दल्ली राजहरा रविवार 19 अप्रैल 2026 भोजराम साहू 9893 765541 छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा /छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ दल्ली राजहरा वेदांता प्लांट के प्रबंधक को ठहराया दोषी छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता कंपनी के पावर प्लांट में हुआ भीषण हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि यह देश में लगातार कमजोर होते श्रम कानूनों, उद्योग नीतियों, सरकारी उदासीनता और कॉर्पोरेट मुनाफा खोरी का खतरनाक परिणाम है। इस त्रासदी में जिन मजदूरों ने अपनी जान गंवाई, वे किसी आंकड़े का हिस्सा नहीं बल्कि मेहनतकश परिवारों की रीढ़ थे।आज देश में श्रम कानूनों को लगातार कमजोर किया जा रहा है और केवल उद्योगों के हित में और मजदूरों के खिलाफ कड़े नियम बना रही है। सुरक्षा मानकों को लागू करने वाली व्यवस्थाएं कागजों तक सीमित हैं। ठेका प्रथा (कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम) के माध्यम से मजदूरों को अस्थायी बनाकर उनके अधिकार छीने जा रहे हैं, जिससे कंपनियां अपनी जिम्मेदारी से बच निकलती हैं प्लांटों में सुरक्षा नियमों का पालन केवल दिखावा बनकर रह गया है श्रम निरीक्षण की प्रक्रिया कमजोर और औपचारिक हो चुकी है ठेका मजदूरों को सबसे ज्यादा जोखिम भरे कामों में लगाया जाता है, लेकिन उन्हें न तो प्रशिक्षण मिलता है और न ही पर्याप्त सुरक्षा उपकरण ।नए श्रम संहिताओं के बनाए जाने के बाद मजदूरों के अधिकार और भी सीमित हुए हैं, नए श्रम कानून में 8 घंटे के बजाए 12 घंटे की ड्यूटी जबरदस्ती मजदूरों पर थोपा जा रहा है, पहले उद्योगों में सप्ताह में एक दिन प्लांट को बंद रखा जाता था ताकि प्लांट का मेंटनेंस काम कर सके अगले दिन सुरक्षित रूप से प्लांट शुरू हो सके लेकिन अब सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर प्लांटों को सातों दिन संचालित कर केवल उत्पादन और मुनाफे के लिए दुर्घनाओं को न्योता दिया जा रहा है,जिससे कंपनियों को मनमानी की खुली छूट मिल रही है,हम यह साफ कहना चाहते हैं कि यह हादसा केवल वेदांता प्रबंधन की गलती नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की विफलता है जिसने मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना बंद कर दिया है।छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री जनक लाल ठाकुर ने ही घटना की घोर निंदा किया और कहा प्रभावित मजदूरों को उचित मुआवजा मिले और इस लापरवाही में शामिल अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही करे जब तक पीड़ित लोगों को लाभ नहीं मिलता तब तक इस प्लांट को बंद रखा जाए, सक्ती जिले में वेदांता कंपनी के पावर प्लांट में हुआ भीषण हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि मजदूरों की सुरक्षा के प्रति घोर लापरवाही और कॉर्पोरेट लालच का नतीजा है। इस दर्दनाक घटना में कई निर्दोष मजदूरों की मौत और दर्जनों के घायल होने से पूरे प्रदेश में शोक और आक्रोश का माहौल है।हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह हादसा नहीं बल्कि “सिस्टम द्वारा की गई हत्या” है। बार-बार सुरक्षा मानकों की अनदेखी, मजदूरों को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के काम पर लगाना और मेंटेनेंस में लापरवाही—ये सब इस त्रासदी के मुख्य कारण हैं। छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ दल्ली राजहरा के अध्यक्ष सोमनाथ उइके ने कहा ये प्लांट प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा है जिससे मजदूरों को अपनी जान गवानी पड़ी सरकार द्वारा लगातार उद्योगों में खुली छूट देने का नतीजा है, नए श्रम कानून में 8 के बजाए 12 घंटे ड्यूटी करवाने का प्रावधान मजदूरों का शोषण करने का नया प्लान है, 3 शिफ्टों के कामों को 2 शिफ्ट में समेट देने से मजदूरों को शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान झेलना पड़ रहा है, सरकार ने लगातार मजदूरों का शोषण कर रही है, और उद्योगपतियों को भी खुली छूट दे रखी है, ऐसे होने वाले हादसों के खिलाफ सरकार कोई कड़े नियम नहीं बना पाई है जिसका फायदा प्रबंधक उठता है, और मजदूरों को जान देकर इस लापरवाही की कीमत चुकानी होती है,छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा/छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ दल्ली राजहरा/जिला किसान संघ बालोद इस घटना का निंदा करता और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा की मांग के साथ ही साथ इस घटना की जांच कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग करता है।Spread the lovePost navigationराम जानकी सेवा समिति कुसुमकसा के द्वारा भीषण गर्मी को देखते हुए शीतल पेयजल घर का किया गया शुभारंभ।