दल्ली राजहराशुक्रवार 01 मई 2026भोजराम साहू 9893 765541 “आज मजदूर दिवस पर विशेष ““जय जवान जय किसान” देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व.लाल बहादुर शास्त्री जी ने 1965 में यह नारा दिया था ।देश के विकास के लिए बाद में महसूस हुआ की जय जवान जय किसान के साथ जय विज्ञान भी जोड़ा जाए। इसलिए भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई ने 1998 यह लाइन जय जवान जय किसान के बाद जय विज्ञान जोड़ दिया । लेकिन सोचने वाली बात यह है जय जवान जय किसान और जय विज्ञान से ही क्या देश की विकास हो जाएगी..? क्या बिना मजदूर के किसान की अनाज और जवानों के लिए औजार तथा विज्ञान के लिए विकास की परिकल्पना की जा सकती है ..? यह सब असंभव है क्योंकि मजदूरो के बिना कहीं भी कुछ भी विकास नहीं हो सकता । हर पल हर कदम पर मजदूरों की आवश्यकता है चाहे कृषि कार्य हो कल कारखाने हो विज्ञान के लिए भौतिक सामानों की निर्माण हो ।“ईंटों में बसी है जिनके पसीने की कहानी,लोहे में छुपी है जिनके हाथों की रवानी !कभी सड़क, कभी इमारत, कभी खेतों की जान,ऐसे हर मजदूर को हमारा क्रांतिकारी अभिनंदन !!”मजदूर दिवस (1 मई ) हर उस मेहनत करने वालों को याद करने का दिन है l जिस पर हमारी पूरी नीव टिकी हुई है l चाहे सड़के हो कल कारखाना हो बड़ी इमारतें हो खेतों में लहरा रहे हरियाली हो सभी के पीछे मजदूरों का खून पसीना लगा हुआ है lअंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस श्रमिकों के अधिकार और योगदान को समर्पित है l जो समाज और अर्थव्यवस्था का आधार है l मजदूरों के मेहनत और संघर्षों ने बेहतर परिस्थिति उसके वेतन और सामाजिक न्याय की नीव रखी l यह अवसर हमें श्रमिकों के महत्व को याद दिलाता है और उनके हकों के लिए एकजुट होने की प्रेरणा देता है ताकि सभी को सम्मान जनक और सुरक्षित कार्य वातावरण मिल सके l मजदूर आन्दोलन की शुरुआत मजदूर आंदोलन का शुरुआत अमेरिका के शिकागो शहर के हेमबट स्थान में हुआ था l उस समय मजदूर गुलामी प्रथा से जूझ रहे थे l उनसे 12 से 16 घंटे का काम लिया जाता था और वेतन का कोई निर्धारण नहीं था l मजदूर का शोषण हो रहा था l ईस अन्याय के खिलाफ श्रमिक ने एक होकर आवाज उठाया और आंदोलन कर दिये जिसके विरोध में मालिकों ने प्रशासन के साथ मिलकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे श्रमिकों पर बम विस्फोट किया गया l जिसके कारण पुलिस और प्रदर्शनकारीयो के बीच झड़प हुई l इस दिल दहला देने वाले घटना में कई लोग मारे गए l 1889 में पेरिस के श्रमिक संगठनों ने एक बैठक के दौरान यह फैसला लिया कि 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा तब से परंपरा शुरू हुई l आन्दोलन का परिणामशिकागो में हुए आंदोलन से जो मजदूरों को फायदा हुआ वह यह रहा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक देशों ने यह कानून बनाया है जिसमें (1 ) 8 घंटे का कार्य दिवससबसे बड़ा बदलाव था काम के घंटों का नियम तय होना। कई देशों में 8 घंटे का कार्य दिवस कानूनी रूप से लागू हुआ, जिसने श्रमिकों के जीवन को बेहतर बनाया। ( 2 )श्रम कानूनों का विकासमजदूर दिवस ने श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल, ओवरटाइम भुगतान, और छुट्टियों जैसे अधिकारों को लागू करने में मदद की। (3 ) ट्रेड यूनियनों का गठनश्रमिकों ने संगठित होकर ट्रेड यूनियन बनाए, जो उनके हितों की रक्षा करते हैं। मजदूरों को मिलने वाली वेतन सही समय पर मिल रहा है मालिकों के द्वारा मजदूरों पर किए जा रहे हैं शोषण पर अंकुश लगा है मजदूरों को स्वास्थ्य सुविधा और भविष्य सुनिश्चित करने के लिए ग्रेजविटी जैसे प्रावधान लागू हुआ है । ट्रेड यूनियन के कारण मालिकों के द्वारा की जा रही दमन कार्यकारी नीतियां खत्म हो चुकी है ।