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छत्तीसगढ़ के छोटा दिवाली (जेठौनी ) दल्ली राजहरा में धूमधाम से मनाया गया ।

दल्ली राजहरा रविवार 02 नवबर 2025 भोज राम साहू 98937 65541

 लौह नगरी दल्ली राजहरा में छत्तीसगढ़ में जेठौनी तुलसी पूजा जिसे छोटा दिवाली के नाम से जाना जाता है धूमधाम से मनाया गया । इस अवसर पर भगवान शालिग्राम एवं माता तुलसी का विवाह का सभी घरों में संपन्न हुआ ।

 जेठौनी के एक दिन पहले ही बस्तर क्षेत्र के व्यापारियों के द्वारा गन्ना बेचने के लिए लाया गया था। ग्रामीण अंचलों के द्वारा छत्तीसगढ़ के जेठौनी पूजा में उपयोग होने वाले पीड़ी कांदा शंकर कांदा सेमर कांदा डांग कांदा नागर कांदा जैसे कंद मूल बेचने के लिए लाए गए थे।

वही कंदमूल भी सुबह से मांग के अनुरूप बहुत ज्यादा कीमत पर बिका पीड़ी कांदा 200 से 150 रुपए किलो शंकर कांदा 120 से ₹100 किलो सेमर कांदा 120 से ₹100 किलो डांग कांदा लगभग किलो ₹80 किलो नागर कांदा ₹80 लगभग किलो तो वही सिंघाड़ा 120 से ₹100 किलो तक बिका मंडप बनाने में उपयोग होने वाले गन्ना सुबह ₹120 जोड़ी बिक रहा था वह रात्रि 7:00 बजे तक₹30 जोड़ी तक आ चुका था l वही पूजा के लिए लोगों के द्वारा गेंदा का फूल भी बेचे गये जो लगभग ₹100 किलो तक बिका । केला जो पिछले साल ₹80 दर्जन बिका था इस बार ₹50 दर्जन तक ही सीमित रह गया । तो सेव भी मात्र ₹100 किलो ही बिका मिठाई दुकान के साथ-साथ पटाखे दुकानों में भी भीड़ देखी गई l 
सबसे ज्यादा समस्या इस त्यौहार में नया चावल के लिए हुआ । बारिश के कारण किसानों के द्वारा धान की कटाई नहीं हो पाया जिसके कारण बाजार में मिलने वाला नया चावल₹80 किलो बिका जो कि पिछले साल 40 से ₹50 में बिका था । इस त्यौहार में नए चावल के आटे के 11 दीपक और फरा से तुलसी मां के पूजा की जाती है l

दोपहर उपरांत रात तक यादव समाज गाय ( दुहने वालों के )द्वारा छत्तीसगढ़ के पारंपरिक और प्रसिद्ध राउत नाचा के गाजे बाजे के साथ पशुपालकों के घर जाकर सोहाई बांधा गया l 

शाम को घर-घर मां तुलसी की पूजा अर्चना की गई कहीं सादे रूप में पूजा की गई तो कहीं वास्तविक विवाह की तरह मां तुलसी और शालिग्राम का विवाह संपन्न कराया गया तथा प्रसाद ग्रहण किया गया छत्तीसगढ़ का यहां पारंपरिक त्योहार जेठौनी है जिसके उपरांत भी ग्रामीण और शहर अंचल के बाद शादी विवाह के लिए वर वधु की तलाश शुरू होती है तथा मांगलिक कार्य किए जाते हैं।
हिंदू धर्म कथा अनुसार कहा जाता है आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष के एकादशी को वे सोते हैं तथा कार्तिक माह के एकादशी को भगवान विष्णु चार माह के निद्रा के उपरांत जागते हैं इसलिए इसे देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। 

खतरे को निमंत्रण देता एक व्यापारी के द्वारा गन्ना बेचने के लिए ट्रांसफार्मर पर लगा दिया गया था ।

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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