
दल्ली राजहरा
रविवार 08 मार्च 2026
भोजराम साहू 9893 765541
आज देश केंद्र सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से महिलाओं की दशा सुधारने में एक नई शुरुआत हुआ है l आज देखे तो पहले के मुकाबले महिलाएं की दशा बेहतर हुई है l महिलाओं को अब सम्मान की दृष्टि से देखा जा रहा है l आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना सफलता की झंडा गाड़ रही है, चाहे विज्ञान के क्षेत्र हो राजनीति की क्षेत्र हो , रक्षा का क्षेत्र हो, प्रशासनिक सेवा का क्षेत्र हो या सामाजिक क्षेत्र और कोई क्षेत्र नहीं बचा जहाँ महिलाओं की कदम न पड़ा हो l एक ओर महिलाएं दिन-ब-दिन प्रगति कर रही हैं तो दूसरी ओर शोषण का शिकार भी हो रहे हैं l आज भी दहेज प्रताड़ना और महिलाओं पर शोषण के समाचार आए दिन अखबारों के माध्यम से पढ़ने और सुनने को मिलता रहता है l देश के कई अंदरूनी इलाके हैं जहां आज भी महिलाएं को शोषण और हेय की दृष्टि से देखा जाता है l

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जर्मनी के महिला नेता समाजवादी क्लारा जेटकिन को नहीं भूलाया जा सकता है l क्लारा जेटकिन ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बुनियाद रखी थी l जिसने दुनिया भर की महिलाओं के हक की लड़ाई तेज कर दी उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए ताकत दी l जिसके कारण महिलाएं रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए खुद को साबित करने लगी l अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत उन्हीं के विचारों से सहमत होकर संयुक्त राष्ट्र ने 1975 को आधिकारिक तौर पर 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए मान्यता दी थी l विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान प्रशंसा और प्रेम प्रकट करते हुए महिलाओं की आर्थिक राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियां को सम्मान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है l आज से 118 वर्ष से पहले सन 1908 में महिलाओं के हक एवं अधिकार को लेकर करीब 15000 कामगार महिलाओं ने न्यूयॉर्क शहर में एक परेड निकाली थी l जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रयास था l देश में महिलाओं की दशा सुधारने के लिए कई प्रयास हुए इसमें पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के द्वारा राष्ट्रीय पेंशन योजना , इंदिरा गांधी मातृत्व सहायता योजना , मातृत्व पोषण योजना जैसे विभिन्न योजनाएं लाई गई l मात् सहायता योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रसूति के समय सहायता राशि दी जाने लगी l मात् पोषण योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान करने वाली माताओ बच्चों के लिए पोषण और स्वास्थ्य संबंधित सहयोग किया जाने लगा l आज भी वर्तमान सरकार के द्वारा कई तरह के योजनाएं लाई गई है जिसमें महिलाओं के विकास में नोनी सुरक्षा योजना नवा बिहान योजना है l सरकार के द्वारा महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए छत्तीसगढ़ महिला बाल विकास विभाग के माध्यम से हेल्पलाइन जारी की गई है l आप 181 में डायल कर इस संबंध में शिकायत कर सकते हैं l
➡️🔥💥पुरोबी वर्मा (अध्यक्ष सर्व समाज समरसता समिति)💥🔥⬅️

ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सर्वप्रथम सभी महिलाओं को हार्दिक बधाई 8 मार्च के दिन महिलाओं को समर्पित है । यूं तो हर क्षण हर पल हर दिन महिलाओं का है आज की इस दुनिया में महिलाओं का एक अलग ही सम्माननीय स्थान बना रही है ।राजनीति से लेकर विज्ञान, खेल के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा रही है । महिला सशक्तिकरण तभी पूर्ण रूप से सफल होगा जब जीवन की हर पहलू में महिला अपने आप को सुरक्षित महसूस करेगी । भारत सरकार ने पूरे देश में महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए उल्लेखनीय कदम उठाया है ।विद्यार्थी सुधार समर्पित हेल्पलाइन और वित्तीय सहायता के माध्यम से नारी शक्ति के लिए सुरक्षित वातावरण एवं बहुआयामी दृष्टिकोण लागू किया जा रहा है । लेकिन महिलाएं आज भी सुरक्षित नहीं है अपने अधिकारों का पूर्ण ज्ञान अभी भी हमें नहीं है । महिला बाल विकास द्वारा यदि छोटी-छोटी गोष्ठियां छोटी-छोटी सभाएं महिलाओं के लिए आयोजित किया जाए तो बेहतर होगा ।