4 ) सामाजिक सुरक्षाःकई देशों में पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, और बेरोजगारी लाभ जैसे सामाजिक सुरक्षा उपाय लागू हुए। (5 ) जागरूकता और एक जुटतामजदूरों के आंदोलन ने उनमें एकजुटता और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई। श्रम कानूनभारत सरकार ने 2020 में भारत सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नई श्रम संहिताएं बनाईं थीं। इनमें ये प्रमुख हैं- (1.) मजदूरी संहितायह संहिता मजदूरी से संबंधित कानूनों को समेकित करती है, जिसमें न्यूनतम मजदूरी, बोनस भुगतान और समान पारिश्रमिक शामिल हैंl (2.) औद्योगिक संबंध संहितायह संहिता औद्योगिक विवादों और श्रम संगठनों से संबंधित कानूनों को समेकित करती है. (3.) व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहितायह संहिता कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति से संबंधित कानूनों को समेकित करती है. (4.) सामाजिक सुरक्षा संहितायह संहिता सामाजिक सुरक्षा से संबंधित कानूनों को समेकित करती है, जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं शामिल हैं.इन चार श्रम संहिताओं का उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना और एक समान कार्यस्थल बनाना lएक ओर सरकारी तंत्र इस कानून को मजदूर हितैषी मान रहे हैं दूसरी ओर श्रमिक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं इस कानून लागू करने से मालिकों को मजदूरों को शोषण करने का अधिकार मिल जाएगा l मजदूर अपने हक और अधिकार के लिए कभी विरोध नहीं कर पाएंगे तथा मजदूरों की रोजगार सुनिश्चित नहीं हो पाएगी l दल्ली राजहरा का आंदोलनदल्ली राजहरा आंदोलन की नगरी रही है l सर्वप्रथम आंदोलन शहीद कामरेड शंकर गुहा नियोगी के नेतृत्व में हुआ था जब खदान में काम करने वाले लोग झुग्गी झोपड़ी बनाकर रहते थे l प्रबंधन ठेकेदार और मजदूरों के बीच झुग्गी झोपड़ी मरम्मत के नाम से ₹100 देने का करार हुआ था l लेकिन ठेकेदार के द्वारा मुकर जाने के कारण छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के बैनर तले मजदूरों ने आंदोलन कर दिया य़ह ऐतिहासिक आंदोलन था l इस आंदोलन के नेतृत्व कर रहे कामरेड शंकर गुहा नियोगी को प्रशासन ने गिरफ्तार कर लिया l मजदूर उग्र हो गए और परिवार सहित इस आंदोलन में बैठ गए प्रशासन ने आंदोलनरत मजदूरों पर 2 -3 जून 1977 को गोली चला दी l जिसमें बालक सुदामा सहित 11 लोग शहीद हुए थे l छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ श्रमिक के आंदोलन के बदौलत ही ₹ 2 प्रति टन का जो ट्रैकों में लोडिंग करने वाले श्रमिकों को मेहनताना मिलता था l वह 237 रुपए प्रति टन हुआ था l इन्हीं आंदोलन के बदौलत 31 मई 1996 को 3300 श्रमिकों का डिपार्टमेंटल हुआ था l जो की मजदूरों के हित में ऐतिहासिक फैसला था l श्रमिक संगठनों के नेतृत्व में और कई आंदोलन भी हुए जिसमें मजदूरों को इसका फायदा भी हुआ l वर्तमान में मिलने वाले मेडिकल सुविधा माइंस भत्ता रात्रि कालीन भत्ता जैसे सुविधा भी आंदोलन के बदौलत श्रमिकों ने प्राप्त की है l लेकिन आज भी श्रमिक को निश्चित समय मिलने वाली वेतन से वंचित है l ना उन्हें समय पर दीपावली का बोनस मिल पाता है और ना ही अन्य सुविधाएं lहज़रत पैगंबर मोहम्मद साहब ने मजदूरों को उनकी मेहनत का उचित मेहनताना समय पर देने पर बहुत ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा कि “मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसका मेहनताना दे दो।” चाहे कोई भी क्षेत्र हो कृषि के क्षेत्र हो भवन निर्माण कारखाना मजदूर वर्ग शोषित वर्ग के रूप में उभरकर आ रहे हैं l सरकार को इस ओर उचित कदम उठाना चाहिए l ताकि मजदूरों को सही समय पर उनका सही वेतन का भुगतान हो सके l सरकार योजना ऐसे बनाएं जिसमें कंपनी मजदूर वर्ग सभी के हक और अधिकार सुनिश्चित हो जिससे विवाद की स्थिति ना बने l 4 श्रम संहिता पर श्रमिक संगठनो का मुख्य आरोप?1. ‘हायर एंड फायर’ को कानूनी मंजूरी: इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड में 300 तक कर्मचारियों वाली कंपनियों को सरकार की अनुमति बिना छंटनी की छूट दे दी गई है। पहले ये सीमा 100 थी। संगठनों का कहना है कि इससे 90% फैक्ट्रियों में मजदूरों की नौकरी असुरक्षित हो जाएगी।