ-साथ शिकार के भी प्राण पखेरू उड़ चुके थे ।उन्होंने उनकी जानकारी आकर गांव वालों को दिया । बात राजा के पास पहुंची क्योंकि वह समय राजा ही प्रमुख रूप से न्याय करता था । उन्होंने शिकारी बाबा से कहा की भाई की हत्या तुम ही ने की है इस संबंध में तुम क्या कहना चाहते हो शिकारी बाबा ने कहा मेरा निशाना अचूक है मैं आवाज से भी निशाना लगा सकता हूं मुझे ऐसा लगा की शिकार है और मैं वहां पर गोली दाग दी । राजा को यकीन नहीं हुआ बहुत दूर पर कोई चीज बांध दिया और शिकारी बाबा को भरमार बंदूक दी और उनसे निशाना लगाने को कहा शिकारी बाबा ने उस स्थल को एक ही गोली से निशान लगा दिया । तब राजा ने बड़े शिकारी बाबा को जीवन दान देकर छोड़ दिया ।

 मान्यता है कि शिकारी बाबा बहुत ही धर्मात्मा प्रवृत्ति की थे लोगों के सुख दुख में काम आते और उनकी जंगली जानवरों से भी रक्षा करते थे ।मान्यता अनुसार दोनों भाई की जहां पर शिकारी बाबा मंदिर है वहां पर पत्थर की गांव वालों ने मूर्ति बनाई थी वे आदिवासी थे और आदिवासी परंपरा के अनुसार अपने पूर्वजों की गुड़ी बनाने की परंपरा आज भी है ।और शिकारी बाबा के नाम से पूजा किया करते थे । जब राजहरा खदान समूह में लौह अयस्क का खनन हुआ तब उक्त मंदिर स्थल रेल लाइन के बीच में आ रहा था । बीएसपी प्रशासन ने कई बार मंदिर को हटाने का प्रयास किया लेकिन हर बार कुछ ना कुछ अनहोनी हो जाती थी । कि शिकारी बाबा उस स्थान से हटाना नहीं चाहता । प्रशासन ने उस स्थल से किनारे कर रेल लाइन को ले गया वहां पर आज भी नगर वासी प्रतिवर्ष देव मंडई मानते हैं । यह स्थल आज भी शिकारी बाबा के नाम से प्रसिद्ध है । यह भी कहा जाता है कि सच्चे मन से शिकारी बाबा में मांगी गई मन्नतें अवश्य पूरी होती है ।

 

 वर्तमान समय में आज भी उनके वंशज मंडई मेला के समय शिकारी बाबा मंदिर में अवश्य आते हैं ।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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