जब महिलाएं या बच्चियों पर यौन उत्पीड़न की की घटना होती है तो तुरंत कार्यवाही होनी चाहिए । आरोपी को ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि रूह तक काप जाए । हर क्षेत्र में हम समानता चाहते हैं रात्रि पाली की ड्यूटी भी महिलाएं करती है । कर्म में हम हमेशा आगे हैं लेकिन हम अपनी सुरक्षा भी चाहते हैं । अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के संघर्षों का सम्मान तथा उन्हें सशक्त बनाने का संदेश देती है ।
➡️🔥💥 संगीता नायर ( जिला अध्यक्ष महिला कांग्रेस 💥🔥⬅️

भारतवर्ष में सरकार किसी भी राजनीतिक पार्टी की हो उनके द्वारा महिलाओं की सुरक्षा , सशक्तिकरण के लिए अलग अलग योजनाएं लागू की जाती हैं जहां योजनाओं के कागजों में क्रियान्वन से कहीं ज्यादा महत्व ये रखता है कि अंतिम क्षेत्र के लोगों तक क्या योजना धरातल में क्रियान्वन है या नहीं ।
वर्तमान में लागू योजनाओं से ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि महिलाओं को महतारी वंदन योजना के सिवा किसी भी योजना का लाभ मिल रहा है , जिसके साथ महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अभद्रता के मामले ये सिद्ध कर देते हैं ।
सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार के अवसर प्रदान किया जाना अत्यंत आवश्यक है , जैसा कांग्रेस के शासनकाल में आंगनवाड़ी से ले कर रेडी टू ईट योजनाओं तक महिलाओं को कांग्रेस ने एक आवक का जरिया दिया था जिसे भाजपा की सरकार द्वारा विभागीय कर रोजगार छीन लिया गया ।
महिला हेल्पलाइन में कर्मियों की संख्या बढ़ा कर केवल महिला पेट्रोलिंग टीम का भी गठन किया जाना आवश्यक है , जो शिकायत आने पर अलग अलग स्थानों में पुरुष टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंच सके । शिकायतकर्ता की गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है क्योंकि मान सम्मान के डर से ज्यादातर मामले दर्ज ही नहीं किए जाते हैं ।
महिलाओं द्वारा बनाए गए नियमों का सही पालन किया जाना कठिन है पर नामुमकिन नहीं । वर्तमान में इसमें बेहतरी तो आई है पर अभी बहुत सुधार की आवश्यकता है ।
महिलाओं को घरेलू हिंसा से ले कर छेड़छाड़ और सारे उन्हें शासन द्वारा प्रदत्त अधिकारों की जानकारी प्रदान करने हेतु सुरक्षा सप्ताह अंतर्गत अभियान चलाया जाना आवश्यक है , अभियान अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में तथा कम उम्र की बच्चियों को भी ये जानकारी प्रदान किया जाना चाहिए कि किसी अनचाही परिस्थिति में कानून उनकी किस तरह सहायता कर सकता है , और कैसे उनका नाम गोपनीय बनाए रखा जाएगा ।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के द्वारा महिलाओं को दिया गया सम्मान अभूतपूर्व रहा है जहां मान.इंदिरा गांधी जी को प्रधानमंत्री तो संगठन कार्यकारिणी हो या मंत्री परिषद सभी में महिलाओं को बराबर का दर्जा आज भी दिया जाता है , वर्तमान में महिलाओं को आज भी उनके हक के लिए लड़ना पड़ रहा है , आप किसी भी कार्यक्षेत्र में देख लें , महिलाओं को उनके बराबर के श्रमिक के बावजूद कम मेहनताना दिया जाता है । भाजपा की सरकार द्वारा केंद्रीय मंत्री परिषद में से महिलाओं को दरकिनार किया जाना निंदनीय है । जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी द्वारा मुझ जैसी छोटी कार्यकर्ता को ब्लॉक अध्यक्ष से ले कर महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष तक के सम्मान से नवाजा है ।
