दल्ली राजहरा
सोमवार 27 अप्रैल 2026
भोजराम साहू 9893 765541
            श्री कामता प्रसाद शरण की कथा 

दल्ली राजहरा के सार्वजनिक हनुमान (घोड़ा) मंदिर समिति वार्ड नं 13 एवं समस्त वार्डवासी के तत्वाधान छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कथा वाचक श्री कामता प्रसाद शरण ग्राम कुदेरा दादर गरियाबंद का श्री राम कथा का आयोजन किया गया है । उनके द्वारा नगर वासियों को 25 अप्रैल से 27 अप्रैल तक तीन दिवसीय संगीत मय श्री राम कथा का आनंद प्राप्त दोपहर 3:30 से 6:30 तक प्राप्त होगा ।

   अतिथि के रूप में तोरण लाल साहू अध्यक्ष नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा राजू लखानी वरिष्ठ समाजसेवी सत्या साहू संयोजिका विश्व हिंदू परिषद विमला साहू उपाध्यक्ष तहसील साहू संघ गोविंद राम साहू उपाध्यक्ष तहसील साहू संघ उपस्थित थे ।
संगीत मय श्री राम कथा की दूसरे दिन आज कामता प्रसाद श्री शरण ने भगवान विष्णु की मोहिनी रूप में भगवान शंकर की रक्षा करना और भस्मासुर का भस्म हो जाना हनुमान जी के जन्म और देवी अहिल्या का सतीत्व हरण की कथा बताया ।

रामचरित्र मानस की कथा का श्री कामता प्रसाद श्री शरण ने भस्मासुर की कथा बतलाया जिसमें उन्होंने बताया कि भगवान शंकर के दूसरा नाम है भोले वह वास्तव में भोले और अत्यंत सरल स्वभाव के हैं । इतना भोले हैं कि जिन्होंने जो मांगा वह बिना सोचे समझे दे दिया कभी नहीं सोचा कि इस वरदान से नुकसान होगा या फायदा भोले बाबा इतने भोले हैं, जिनकी कई कथाएं में से एक कथा में आपको बता रहा हूं वह है भस्मासुर की कथा ।
 एक बार भस्मासुर नाम के राक्षस ने घोर तपस्या की उनकी तपस्या से प्रकट होकर भगवान शंकर ने उन्हें वरदान मांगने को कहा तो भस्मासुर ने कहा कि मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि मैं जिनके सिर में हाथ रख दूं वह वहीं पर भस्म हो जाए। अब शंकर भगवान ने सोचा नहीं की इन्होंने जो मांगा है उसे इन्हें दु कि नहीं दूं। बस बोल दिया लो भाई रख लो एव मस्तू । जैसे ही उन्होंने एव मस्तु कहा भस्मासुर कि मानो मनोकामना पूर्ण हो गई ।
अब भस्म सुनने कहा भगवान ने मुझे वरदान तो दे दिया सचमुच में वरदान दिया है कि मेरे साथ मजाक कर रहा है क्यों ना सबसे पहले भगवान शिव के सिर पर ही हाथ रखकर देख लूं उन्होंने भगवान शिव के सिर में हाथ रखने के लिए दौड़ा । भगवान शिव समझ गए अब तो बहुत गड़बड़ हो गया गलत आदमी को वरदान दे दिया । अब यहां से भगाने के अलावा कोई चारा नहीं है नहीं तो भस्मासुर अगर सिर में हाथ रख दिया तो मैं भी यही पर भस्म हो जाऊंगा भगवान शिव भागने लगे । आगे आगे भगवान शिव दौड़ रहे हैं पीछे-पीछे भस्म सुर दौड़ रहा है ।

 इधर भगवान शिव मन ही मन भगवान विष्णु को याद कर रहा है कि मुझे बचा लो जब भगवान विष्णु को भगवान शंकर के साथ घटी घटना के संबंध में जानकारी हुआ तब उन्होंने मां लक्ष्मी से कहा शंकर भगवान विकट समस्या से घिर गया है उन्हें बचाने के लिए मुझे जाना पड़ेगा मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से कहा अगर बचाना ही है तो स्वर्ग की अप्सरा की तरह मोहिनी के रूप लेकर जाओ नहीं तो पता चला कि भस्मासुर ने आपको भी भस्म कर दिया। भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी की बात मानकर मोहनी रूप लेकर जहां पर भस्मासुर और शिव दौड़ रहे थे उस जगह की ओर जाने लगे । इधर भगवान शंकर एक पेड़ साजा पेड़ के खोल में अपना सर फंसा दिया ताकि भस्मासुर उनके सिर पर हाथ ना रख सके और भस्मासुर भी उनके सर ढूंढने में लगा है कि जैसे ही भगवान शंकर सर बाहर निकाले और उनके सिर के ऊपर में हाथ रख कर भगवान शिव को भस्म कर दे ।
 
इधर भगवान  विष्णु  मोहिनी का रूप लेकर जब भस्मासुर के सामने प्रकट हुए तब भस्मासुर उनकी सुंदरता को देखकर मोहित हो गए और उन्होंने मोहनी रूपी भगवान विष्णु के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। मोहिनी रूप में भगवान विष्णु ने कहा मैं तभी तुमसे शादी करूंगी जब तुम नृत्य में मुझे हरा दोगे। भस्मासुर तैयार हो गया और जैसे-जैसे मोहिनी नृत्य करते जाती उसी तरह भस्मासुर भी नृत्य करते जाता अंत में नृत्य करते-करते मोहनी सर पर उंगली रख कर नृत्य करने लगी भस्मासुर भी उसी तरह अपने सिर पर उंगली रखकर नृत्य करने लगा लेकिन हाथ रखते ही भस्मासुर भस्म हो गया।मोहिनी रूप में भगवान विष्णु ने भगवान शंकर से कहाअब तो बाहर निकालो भस्मासुर भस्म हो चुका है भगवान शंकर ने भी मोहिनी रूप में भगवान विष्णु को देखा तो वह मोहित हो गए ।