2. हड़ताल का अधिकार कमजोर नई संहिता में किसी भी हड़ताल से 14 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य है। साथ ही विवाद के दौरान हड़ताल पर रोक है। केंद्रीय संगठनों का कहना है कि ये हड़ताल के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने जैसा है।3. काम के घंटे 8 से 12 OSH कोड में काम के घंटे 12 तक करने और हफ्ते में 4 दिन काम का प्रावधान है। “12 घंटे काम कराकर मजदूर को बंधुआ बनाने की तैयारी है। ओवरटाइम का पैसा भी मालिक की मर्जी पर होगा।”4. ठेका प्रथा को बढ़ावाकॉन्ट्रैक्ट लेबर को स्थाई करने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। मजदूर संगठनों का कहना है कि सरकार ने फैक्ट्री एक्ट, मिनिमम वेज एक्ट, ट्रेड यूनियन एक्ट समेत 44 कानूनों को खत्म कर 4 संहिता बना दी। आरोप है कि पुराने कानूनों में मजदूरों को जो सुरक्षा मिली थी, नई संहिताओं में पूंजीपतियों के हक में कमजोर कर दिया गया। “देश के 50 करोड़ श्रमिकों में से 90% असंगठित क्षेत्र में हैं। नई संहिता से इन पर सबसे ज्यादा मार पड़ेगी । “सरकार का पक्ष – 4 श्रम संहिताओं और छंटनी कानून परसरकार नई श्रम संहिताओं को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘मजदूर हित’ दोनों के लिए जरूरी बता रही है। श्रम मंत्रालय और सरकार के तर्क ये हैं:1. छंटनी नियम पर सरकार का तर्कक्या कहती है सरकार ‘हायर एंड फायर’ नहीं, ‘सुरक्षा के साथ लचीलापन’ इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड में 300 कर्मचारियों तक की सीमा बढ़ाने से MSME सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। छोटी कंपनियां बंद होने से बचेंगी और नई नौकरियां पैदा होंगी।2. मुआवजा तीन गुना छंटनी होने पर मजदूर को 15 दिन की जगह 45 दिन का वेतन प्रति साल मुआवजा मिलेगा। साथ ही री-स्किलिंग फंड बनाया गया है।3. पुराना कानून अप्रासंगिक: 100 की सीमा 1950 में बनी थी। अब फैक्ट्रियां बड़ी हो गई हैं। 300 की सीमा से 74% इंडस्ट्रियल यूनिट कवर हो जाएंगी और रोजगार बढ़ेगा।2. 44 कानून हटाकर 4 संहिता क्यों बनाई – सरकार का जवाबकानूनी जटिलता खत्म: 44 अलग-अलग कानून, 1000+ धाराएं थीं। मालिक और मजदूर दोनों कन्फ्यूज रहते थे। अब 4 संहिता से ‘वन नेशन, वन लेबर लॉ’ होगा।2. सभी मजदूरों को कवर: पुराने कानून सिर्फ संगठित क्षेत्र के 10% मजदूरों पर लागू होते थे। नई सोशल सिक्योरिटी कोड में गिग वर्कर, प्लेटफॉर्म वर्कर, घरेलू कामगार, प्रवासी मजदूर समेत 50 करोड़ असंगठित मजदूरों को ESI, PF, मैटरनिटी बेनिफिट देने का प्रावधान है।3. डिजिटल इंडिया: सारे रजिस्टर, रिटर्न, लाइसेंस अब ऑनलाइन होंगे। इंस्पेक्टर राज खत्म होगा, भ्रष्टाचार रुकेगा।. काम के घंटे और वेतन पर सरकार का पक्ष1. 12 घंटे काम अनिवार्य नहीं: OSH कोड में 12 घंटे की अनुमति है पर हफ्ते में 48 घंटे की सीमा वही है। यानी 4 दिन काम + 3 दिन छुट्टी। मजदूर की सहमति जरूरी है।2. न्यूनतम वेतन गारंटी: वेज कोड में पहली बार सभी मजदूरों के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन तय होगा। राज्य उससे कम नहीं कर सकते। समय पर वेतन न देने पर जुर्माना है।3. महिला सुरक्षा नाइट शिफ्ट में महिलाओं को काम की छूट, पर सुरक्षा की जिम्मेदारी मालिक की। मैटरनिटी लीव 26 हफ्ते बरकरार।4. हड़ताल और यूनियन पर सरकार का रुख1. हड़ताल पर रोक नहीं, नोटिस जरूरी 14 दिन नोटिस से औद्योगिक शांति आएगी। अचानक हड़ताल से उत्पादन रुकता है, देश का नुकसान होता है।2. ‘एक कंपनी, एक यूनियन’ नेगोशिएटिंग यूनियन का प्रावधान ताकि मजदूर की बात एक आवाज में रखी जाए। 51% मेंबर वाली यूनियन को मान्यता। Spread the lovePost navigationआंखों में कई ख्वाब, दिल में कई हसरतें बाकी है , मैं कैसे थक जाऊं अभी कई मंजिले बाकी है !! संडे मेघा स्टोरी में आज पढ़िए भिलाई सेक्टर वन में रहने वाली प्रभा ठाकुर हुसैन की कहानी l 24वीं राज्य स्तरीय म्यू थाई चैंपियनशिप दल्लीराजहरा में सम्पन्न , जिला बालोद द्वितीय स्थान पर रहे !