सरकार द्वारा महिलाओं को सबसे पहले कानूनी रूप से जागरूक करने अभियान चलाए जाने की योजना लाना चाहिए , इसके साथ ही उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने हेतु महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से जोड़ कर विभिन्न क्षेत्रों को कार्य दे कर मदद करना चाहिए । व्यवसाय के लिए महिला समूहों को समय समय पर योजनांतर्गत बैंको से व्यवसाय हेतु लोन प्रदान करवाया जाना चाहिए ।
महिलाओं द्वारा दर्ज करवाए जाने सबसे घिनौना अमानवीय अपराध है उनका बलात्कार , इसके बाद अभद्रता और घरेलू हिंसा , इन सभी की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होना चाहिए , इसके साथ ही यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि ऐसे शक्तियों का दुरुपयोग न किया जा सके । अपराधियों को अब वक्त आ गया है कि सीधे फांसी की सजा सुनाई जाए ताकि फिर कोई नेता उत्तराखंड के मामले की तरह किसी बच्ची से स्पेशल सर्विस न मांगे ।
भाजपा द्वारा नए श्रम कानून अंतर्गत सभी श्रेणी के मजदूरों को बाध्य कर दिया जा रहा है , जहां वो अपने हक के लिए नहीं लड़ सकते और न ही अपने सुरक्षा की मांग कर सकते हैं , यह उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ है तथा ठेकेदारों को बहुत सी ताकत प्रदान कर रहा है । हमने पहले ही देखा है कि भाजपा की सरकार द्वारा लगातार निजीकरण कर कंपनियों को उद्योगपतियों को बेच दिया गया है जहां किसी भी कर्मी के रोजगार की कोई निश्चितता नहीं है । मंदी आए तो तत्काल काम से निकाल दिया जाता है , इन श्रम कानूनों से सभी जगहों पर ऐसा ही हाल देखने को मिलेगा , यह भी एक तरीके से सभी श्रमिकों के निजीकरण की तरह ही है ।
➡️🔥💥टी ज्योति (पार्षद वार्ड क्रमांक 26 लोक गायिका एवं समाज सेवी) 🔥💥⬅️

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के अधिकार, सम्मान और सशक्तिकरण को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है । यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देने और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार करने का समय है ।
सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य महिलाओं को समाज में समान अवसर प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। हालांकि, यह भी आवश्यक है कि इन योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो ताकि हर महिला तक इसका लाभ पहुंच सके।
महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए सख्त कानूनों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। समाज के प्रत्येक वर्ग को महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता की भावना विकसित करनी होगी।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि हम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने, उन्हें शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और एक सुरक्षित व समानतापूर्ण समाज के निर्माण मे उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का समय है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम सब मिलकर महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्धता दोहराएं और एक बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएं।
➡️🔥💥मीनू साहू (वरिष्ठ पत्रकार जिला बालोद) 💥🔥⬅️

मेरे विचार से महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा बनाई जा रही योजनाएँ एक सकारात्मक पहल जरूर हैं। महिलाओं को राजनीति में भागीदारी देने के लिए कानून बनाना और उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश करना लोकतंत्र को मजबूत करता है। लेकिन केवल योजनाएँ घोषित कर देना ही काफी नहीं है, उनका जमीनी स्तर पर ईमानदारी से क्रियान्वयन होना ज्यादा जरूरी है।