कथा के मध्य उन्होंने दो प्रसंग बताएं पहला उन्होंने कहा कि मित्र बनो तो कृष्ण और सुदामा की तरह । सुदामा ऋषि पुत्र होने के कारण जानता था कि श्रापित चना के खाने से जग के पालनहार बनने वाले भगवान श्री कृष्णा भी श्रापित हो जाएंगे । उन्होंने पूरी श्रापित चना को खाकर उनका श्राप स्वयं ग्रहण कर लिया और दरिद्र हो गए । वहीं भगवान श्री कृष्ण ने अपने मित्र की दरिद्रता को इस तरह से दूर किया की सुदामा को भनक तक ही नहीं लगने दिया ।
उन्होंने बताया कि मित्र बंदर और लालची मगरमच्छ की तरह नहीं होना चाहिए । जिस तरह लालची मगरमच्छ ने अपनी पत्नी की इच्छा पूर्ति करने के लिए अपने परम मित्र बंदर को अपनी पत्नी के हाथों उनके कलेजा खाने के लिए सौंपने वाला था । लेकिन बंदर की चतुराई ने उनकी जान बख्श दी। उन्होंने राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की महानता के बारे में बताया एक समय ऐसा आया जब अब्दुल कलाम अपनी बहन की जेवर बेचकर इंटरव्यू देने के लिए आया था । इंटरव्यू में वह फेल हो गया । वह मौत को आलिंगन करने वाले थे उन्हें साधुओं ने किसी तरह से बचा लिया और उन साधु की संगति ने उनके जीवन को नई मोड़ दी । उन्होंने उन्हें पढ़ने के लिए गीता दिया अब्दुल कलाम गीता भी पढ़े और कुरान भी उनके दृढ़ इच्छा शक्ति और भगवान के प्रति विश्वास ने उन्हें मिसाइल मैन और देश का राष्ट्रपति बना दिया । उन्होंने सच्ची निष्ठा के साथ देश की सेवा की ।
कामता प्रसाद शरण ने कहा कि भगवान के शरण में जाने से आपकी मनोकामना तो पूर्ण होती है साथ ही आपको प्रसिद्ध भी ऐसे मिलती है जिनकी अपने कल्पना नहीं की होगी जो राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को मिली यह श्रीमद् भागवत महापुराण का परिणाम है । कथा के अंत में उन्होंने आज की शिक्षा पद्धति पर भी तंज कसते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था सरकारी नीति के कारण कमजोर होती जा रही है । बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं उनकी बुद्धि का विकास नहीं हो पा रहा है क्योंकि सरकार तो शिक्षकों को उन्हें क्रमन्नति का आदेश दे रखा है कि किसी भी बच्चे को फेल नहीं करना है यही उनकी नींव को कमजोर करता जा रहा है । कथा में श्री कामता प्रसाद शरण ने देवी अहिल्या की कथा भी बताई तथा हनुमान जन्म का कथा भी उन्होंने बताया । 
मंदिर निर्माण मे सहयोग के लिए बढ़ हैं हाथ 

अंत में हनुमान मंदिर जिसे घोड़ा मंदिर के नाम से जाना जाता है उनके जीर्णोद्धार के लिए दानदाताओं ने आज भी अपनी दानशीलता का परिचय दिया जहां कोखन मिश्रा के द्वारा₹10000 दिलीप जैन के द्वारा 5100 नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू के द्वारा अध्यक्ष निधि से 10 लाख रुपए निर्माण के लिए देने की बात कही । मंदिर निर्माण की शुरुआत कथा वाचक श्री कामता प्रसाद शरण के द्वारा 11000 रुपए देने से शुरुआत हो चुकी है ।

 

आज होगा कथावाचक श्री कामता प्रसाद शरण जी के प्रवचन मंच पर लोक गायिका ज्योति सोनी का भजन प्रस्तुति ।
छत्तीसगढ़ प्रख्यात कथा वाचक कामता प्रसाद शरण के सानिध्य में दल्ली राजहरा में वार्ड 13 में आयोजित होने वाले प्रवचन कार्यक्रम में दिनांक 27 अप्रैल को संध्या 5 बजे विशेष हिंदी व छत्तीसगढ़ी भजन अपने कलाकारों के साथ छत्तीसगढ़ की लोकगायिका ज्योति सोनी प्रस्तुति देंगी । ज्योति सोनी अपनी मधुर आवाज और लोक संस्कृति में ओत प्रोत भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का सुंदर संगम देखने को मिलेगा। ज्योति सोनी रायपुर दूरदर्शन में वंदे मातरम् गीत की प्रस्तुति दे चुकी है।ज्योति सोनी के संगीत के मार्गदर्शक छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री मोहन सुंदरानी जी व दल्ली राजहरा निवासरत गीत व संगीतकार भुवन साहू जी है।

आयोजक अध्यक्ष विजय सिन्हा जी व समिति आयोजकों के अनुसार इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावनाएं है। सभी श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा वाचक कामता प्रसाद शरण जी का कथा व लोक गायिका ज्योति सोनी के भक्ति गीत का लाभ लेने की अपील की गई है।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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