
दल्ली राजहरा
शनिवार 21 मार्च 2026
भोजराम साहू 9893 765541
भारतीय जनता पार्टी बालोद के जिला महामंत्री सौरभ लुनिया ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ को एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं गृहमंत्री विजय शर्मा का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह कानून राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। नए प्रावधानों के तहत जबरन, प्रलोभन या धोखे से किए जाने वाले धर्मांतरण पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें 7 से 20 वर्ष तक की सजा और सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास तथा ₹25 लाख तक का जुर्माना शामिल है। यह कानून वर्ष 1968 के पुराने कानून का स्थान लेगा, जो वर्तमान समय की चुनौतियों के अनुसार प्रभावी नहीं रह गया था।

सौरभ लुनिया ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का भी विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार जनभावनाओं के अनुरूप निर्णय लेते हुए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का कार्य कर रही है। यह विधेयक उनके दृढ़ नेतृत्व और संवेदनशील शासन का प्रमाण है, जो प्रदेश के हित में निरंतर कार्य कर रहा है।
सौरभ लुनिया ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के कई हिस्सों में ऐसे मामले सामने आए थे, जहां लोगों को प्रलोभन, दबाव या धोखे के माध्यम से धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया जा रहा था, जिससे समाज में असंतोष और असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में एक सख्त और स्पष्ट कानून की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, जिसे भाजपा सरकार ने गंभीरता से समझते हुए अमल में लाया है।

उन्होंने आगे कहा कि इस कानून के लागू होने से अवैध धर्मांतरण की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी, जिससे समाज में आपसी विश्वास और भाईचारा और अधिक मजबूत होगा। साथ ही, कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को प्रलोभन या दबाव से बचाने में भी यह कानून महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रशासन को भी अब ऐसे मामलों में सख्त और त्वरित कार्रवाई करने का अधिकार मिलेगा, जिससे कानून का भय और व्यवस्था दोनों स्थापित होंगे।