सच यह है कि अभी भी ये योजनाएँ पूरी तरह पर्याप्त नहीं हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार को रोजगार के अधिक अवसर, कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार योजनाएँ और छोटे व्यवसायों के लिए आसान ऋण उपलब्ध कराना चाहिए। जब महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होगी, तभी वह समाज में मजबूती से खड़ी हो पाएगी।
महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सरकार को सख्त कानून के साथ त्वरित न्याय व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। कानून तो बने हैं, लेकिन कई जगह उनका पालन कमजोर दिखाई देता है। इसलिए पुलिस कार्रवाई तेज हो, न्यायालय में मामलों का जल्दी निपटारा हो और दोषियों को कठोर सजा मिले।
महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए शिक्षा, सामाजिक अभियान और ग्राम स्तर तक जागरूकता कार्यक्रम चलाना जरूरी है। जहां तक समानता की बात है, आज भी समाज में पूरी बराबरी नहीं दिखती।
साथ ही यह भी जरूरी है कि महिला सुरक्षा के नाम पर बनाए जा रहे कानून और श्रम नीतियाँ संतुलित हों, ताकि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान दोनों सुरक्षित रह सकें। एक मजबूत समाज वही होगा जहाँ महिला सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सम्मानित होगी।
➡️🔥💥 प्राची सिन्हा ( परिषद वार्ड क्रमांक 14 दल्ली राजहरा)💥🔥⬅️

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मैं यह कहना चाहूँगी कि सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएँ और कानून बनाए गए हैं। इन प्रयासों से महिलाओं को समाज, शिक्षा, रोजगार और राजनीति के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। यह सकारात्मक पहल है, लेकिन इन योजनाओं का प्रभाव तभी दिखाई देगा जब उनका सही क्रियान्वयन ज़मीनी स्तर पर सुनिश्चित किया जाए।
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्वरोजगार, कौशल विकास प्रशिक्षण, छोटे व्यवसायों के लिए आसान ऋण, और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को और बढ़ाने की आवश्यकता है। साथ ही महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए कानूनों का कड़ाई से पालन, त्वरित न्याय व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की संवेदनशीलता बेहद आवश्यक है।
महिलाओं को उनके अधिकारों, कानूनों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। समाज में महिलाओं को वास्तविक समानता तभी मिलेगी जब कानून के साथ-साथ सामाजिक सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन आए।
सरकार को महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अवसर सुनिश्चित करने के लिए निरंतर और प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि हर महिला आत्मनिर्भर, सुरक्षित और सशक्त बन सके।
➡️💥🔥गीता मरकाम ( जिला मंत्री भाजपा महिला मोर्चामहिला अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज तहसील इकाई राजहरा) 💥🔥⬅️

पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के अधिकारों में सुधार हुआ है लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई है। लैंगिक समानता प्राप्त करने और सुनिश्चित करने के लिए महिलाएं भेदभाव और हिंसा से मुक्त जीवन जी सके इन अधिकारों को मजबूत करना आवश्यक है। पहला कदम है महिलाओं और लड़कियों को शिक्षित करना। शिक्षा एक शक्तिशाली साधन है जो महिलाओं को सोच समझ कर निर्णय लेने,रोजगार बाजार में प्रवेश करने और राजनीतिक प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए सशक्त बनाती है।. दूसरा कदम कानूनी ढाँचे को मजबूत किया जाना चाहिए, महिलाओं को हिंसा, भेदभाव और असमानता से बचाने वाले कानूनों को लागू किया जाना चाहिए।
तीसरा कदम नेतृत्व पदों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। राजनीति और कार्पोरेट नेतृत्व में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अक्सर कम होता है।चौथा कदम किफायती चाइल्ड केयर सुविधा उपलब्ध कराने से महिलाओं को काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
