दल्ली राजहरा गुरुवार 15 अक्टूबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541 आस्था हो तो ऐसी, भक्ति हो तो ऐसी। दल्ली राजहरा के लोडिंग साइडिंग के नाम से प्रसिद्ध वार्ड नंबर 20 गांधी चौक का दुर्गा उत्सव पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। शायद पूरे बालोद जिले में यह पहला और इकलौता ऐसा स्थान है जहां नौ कन्या के प्रति इतनी श्रद्धा और आस्था दिखाई जाती है।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/10/VID-20261015-WA0028.mp4इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पर गांधी चौक साइडिंग में मनोकामना घी ज्योति कलश की संख्या 17 एवं मनोकामना तेल ज्योति कलश की संख्या 104 कुल 121 ज्योति कलश की स्थापना की गई है। गांधी चौक में मां दुर्गा उत्सव का यह 54 वां वर्ष है। समिति के वरिष्ठ सदस्य रूपलाल साहू ने बताया कि गांधी चौक में मां दुर्गा की स्थापना की शुरुआत सन 1973 में की गई थी। यहां पर काम करने वाले कर्मचारी गण जो कि रेलवे वैगन में राजहरा खदान समूह से लाकर एकत्र की गई आयरन अयस्क को भिलाई स्टील प्लांट के लिए लोड करते थे, उन्होंने थोड़ी-थोड़ी राशि इकट्ठा कर मां दुर्गा की स्थापना की थी। उन्हीं के द्वारा यहां रामलीला की भी शुरुआत की गई थी। साथ ही दल्ली राजहरा के ऐतिहासिक साइडिंग मेला जो कि प्रतिवर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है तथा नवरात्रि के दसवें दिन मनाया जाने वाला दशहरा पर्व की शुरुआत भी इन्हीं कर्मचारियों के द्वारा किया गया था। जिसमें प्रमुख रूप से खुमान साहू, खोरबाहरा साहू, रूपलाल साहू जैसे कई नाम हैं। वर्तमान पीढ़ी इसे आज भी जारी रखे हुए है।उन्होंने बताया कि मां दुर्गा की स्थापना के लिए उन्हीं कर्मचारियों द्वारा निर्मित बजरंगबली मंदिर जिसे घोड़ा मंदिर के नाम से जाना जाता है, वहां के कुंड से जल लाकर मां दुर्गा के लिए स्थापित ज्योति कलश में डालकर प्रज्वलित किया जाता है।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/10/VID-20261015-WA0001.mp4अनोखी परंपरा की शुरुआत कैसे हुई । 2005 के आसपास जब सुखीराम खरे दुर्गा स्थापना समिति के अध्यक्ष थे, उन्होंने नव कन्या पूजन को नया रूप देने के लिए एक विशेष परंपरा की शुरुआत की। उनके नेतृत्व में नौ कन्या को चंडी मंदिर से दुर्गा मंदिर लाने के लिए श्रद्धालु गण जमीन पर लेटते हैं। उनके ऊपर से होते हुए नौ कन्या गुजरती हैं। भैरव बाबा भी इनके साथ रहते हैं। लोगों की संख्या इतनी रहती है कि नौ कन्या का पैर जमीन पर नहीं पड़ता। एक के बाद एक सैकड़ों की संख्या में लोग जमीन पर लेटते जाते हैं जो कि आकर्षण का केंद्र रहता है।चंडी मंदिर से लेकर दुर्गा मंदिर के बीच की दूरी लगभग 700 से 800 मीटर है। इतनी दूरी पर भी एक भी इंच जगह नहीं बचती कि मां के पैर जमीन पर पड़े। यह कौतूहल का विषय रहता है। यदि कहीं पर कोई श्रद्धालु नहीं आ पाते तो आयोजक समिति का कोई भी सदस्य किसी भी स्थिति में हो वहां पर लेट कर मां के चरण को जमीन पर पड़ने नहीं देता और यह अनवरत चलता रहता है जब तक मां चंडी मंदिर से नौ कन्या की यात्रा मां शारदा के स्थापना स्थल तक पूरी न हो जाए।आस्था का प्रतीक है गांधी चौक की मां दुर्गा लोगों ने बताया कि नौ कन्या के पैरों के नीचे अपने आप को समर्पण करने से उनकी मनोकामना पूर्ण होती है तथा शारीरिक दोष भी दूर होता है। किसी के शरीर में यदि आसुरी शक्ति का वास हो तो वह समाप्त हो जाता है। ऐसा महसूस होता है कि मां स्वयं हमें आशीर्वाद दे रही हैं। गांधी चौक स्थित सार्वजनिक मां चंडी मंदिर की मान्यता भी कोई कम नहीं है। मंदिर के ऊपर पंचमुखी बजरंगबली विराजमान हैं। उनका रौद्र रूप देखते ही बनता है। कहते हैं कि आसुरी शक्ति या फिर गलत इरादे से कोई व्यक्ति मां के मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता ना ही कोई एक टक नजर लगाकर बजरंगबली को देख सकता है।क्या होगा कार्यक्रम पार्षद गांधी चौक वार्ड क्रमांक 20 रोशन पटेल ने बताया कि सार्वजनिक दुर्गा उत्सव गांधी चौक का कार्यक्रम इस प्रकार होगा। हवन अष्टमी तिथि सोमवार 19 अक्टूबर 2026 इसी दिन सुबह 9 बजे गाजे बाजे के साथ मां दुर्गा मंदिर साइडिंग से भक्तगण सार्वजनिक मां चंडी मंदिर गांधी चौक जाएंगे। वहां पर तैयार बैठी मां दुर्गा के स्वरूप नौ कन्या के साथ भैरव बाबा का मुख्य अतिथि के द्वारा पूजा अर्चना होगी। उसके बाद बहु प्रतीक्षित नव कन्या एवं भैरव बाबा को मानव सेतु बनाकर मां दुर्गा स्थापना स्थल साइडिंग लाया जाएगा जहां पर महा अष्टमी हवन होगा। हवन उपरांत नौ कन्या भोज होगा तथा दशहरा का आयोजन प्रतिवर्ष की भांति दशहरा के दूसरे दिन 21 अक्टूबर दिन बुधवार शाम रावण दहन का आयोजन होगा एवं रात्रि को छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध श्री दाईं के दुलरवा नवरत्न जस झांकी परिवार पटपर का आयोजन घोड़ा मंदिर समीप मैदान पर किया गया है।Spread the lovePost navigationदल्ली राजहरा-सम्यक बौद्ध महासभा के तत्वावधान में 70 वां धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । आमाडुला के टूटे बांध का निरीक्षण करने पहुंचे जल संसाधन विभाग, जल्द पूरा करने का आश्वासन ।