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आज “शिक्षक दिवस” के उपलक्ष में शिक्षा के प्रति समर्पित गुरु से गोविंद बन गए दो शिक्षकों की कहानी “हमारा दल्ली राजहरा- एक निष्पक्ष समाचार” चैनल में..l

दल्ली राजहरा शुक्रवार 5 सितंबर 2025 भोज राम साहू 98937 65541

शिक्षकीय कार्य एक ऐसा परमार्थ का काम है जिसके साथ-साथ आप जीविकोपार्जन भी कर सकते हैं l जो व्यक्ति इसको सिर्फ अपने जीविकोपार्जन का माध्यम समझ लिया , वह तो शिक्षक बनकर रह गया l लेकिन जिन्होंने इसे परमार्थ का काम माना वह गुरु से गोविंद बन गये l
ऐसे ही शिक्षक की कहानी आपको आज शिक्षक दिवस के अवसर पर बता रहे हैं जिन्होंने एक गुमनामी में रहे स्कूल की कायापलट कर रख दी l जो स्कूल आज से 2 साल पहले विभिन्न समस्याओं से ग्रसित था l शौचालय तो था लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं थी स्कूल परिसर में पुराने टूटे हुए बिल्डिंग ऐसे नजर आते थे जैसे कोई भुतहा खंडहर बन गया हो l जहां नन्हे मुन्ने बच्चे पढ़ने के बजाय डरे सहमे से भूतीया कहानी का नज़ारा अपने कोमल मन में देखते थे l इन सब को बदलकर 2 साल की कड़ी मेहनत , जनप्रतिनिधियों की मदद और गांव वालों की सहयोग से एक सुंदर आदर्श स्कूल के रूप में परिवर्तन कर दिया l आज वहां 66 बच्चे दो सहायक शिक्षक एक प्रधान पाठक बच्चों को बेहतरीन शिक्षा दे रहे हैं l

आज आपको बता रहे हैं डौंडी विकासखंड से मात्र 15 किलोमीटर और दल्ली राजहरा से 4 किलोमीटर की दूरी पर बसे प्राथमिक शाला अरमूरकसा के प्रधान पाठक छत्रपाल देशमुख की कहानी..!

जो कि मूलतः ग्राम चिगरी पोस्ट अंडा जिला दुर्ग के निवासी हैं l 28 सितंबर 2022 को उनका स्थानांतरण प्रधान पाठक के रूप में प्राथमिक शाला अरमूरकसा में हुई थी l उनके आने से पहले की स्थिति के बारे में तो आपको अवगत हो ही चुका है l उनके द्वारा सर्वप्रथम 20 वर्ष पहले से खंडहर पड़ी पुराने स्कूल भवन को गांव वाले के सहयोग से तोड़कर बराबर कराया गया l उसके बाद उन्होंने नई बिल्डिंग के लिए कुसुमकसा के पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस से बात किया l संजय बैस ने भी अधिकारियों से राशि स्वीकृत कर स्कूल भवन का निर्माण कराया l

बिजली लाइन का तार जो की स्कूल में लगे पेड़ से टकरा रहे थे यहां से हटवा कर अन्यत्र जगह पर करवाया l मुख्य द्वार जहां पर बहुत मुश्किल से एक मोटरसाइकिल ही अंदर जा पता था वहां पर दो दरवाजे एक छोटा एक बड़ा लगवाया lबंजर हुई जमीन को किचन गार्डन के रूप में परिवर्तित कर मौसमी सब्जी लगवाया l

वृक्षारोपण को बच्चों के बीच में बढ़ावा देने के लिए स्कूल परिसर में पौधे लगाए गए l स्कूल के सामने खुले मैदान को सीमेंटीकरण करवाया गया lसाथ ही स्कूल के कमरे से बाहर निकलते ही बच्चे पानी में भीग जाए करते थे तथा प्रार्थना स्थल के लिए भी समस्या होती थी l उसके लिए उन्होंने जनपद सदस्य के सामने टीनसेट की मांग रखी l जनपद सदस्य के मदद से टीन सेट का निर्माण किया गया l जहां बच्चे अभी आराम से प्रार्थना कर सकते हैं l

प्रतिदिन छुट्टी होने से पहले सभी बच्चों को गिनती को गीतों को माध्यम से बच्चों को रटाने के लिए उनके द्वारा नया शुरूआत किया गया साथ ही देश के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को भी उन्होंने बच्चों के बीच लोकप्रिय करने के लिए इसमें सम्मिलित किया l

स्कूल के कक्ष को बच्चों के रुचि के अनुसार परिवर्तित कर विभिन्न चित्रों का प्रिंट करवाया l ताकि बच्चे पढ़ने में अपने रुचि दिखा सके l