पांचवां कदम प्रौद्योगिकी तक पहुँच में सुधार करना महत्वपूर्ण है।डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम महिलाओं को प्रौद्योगिकी चलित दुनिया में आवश्यक कौशल हासिल करने में सक्षम बना सकते हैं,जिससे उनकी रोजगार क्षमता बढ़ेगी और ऑनलाइन उनकी आवाज को सशक्त बनाया जा सकता है।
➡️🔥💥 द्रौपती साहू ( समाज सेविका) 💥🔥⬅️

नारी केवल शक्ति नहीं,
प्रेम ,करूणा और धैर्य का प्रतीक है।।
आज महिला दिवस के सुअवसर पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार को फास्ट ट्रैक अदालतों की संख्या बढ़ाकर मुकदमों का निपटारा तेज करना चाहिए। पुलिस में महिलाओं की भागीदारी और जेंडर संवेदनशीलता बढ़ानी चाहिए साथ ही सार्वजानिक स्थानों पर सीसीटीवी स्ट्रीट लाइट, 27/7 हेल्पलाइन (181/112) को सुदृढ़ करना और कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल व सुरक्षा ऐप को बढ़ावा देना जरूरी है ताकि महिलाएं सुरक्षित हो सकती है।
कौन कहता है ,
दुनिया की नारी कमजोर है ।
आज की नारी के हाथों में,
दुनिया चलाने की डोर है।।
➡️💥🔥दामिनी साहू (वरिष्ठ समाज सेवी ) 🔥💥⬅️

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मैं सरकार से अनुरोध करती हूं कि इस वर्ष को महिला सुरक्षा को समर्पित करे । भारत की महिलाओं की दशा पर जब हम दृष्टिपात करते हैं तब हमें एक असंतुलित दृश्य समाने नजर आता है। एक तरफ हम कहते हैं कि महिलाएं हमारे यहां राष्ट्रपति पद पर आसीन हैं, प्रधानमंत्री भी रही, हमारी कल्पना चावला, और सुनिता विलियम्स ने बंधनों को भेद कर अंतरिक्ष में उड़ाने भरी है। संतोष यादव ने अपने महिला पावों से हिमालियो को नापा है,ये वो चित्र है जो हमें गौरवान्वित करता है । ये वो चित्र है जो भारत की प्रतिष्ठा को दुनिया में बढ़ाता है
लेकिन एक दुसरा चित्र भी है जहां महिला ना जन्म के पहले सुरक्षित है ना जन्म के बाद सुरक्षित है, माता के गर्भ में मार दिया जाता है, भ्रूण हत्या कर दी जाती है,। जन्म के बाद ना दो बरस की बच्ची सुरक्षित है ना साठ बरस की वृद्धा सुरक्षित है ।दिल और दिमाग कौंधने लगता है,जब अखबार में पढ़ने को मिलता है,कि दो बरस की बच्ची के साथ दुष्कर्म हुई ,सात बरस की स्कुली बच्ची के साथ स्कूल के एक व्यक्ति ने दुष्कर्म किया ,साठ बरस की वृद्धा के साथ दुष्कर्म किया गया ,इन सभी घटनाओं से शीश शर्म से झुकता है और दिल दर्द से भर जाता है । इसलिए मैं कहना चाहती हूं आज इस वर्ष यदि महिला सुरक्षा के लिए समर्पित कर एक संकल्प लें तो स्थिति बदल सकती है , केवल दो चिजो से समाज की सोच से और व्यवस्था की खौंफ से ।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आज हम अपने स्तर संकल्प करे, और हमारी राज्य की सरकार, हमारी केन्द्र की सरकार हमारी विभिन्न संस्थाएं हमारे समाज का हर व्यक्ति आज से संकल्प करें कि हम सभी बहन, और बेटी को सुरक्षित रखेंगे ।उनके मन में कभी भी असुरक्षा का भाव पैदा नहीं होने देंगे तभी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाना सार्थक हो जाएगा । याद रहे हम उस देश के नागरिक हैं जहां वर्ष में दो बार नवरात्रि मनाई जाती है और कन्या को दैवी मानकर पूजा जाता है।
➡️🔥💥टोमन निर्मलकर (छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा/छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ मीडिया प्रभारी)💥🔥 ⬅️

सरकार के द्वारा किया गया प्रयास अभी भी अधूरा है, महिला सशक्तिकरण और उन्हें राजनीति में लाने का प्रयास पूरी तरह सक्षम नहीं क्योंकि स्थानीय नगरीय और पंचायती क्षेत्रों महिलाएं अपने पतियों को अपना प्रतिनिधि बनाकर निकाय और पंचायत की बैठकों में भेजते है, और स्वयं में घर रहती है, और सरकार इसमें उक्त कार्यवाही करने में विफल रही है, सुरक्षा के दृष्टि से महिलाएं सुरक्षित नहीं छोटी छोटी बच्चियों का रेप ,मर्डर, यौन शोषण हो रहा है।
