दल्ली राजहरा शुक्रवार 07 अगस्त 2026 भोजराम साहू 9893 765541

 

माथुर सिनेप्लेक्स में हुआ शो। 13 अगस्त तक रोज सुबह 11:30 बजे लगेगी फिल्म। बौद्ध समाज ने कलाकारों का किया सम्मान

 

 संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन संघर्ष में उनकी जीवनसंगिनी माता रमाबाई के अतुलनीय त्याग को दर्शाने वाली बायोपिक फिल्म “रमाई” का विशेष प्रदर्शन गुरुवार 7 अगस्त को सुबह 11 बजे माथुर सिनेप्लेक्स दल्ली राजहरा में किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत अंबेडकर अनुयायियों द्वारा तथागत गौतम बुद्ध, बोधिसत्व डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं माता रमाई के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर त्रिशरण पंचशील लेने के साथ हुई।

 

 फिल्म टीम का हुआ सम्मान

 

फिल्म की स्क्रीनिंग से पहले बौद्ध समाज के पदाधिकारियों ने फिल्म से जुड़ी पूरी टीम का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस दौरान सहायक निर्माता राजकुमार रामटेके, आर्ट डायरेक्टर प्रवीण वासनिक, प्रोडक्शन हेड शैलेंद्र भगत, प्रबुद्ध बांगरे, फूलचंद कामड़े और नीलकंठ डोंगरे मौजूद रहे।

कौन-कौन से कलाकार
फिल्म में माता रमाबाई का किरदार भिलाई निवासी प्रेरणा धावडे ने निभाया है। बाबा साहब की भूमिका पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र भिलाई के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदय कुमार धावडे ने निभाई है। छत्रपति शाहूजी महाराज की भूमिका हिंदी फिल्म जगत के प्रसिद्ध कलाकार राजा मुराद ने निभाई है।
 रमाई का त्याग: एक प्रेरणा
फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे रमाई ने अत्यंत गरीबी, सामाजिक तिरस्कार और पारिवारिक दुखों को सहते हुए भी बाबा साहब को पढ़ने और समाज सेवा के लिए प्रेरित किया। कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण रमाई अपने चार बच्चों को भी नहीं बचा सकीं। दवा तक का प्रबंध नहीं हो पाया। इसके बावजूद उन्होंने कभी बाबा साहब के मिशन में बाधा नहीं आने दी। 
रमाई के इसी त्याग और सहयोग के कारण बाबा साहब विदेश जाकर 32 डिग्रियां प्राप्त कर सके और 9 भाषाओं का ज्ञान अर्जित कर देश को संविधान दे सके। इसी वजह से समाज उन्हें सम्मान से “माता रमाई” कहता है।
 क्या है फिल्म “रमाई” की कहानी

 

रमाई” डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की पत्नी माता रमाबाई के जीवन पर आधारित जीवनी परक फिल्म है। फिल्म में उनके बचपन से लेकर बाबा साहब के साथ बिताए गए कठिन जीवन को दिखाया गया है।
फिल्म के प्रमुख बिंदु:
1. बाल्यावस्था और विवाह: रमाई का विवाह बहुत कम उम्र में बाबा साहब से हुआ। शादी के बाद से ही उन्हें भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।
2. शिक्षा में सहयोग: बाबा साहब जब उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए, तब घर की सारी जिम्मेदारी रमाई ने अकेले संभाली।
3. अटूट साथ: तमाम व्यक्तिगत दुखों और सामाजिक उपेक्षा के बाद भी रमाई बाबा साहब की शक्ति बनकर रहीं।
 बड़ी संख्या में पहुंचे लोग

 

इस अवसर पर हेमंत कांडे, दिलीप सुकदेवे, अनिल रामटेके, बी.एल. बौद्ध, अशोक बांबेश्वर, सतीश कांबले, रवि बारसागड़े, अरुण ऊके, भीमराव मेश्राम, गोरेलाल बांबेश्वर, गोवर्धन रंगारी, सुमेध कामले, प्रमोद कावले, दिलीप रंगारी, चन्द्ररेखा नंदेश्वर, जोत्सना मेश्राम, विद्या सहारे, कृष्णा गजभिए, भुनेश्वरी बांबेश्वर, ऊषा मेश्राम, सपना मानवतकर सहित बड़ी संख्या में बौद्ध समाज के लोग उपस्थित थे।

 

 13 अगस्त तक चलेगा शो

आयोजकों ने बताया कि फिल्म “रमाई” 13 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे माथुर सिनेप्लेक्स दल्ली राजहरा में प्रदर्शित की जाएगी। सभी से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में आकर फिल्म देखें और माता रमाई के जीवन से प्रेरणा लें।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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