स्कूल में शौचालय तो था लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं थी उनके लिए उन्होंने स्कूल परिसर में हुए बोर में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से कनेक्शन करवाया और 1500 लीटर की एक टंकी को भी स्कूल में लगवाया l साथी बच्चों को समस्या ना हो इसके लिए दो कमबोर्ड शौचालय भी स्कूल में लगवाए l पानी का कनेक्शन शौचालय में होने के कारण बच्चों को पानी की समस्या से निजात मिल गया l उन्होंने शौचालय के सामने के कीचड़ युक्त स्थल को सीमेंटीकरण करवा दिया जिसके कारण बच्चे बिना पर गंदा हुए आसानी से वहां तक पहुंच सकते हैं l उनके आने से पहले स्कूल में ऑफिस के लिए भी टेबल कुर्सी की कमी थी जहां आज शिक्षकों और मिलने आने वाले सभी के लिए पर्याप्त मात्रा में टेबल कुर्सी है l

स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे जमीन में बैठकर पढ़ाई करते थे उसके लिए उन्होंने अन्य स्कूलों के मदद से 45 जोड़ी टेबल और बेंच की व्यवस्था किए हैं , जहां बच्चे आराम से बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं l साथ उन्होंने लोकप्रिय खेल कबड्डी खेलने के लिए बच्चों के लिए 20 जोड़ी ड्रेस का भी व्यवस्था किए हैं l
स्कूल के छात्र-छात्राएं अन्य स्कूलों की तरह शिक्षक के उन्नत स्तर को जान सके और पढ़ाई कर सके इसके लिए उन्होंने लोगों के सहयोग और अपने निजी पैसे मिलाकर स्कूल के लिए प्रोजेक्टर खरीदे हैं जिसे स्वयं के लैपटॉप के माध्यम से नए-नए गतिविधियों की जानकारी बच्चों को प्रोजेक्टर के माध्यम से देते रहते हैं l स्कूल में शिक्षकों की कमी थी जिसे देशमुख जी की मांग पर संजय बैस के प्रयास से आज वहां दो सहायक शिक्षक हैं l छत्रपाल देशमुख के प्रयास और उनकी लगन को देखकर गांव वाले भी फुला नहीं समा रहे हैं l उनका कहना है कि हमारे स्कूलों को इसी तरह की शिक्षक की आवश्यकता थी l जिन्होंने तन मन धन देकर शिक्षा के महत्व को लोगों तक पहुंचाने का बेहतरीन काम किया है l वह हमारे गांव में गुरु ही नहीं गोविंद बनकर बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं l

 

दूसरी कहानी आपको बता रहे हैं शिक्षकीय कार्य से रिटायर हो चुके योगेश्वर प्रसाद गांगुली की कहानी l

वह मूलत ग्राम बकलीटोला ( कुसुमकसा ) के निवासी है l मिनी पीएससी पास करने के बाद 1986 में कचरूटोला ( बेमेतरा ) जिला से प्रथम नियुक्ति हुआ l 1995 तक वहां शिक्षकीय कार्य किये l 1995 सितंबर में कुसुमकसा प्राथमिक शाला क्रमांक 2 में इनका नियुक्त हुआ l 2006 में सहायक शिक्षक बने तथा 2007 में प्रधान पाठक के रूप में पदोन्नति हुई तथा दिसंबर 2019 में रिटायरमेंट तक यहीं उन्होंने सेवा दिए l

कब बुलबुल को विभिन्न जिलों में पहुंचने का कार्य किया l वे कब बुलबुल के मास्टर ट्रेनर रहे l बच्चों को शिक्षा के प्रति आकर्षित करने स्कूल को बेहतरीन साथ सजा कर आकर्षक बनाने के लिए इन्हें समन्वयक बनाया गया था l विकासखंड स्तरीय आयोजित बाल मेला डौंडी में बाल मेला कुसुमकसा स्कूल की तरफ से बेहतरीन स्कूल का संचालन के लिए समन्वयक और ट्रेनर के साथ सामग्री शिक्षण के प्रति इनके समर्पण और योजनाओं को लागू करने के लिए इन्हें सम्मानित किया गया तथा इनकी कार्य को देखकर अन्य स्कूलों में भी ट्रेनर के रूप में इन्हें बुलाते थे l

बच्चों में कठपुतली दिखाने सामान्य प्रयोग दिखाने अनुपयोगी सामग्री से शिक्षा उपयोगी सामग्री बनाने के लिए अन्य स्कूलों में छात्रों को प्रशिक्षण देने के लिए भी इन्हें बुलाते थे l स्कूली शिक्षा में भी इन्होंने बेहतरीन कार्य किया l आदिम जाति कल्याण विभाग में शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार के लिए उन्हें 2006 में राज्यपाल पुरस्कार तथा 2011 में शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार एवं कक्षा पांचवी में बेहतरीन रिजल्ट के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है l राष्ट्रीय खेल संकुल स्तरीय कब बुलबुल में स्काउट गाइड के नेतृत्वकर्ता के रूप में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया l शिक्षकीय कार्य के अतिरिक्त कब बुलबुल प्रतियोगिता जैसे अन्य गतिविधियों से जुड़े रहने के कारण उन्हें पदुमलाल पन्नालाल बख्शी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है l

शिक्षा के गुणवत्ता सुधार में बेहतरीन काम करने के सम्मान में इन दोनों शिक्षकों के लिए आज बस इतना ही l

धन्यवाद!

संपादक

भोज राम साहू

“हमारा दल्ली राजहरा -एक निष्पक्ष समाचार चैनल”

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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