सरकार को चाहिए कि महिलाओं को जागरूक करे, हर हाथ में काम और हर हाथ कला, हुनर होनी चाहिए, महतारी वंदन जैसी योजनाओं से पैसा देकर उनको अक्षम न बनाया जाए। लघु और कुटीर उद्योगों जैसे कामों को देकर उनको सक्षम बनाया जाना चाहिए।
स्कूल और कॉलेज में महिलाओं के अधिकार और सम्मान के बारे में पढ़ाया जाए। लड़कों को बचपन से महिलाओं का सम्मान करना सिखाया जाए।
सड़कों, बस स्टॉप और बाजारों में CCTV कैमरे और अच्छी लाइटिंग हो।रात में सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध।समाज के विशेष बुद्धिजीवी वर्गो के साथ मिलकर अपराधों को रोकने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जाना चाहिए।
महिलाओं के लिए बनाए गए कानून को सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है, अपराधी को कड़ी से कड़ी देने के बजाए ,कानूनों को लचीला बना दिया जाता और राजनीति लाभ,व बाहुबल का प्रयोग करके आरोपी को जेल के पहले दरवाजे से तो अंदर किया जाता है, पर पीछे के दूसरे दरवाजे उन्हें छोड़ खुले आम घूमने की आजादी दिया जाता है, जिससे कानून से विश्वास खत्म होते जा रहा है।
महिलाओं को एक साथ चर्चा करना करना चाहिए ऐसे ही होने वाले अपराधों के प्रति बच्चों को भी इसमें शामिल कर एक दूसरे के साथ अपनी बात रखना चाहिए, कानून व अधिकारों की जानकारी से अवगत करना चाहिए, जिससे प्रताड़ित महिलाएं आगे आए और अपने हक अधिकारों के हनन पर खड़ा हो सके।
अभी भी पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं मिल रहा है, अभी भी महिलाओं को दबाया , डराया और धमकाया जाता है, घर की चार दिवारी में अभी रूढ़िवादी प्रथा फलफूल रहा है। समाज के कुछ लोग जो बड़े पदाधिकारी होते है वो जानकार भी अनजान बन जाते है।महिलाओं के खिलाफ अपराधों (जैसे रेप, छेड़छाड़, घरेलू हिंसा, एसिड अटैक) के मामलों में जल्दी जांच और जल्दी सजा फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए।
Criminal Law (Amendment) Act, 2013 जैसे कानूनों को सख्ती से लागू करना जरूरी है।घरेलू हिंसा जैसे मामलों पर सरकार और समाज को मिलकर खड़ा होना चाहिए और तत्काल महिलाओं को इससे निजात तत्काल प्रभावित स्थान में दिलाना चाहिए ताकि महिलाओं का सरकार, समाज,और आसपास के लोगों पर भर भरोसा बढ़ जाए और भारत की कोई भी बेटी प्रताड़ित न हो और खुल कर आवाज उठा सके।
एक कठोर से कठोर कानून और इसका एक प्रयोग महिलाओं पर होने वाले अत्याचार खत्म कर देगानिर्भया कांड के बाद, क्रिमिनल एक्ट 2013 कड़ाई से लागू करे , और पास्को एक्ट को ।महिला अपराधों को तत्काल फास्ट ट्रैक कोर्ट में फैसला किया जाए, महिलाओं को सुरक्षित वातावरण मिले इसके जिम्मेदारी समाज और सरकार को मिलकर करना चाहिए, कानूनों को कड़ाई के साथ लागू करे, ऐसे निष्पक्ष समिति बनाई जाए जो पुलिस ,प्रशासन और कोर्ट की कारवाही पर नजर रखे और महिला अपराधों पर होने राजनीतिक षड़यंत्र, बाहुबल , पैसों के लेन देन पर लगाम लगा कर अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा दे।
नए श्रम कानून में महिलाओं को रात्रि पाली कार्य करने की अनुमति देना निंदनीय है, सरकार के इस कानून से स्पष्ट होता है कि सरकार महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं है क्योंकि दिन के उजालो में महिलाओं पर अपराध कम नहीं हो रहे है तो रात में कैसे इनकी सुरक्षा किया जाएगा ये बड़ा सवाल सरकार के लिए है ,श्रम क्षेत्र में ऐसे कई कानून है जिसका पालन कंपनियां नहीं कर रही है जिस पर सरकार कोई लगाम नहीं लगा पाई है और अब श्रम कानून में रात्रि पाली में महिलाओं को जबरदस्ती कंपनियों काम करवाएगी और सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।
