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सेजेस कुसुमकसा में ‘ वंदे मातरम’ के 150 वीं वर्षगांठ के स्मरण उत्सव पर संजय बैस ने कहा वंदे मातरम मातृत्व के बोध के साथ राष्ट्रभक्ति की अलख जगाती है ।

दल्ली राजहरा शुक्रवार 7 नवंबर 2025 भोजराम साहू 9893 765541

 

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वी वर्षगांठ पर सेजेस अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कुसुमकसा में स्मरणोत्सव का कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य श्रीमती सुनीता यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। 

जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का प्रसारण दूरदर्शन के माध्यम से प्रोजेक्टर पर शाला के समस्त विद्यार्थियों , शिक्षकों को जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में दिखाया गया। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पश्चात वंदे मातरम का गायन किया गया।

                  इस अवसर पर प्राचार्य सुनीता यादव ने कहा कि ‘ वंदे मातरम’ मां भारती की आराधना है । यह आजादी के परवानों का तराना होने के साथ इस बात की भी प्रेरणा देता है कि हमें आजादी की रक्षा कैसे करनी है।

मुख्य अतिथि डॉक्टर भूपेंद्र मिश्रा अध्यक्ष शाला प्रबंधन समिति ने कहा कि वंदे मातरम एक चिरस्थाई गान है। यह भारत का राष्ट्रीय पहचान और स्थाई प्रतीक है, जो स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माता की अनगिनत पीडिया को प्रेरित किया है। 

वंदे मातरम मातृत्व के बोध के साथ राष्ट्रभक्ति की अलख जगाती है । : संजय बैस 

विशिष्ट अतिथि संजय बैस पूर्व जनपद सदस्य कुसुमकसा ने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित अमर उपन्यास आनंद मठ से लिया गया राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम भारतीय एकता का पहचान है । इससे अंग्रेजों की नींद उड़ गई थी क्योंकि यह गीत क्रांतिकारियों की शक्ति और उत्साह का प्रतीक बन गया था। 

विशिष्ट अतिथि योगेंद्र कुमार सिन्हा भाजपा मंडल अध्यक्ष कुसुमकसा ने कहा कि वंदे मातरम राष्ट्र की सभ्यता राजनीतिक और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग है। 150 वीं वर्षगांठ जैसे स्वर्णिम पल इस मील के पत्थर को मनाने का अवसर एकता, बलिदान और भक्ति के कालातीत संदेश की पुष्टि करने का अवसर प्रदान करता है।

 व्याख्याता तामसिंग पारकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि अंग्रेजों ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को स्कूलों में गाने पर रोक लगाई और विद्यार्थियों को दंड भी दिया गया। परन्तु गीत की गूंज नहीं रुकी, पूरे देश में आंदोलन के रूप में फैल गया। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भूमिका निभाने के कारण ‘ वंदे मातरम’ को ‘ जन – गण – मन’ के समान दर्जा दिया जाना चाहिए।
इस अवसर पर डॉक्टर नसीम खान सदस्य प्रबंधन समिति, नईम कुरैशी अध्यक्ष पालक समिति, देवराज जैन तथा व्याख्याता गण संदीप नायक, आमोद त्रिपाठी, सरिता पांडे, रानू सोनी सोनम गुप्ता, शिवम गुप्ता, प्रियंका सिंह, भावना यादव, नदीम खान, त्रिशला नोनहारे, यामिनी नेताम , यशेष रावते,पूजा रात्रि ,अंकिता मानकर, होमेश्वरी भेड़िया ,गरिमा, समीक्षा, भूपेश टंडन ,प्रवीण किरनपुरे तथा प्रकाश धीवर आदि उपस्थित थे।

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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