स्कूल कॉलेज के आसपास पेट्रोलिंग गाड़िया लगवाई जाए, स्कूल कॉलेज में छात्र छात्राओं के बीच महिलाओं के अधिकारों और कानून संबंधित जानकारी देना चाहिए, नैतिकता संबंधित पाठ्यक्रम शिक्षा जगत में लागू करे,युवा छात्र छात्राओं को ऐसे होने घटनाओं पर नजर रखने और पुलिस को खबर करने और पुलिस को भी चाहिए कि तत्काल मौके पर पहुंचे इसके लिए एक टीम गठित की जाए, जो स्कूल कॉलेज पुलिस,और बुद्धिजीवी वर्गो की शहरों में टीम बनाई जाए, महिलाओं पर होने वाले अत्याचार की जानकारी और शोध के लिए एक सर्वे टीम बनाया जाए, जब तक कस्बों शहरों में युवाओं, बुद्धिजीवी वर्गो, पुलिस, समाजसेवी, संगठन मिलकर काम नहीं करेंगे तब तक अपराध खत्म नहीं होगे। हर जिले में महिला स्पेशल सेल बनाई जाए जो समाज और कानून के जानकार महिलाओं के निगरानी में हो और बाहरी दबावों और राजनीतिक प्रभाव से दूर रखा जाए।
➡️🔥💥श्रीमती सरिता गौतम “मधु” (साहित्यकार हस्ताक्षर साहित्य समिति)💥🔥⬅️

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज हमें आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। वर्तमान में सरकार द्वारा “बेटी बचाओ -बेटी पढ़ाओ”उज्ज्वला योजना”और”नारी शक्ति वंदन अधिनियम “जैसे कदम सराहनीय हैं।इन प्रयासों में महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर नई पहचान दी है। हालांकि,केवल कानून बना देना ही पर्याप्त नहीं है,चुनौती उनके जमीनी क्रियान्वयन और सामाजिक मानसिकता को बदलने की है।
महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सुक्ष्म ऋण योजनाओं(Micro -finance)को और अधिक सरल बनाना चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी लघु उद्योगों से जुड़ सकें।शिक्षा और स्वास्थ्य में सरकारी मदद तो मिल रही है, लेकिन कार्यस्थलों पर सुरक्षा और समान वेतन आज भी एक बड़ा मुद्दा है।
जहां रात्रि पाली (नाइट शिफ्ट) का प्रश्न है,यह आर्थिक अवसर तो देता है,किंतु सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन और प्रशासन की होनी चाहिए।अपराधों को रोकने के लिए कानूनों को केवल कड़ा करना ही हल नहीं हैं,बल्कि ‘फास्ट ट्रैक ‘अदालतों के माध्यम से न्याय की गति को बढ़ाना अनिवार्य है।जब तक समाज में महिलाओं के प्रति ‘वस्तु के बजाय इंसान ‘वाली सोच विकसित नहीं होगी,तब तक बराबरी का दर्जा केवल कागजों तक सीमित रहेगा।
और भी कई विचार आए हैं जिन्होंने नाम लिखने मना किए हैं,जिसमें से हैं
🔥💥सरकार के योजनाओ से “आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका” तथा मितानिन भी है उपेक्षित । 💥🔥
सरकार हर साल सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ता और वेतन में वृद्धि करता हैं दूसरी ओर सरकार की कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका है जो आज भी उपेक्षित है सरकार के हर योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने का इनकी जिम्मेदारी होती है । लेकिन ना तो उन्हें सरकार के द्वारा सम्मानजनक राशि वेतन के रूप में दी जाती है और ना ही इन्हें रिटायरमेंट होने के बात सरकार की ओर से कुछ भी राशि मिलती है । स्थिति इनकी यही होती है कि आपका काम खत्म हो गया अब आपकी छुट्टी। यही स्थिति मितानिनों की भी है सरकार को इन विषयों पर विचार करना चाहिए ।
➡️💥🔥 आरक्षण के कारण प्रतिभा दब जाती है 🔥💥⬅️
सरकार एक ओर महिलाओं को कई सुविधाएं और छूट तो दे रही है।लेकिन इसका दूसरा पहलू ऐसा भी है जहां एक वर्ग इससे उपेक्षित है जिसमें एक तो आरक्षण है जिसमें कई ऊंचे जाति के लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता प्रतियोगिता परीक्षा में माइंस अंक लाने वालों का चयन हो जाता है और 70% से 80% अंक लाने वाले भी मायूस हो जाते हैं । जिसके कारण प्रतिभा दब कर रही जाती है।आरक्षण जाति को देखकर ना होकर उनकी आर्थिक स्थिति को देखकर होना चाहिए ।
➡️🔥💥महतारी वंदन योजना से अविवाहित बेटिया और अविवाहित बहने आज भी है वंचित 🔥💥⬅️




